Friday, 24 March 2017

अदालत नही ,संसद तय करेगी पेंशन- अरुण जेटली

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ट्रांसफर पोस्टिंग से दूर रहे सांसद,प्रदेश सरकार के कामकाज में न करें हस्तक्षेप-नाश्ते पर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने दिया मंत्र

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में सुशासन की शपथ भले ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने खाई हो, जिम्मेदारी प्रदेश के सभी भाजपा सांसदों को भी निभानी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि सरकार से ट्रांसफर, पोस्टिंग व पैरवी की कोई अपेक्षा रखे बगैर इस पर ध्यान दें कि राज्य सरकार की दिशा और गति कैसे और तेज हो। सांसद कोई व्यवधान बनने की बजाय सहायक बनें। उनसे स्पष्ट कर दिया गया कि भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था दो ऐसे मुद्दे हैं जिस पर कोई समझौता नहीं होगा। ऐसे में पार्टी के लिए सहानुभूति रखने वाला भी अगर कानून की नजरों में है तो उसकी मदद नहीं हो सकती है।1पिछले साल की तर्ज पर ही प्रधानमंत्री ने अलग-अलग राज्यों के भाजपा सांसदों से मिलने का दौर शुरू कर दिया है। पहली खेप में गुरुवार को उत्तर प्रदेश के भाजपा सांसद सुबह के जलपान पर आमंत्रित किए गए थे। इक्के दुक्के सांसदों को छोड़कर सभी मौजूद थे। पोहा, आलू-पूड़ी, सैंडविच, रबड़ी आदि के नाश्ते से पहले प्रधानमंत्री और शाह ने उत्तर प्रदेश की जीत के लिए सबको बधाई दी पर साथ ही यह आगाह भी कर दिया कि प्रदेश सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप न करें। उन्हें भरोसा जरूर दिलाया गया कि संसदीय कामकाज के निर्वाह में प्रदेश सरकार पूरी मदद करेगी। लेकिन न तो व्यक्तिगत कामकाज और पैरवी की अपेक्षा रखें और न ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाएं। बताते हैं कि कुछ सांसदों ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर पुलिस के दबाव की बात उठाई। लेकिन, उन्हें भी यह स्पष्ट कर दिया गया कि कानून मे कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसके बाद चार अन्य बैच में अलग अलग राज्यों के सांसदों को भी नाश्ते पर बुलाया जाएगा और संगठन व सरकार पर चर्चा होगी।

नाश्ते पर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने दिया मंत्र,प्रदेश सरकार के कामकाज में न करें हस्तक्षेप

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भर्तियों में भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें मिलने से बेशिप सचिव का सभी बीएसए को नियुक्तियां स्थगित करने का आदेश, बेसिक शिक्षा की हजारों भर्तियों पर रोक, ये भर्तियां अधर में अटकी

*बेसिक शिक्षा की हजारों भर्तियों पर रोक*
*ये भर्तियां अधर में अटकी

12460 : प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए पहली काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है।

4000 : प्राथमिक विद्यालयों में उर्दू शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए पहले चरण की काउंसिलिंग शुरू हुई।

32022 : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशक भर्ती के लिए काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी है।

29334 : उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान-गणित विषय की भर्ती में रिक्त सीटों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है।

72825 : प्राथमिक स्कूलों के लिए यह शिक्षक भर्ती 2011 से चल रही है, अब भी कुछ हजार पदों पर नियुक्तियां हो रही।*

*बेशिप सचिव का सभी बीएसए को निर्देश नियुक्तियां स्थगित*

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए चल रही भर्तियां भी गुरुवार को रोक दी गई हैं। शासन के निर्देश पर परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से नियुक्तियां प्रक्रिया स्थगित करने का आदेश दिया है। इस कदम से करीब 80 हजार भर्तियां प्रभावित हो रही हैं।

सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद से विभिन्न आयोग व चयन बोर्ड आदि में चल रही भर्ती प्रक्रिया को रोका जा चुका है। इसका कारण भर्तियों में भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें मिलना है। इसी क्रम में बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग की भी सभी भर्तियां तत्काल प्रभाव से रोक दी गई हैं। यहां पर तीन भर्तियों की प्रक्रिया चल रही थी, जबकि एक भर्ती की काउंसिलिंग अगले माह होना प्रस्तावित है। सभी को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। तीनों भर्तिर्यो का आदेश पिछले साल अक्टूबर व दिसंबर में शासन ने दिया था। परिषद के संयुक्त सचिव अशोक कुमार गुप्त ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भर्तियों पर रोक का लिखित आदेश जारी कर दिया है।

ऑनलाइन आवेदन में हेराफेरी : प्राथमिक विद्यालयों में चल रही 12460 शिक्षकों की काउंसिलिंग में तमाम अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन में हेराफेरी की शिकायत की थी। इस पर परिषद के अफसरों ने सख्त रुख अख्तियार करके निर्देश दिया था। अफसरों का कहना था कि ऑनलाइन आवेदन पत्र में बदलाव किया जाना संभव नहीं है, यदि ऐसा हुआ है तो यह साइबर क्राइम है और इसकी एफआइआर होनी चाहिए। इस पर अभ्यर्थियों ने मौन साध लिया।

उर्दू काउंसिलिंग के अभ्यर्थी लौटाए : प्राथमिक स्कूलों में चार हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती के लिए काउंसिलिंग चल रही है। भर्ती रोकने का आदेश होने पर तमाम जिलों में अभ्यर्थी आए थे, जिन्हें बीएसए के निर्देश पर वापस लौटा दिया गया। उन्हें बताया गया कि अब आगे जो भी निर्देश होंगे उसका अनुपालन किया जाएगा।

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समूह क, ख, ग, घ के नियमित, संविदा, आउट सोर्सिग के माध्यम से भरे जाने वाले पदों का ब्यौरा तलब,

*आउट सोर्सिग व संविदा कर्मियों का ब्यौरा तलब*

*सपाइयों की भी हैं आउट सोर्सिग कंपनियां*

यूं तो सचिवालय से लेकर जिला अस्पताल तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्मचारी सेवा प्रदाता कंपनियों से लिये गए हैं, मगर गुजरे पांच सालों समाजवादी पार्टी के नेताओं, विधान परिषद सदस्यों की कंपनियों से विभिन्न विभागों ने समूह ग से लेकर घ तक के कर्मचारी लगा रखे हैं। इनमें से कई कंपनियां विवादित भी रही हैं। माना जा रहा है कि इस डेटा के जरिये नई सरकार उन कंपनियों की विश्वसनीयता व कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जांच का भी फैसला ले सकती है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सत्ता संभालते के बाद मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने सरकारी महकमों में समूह ‘क’ (राज पत्रित अधिकारी) से लेकर समूह ‘घ’ (चतुर्थ श्रेणी) के पदों पर संविदा, आउटसोर्सिग के जरिये कार्यरत कर्मचारियों, रिक्त और स्वीकृत पदों का ब्यौरा 30 मार्च तक तलब किया है। इसके ‘संकल्प पत्र’ के वादे के मुताबिक नौजवानों को रोजगार मुहैया कराने की कवायद माना जा रहा है।

मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों व विभागाध्यक्षों को 22 मार्च को भेजे निर्देश में कहा है कि समूह क, ख, ग, घ के नियमित, संविदा, आउट सोर्सिग के माध्यम से भरे जाने वाले पदों का ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए। यह भी बताया जाए कि स्वीकृत पदों के सापेक्ष कितने भरे हैं, कितने पद रिक्त है। ब्यौरा 30 मार्च तक उन्हें और कार्मिक विभाग को उपलब्ध कराया जाए। सरकार की इस कवायद को भाजपा के संकल्प पत्र में नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के वादे को पूरा करने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ब्यौरा उपलब्ध होने के बाद सरकार भर्ती की अभियान चलाएगी। ध्यान रहे, इससे पहले मुख्य सचिव ने सेवा विस्तार के जरिये विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों का ब्यौरा तलब किया था। 1

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*आयोगों में नियुक्ति, नई सरकार के पास अनेक शिकायतें आईं और मंशा में खोट पाते ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, बेसिक शिक्षा परिषद की सभी नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी*

*आयोगों में नियुक्ति*

*जागरण संपादकीय*

11वर्ष 2016 बीतते-बीतते और 2017 आते-आते उत्तर प्रदेश में चुनाव की डुगडुगी बजी। सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी दलों का चुनावी मंच पर तालबद्ध पदचाप शुरू हो गया। यह प्रक्रिया लगभग ढाई महीने से ज्यादा चली। जब नई सरकार ने कामकाज संभाला तो पाया कि प्रदेश के भर्ती सेवा आयोगों, चयन बोर्डो ने अपनी रफ्तार काफी तेज कर रखी है। कई-कई साल पीछे की परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए गए, कुछ के साक्षात्कार चल रहे हैं, कुछ में नियुक्ति पत्र देने का सिलसिला शुरू हो गया। नई सरकार के पास अनेक शिकायतें आईं और मंशा में खोट पाते ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, बेसिक शिक्षा परिषद की सभी नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी। इससे बड़ी संख्या में नियुक्तियां पिछड़ जाएंगी। सिर्फ बेसिक शिक्षा परिषद में करीब 80 हजार भर्तियां प्रभावित होंगी। इस विभाग में तीन भर्तियों की प्रक्रिया जारी थी, एक की काउंसिलिंग अगले महीने होनी थी। राज्य सरकार ने विभिन्न तरह की सेवाओं में नियुक्ति के लिए अलग-अलग सेवा आयोग, चयन आयोग व बोर्ड बनाए हैं। उनमें कई सदस्य और अध्यक्ष होते हैं। बाहरी दबाव न डाला जा सके, इसके लिए इन संस्थाओं को सभी आवश्यक संसाधनों के साथ ही कानूनन विशेष दर्जा प्राप्त है, इनके सदस्यों, अध्यक्षों को विशेषाधिकार मिला है। 1पिछले दो साल में इनकी कार्य प्रणाली भ्रष्टाचार से सराबोर रही है। अभ्यर्थी कोर्ट गए और उ.प्र. लोकसेवा आयोग से लेकर सभी तरह के चयन बोर्ड हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट से लताड़े गए। कई सदस्यों, अध्यक्ष को हटाया भी गया। फिर भी इन्होंने अपनी हैसियत का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहा जाता है कि अगर आप न्याय करने के लिए पंच की भूमिका में हैं तो अपना-पराया भूल जाना होगा। प्रतिभा आकलन के आधार पर रोजगार देना भी इसी श्रेणी में आता है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि इतने पवित्र कार्य के लिए नियुक्ति से पहले कम से कम दो दशक का आचरण अवश्य देखा जाए और तमाम प्रमाण पत्रों की बाध्यता के बजाए कार्य-व्यवहार की योग्यता को महत्व दिया जाए। साथ ही इन पदों के लिए ऐसा सख्त कानून बनाए, ऐसे कुकृत्य को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा जाए। आखिर ये विद्वतजन युवाओं के भविष्य को बनाने-बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं। तभी इन संस्थाओं की शुचिता वापस लौट सकेगी, तभी युवाओं को न्याय मिल सकेगा।

*असिस्टेंट प्रोफेसर के साक्षात्कार स्थगित*

*असिस्टेंट प्रोफेसर के साक्षात्कार स्थगित*

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : सूबे में चल रही भर्तियां रोकी गई हैं, इस मुहिम में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग भी शामिल हो गया है। यहां असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए चल रहे साक्षात्कार को स्थगित कर दिया गया है। खास बात यह है कि शासन स्तर से इस आयोग के इंटरव्यू पर रोक के लिए नहीं कहा गया है, बल्कि आयोग अध्यक्ष प्रभात मित्तल ने खुद संज्ञान लेते हुए 24 से 31 मार्च तक होने वाले इंटरव्यू स्थगित कर दिये हैं।1प्रदेश की नई सरकार की ओर से पहले लोकसेवा आयोग उप्र फिर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और बेसिक शिक्षा विभाग की भर्तियां रोकी जा चुकी हैं। उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में भी इन दिनों विज्ञापन संख्या 46 के तहत अशासकीय माध्यमिक कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का इंटरव्यू चल रहा है। यह भर्ती 45 विषयों के 1652 प्रोफेसर पदों के लिए हो रही है उनमें से 44 विषयों की लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया है और 34 विषयों का अंतिम परिणाम घोषित हो चुका है, बाकी 10 विषयों के अभ्यर्थियों का इंटरव्यू चल रहा है। आयोग अध्यक्ष ने बताया कि लोकसेवा आयोग के इंटरव्यू स्थगित होने के बाद उन्होंने भी प्रमुख सचिव से वार्ता की थी। प्रमुख सचिव ने उन्हें इस आयोग का इंटरव्यू रोकने के लिए नहीं कहा है। अध्यक्ष ने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्होंने 31 मार्च तक के इंटरव्यू को स्थगित कर दिया गया है। मित्तल ने बताया कि लोकसेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के इंटरव्यू रोके जाने के बाद अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बन गई है। आयोग के इंटरव्यू में कई अभ्यर्थी पिछले दो दिन में अनुपस्थित रहे। इस कारण भी इंटरव्यू को स्थगित किया गया है, ताकि कुछ दिन में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। बताया कि आगामी 24, 28, 29, 30 व 31 मार्च को संस्कृत, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान व जीव विज्ञान का साक्षात्कार होना था, जिसे स्थगित किया गया है। इसकी सूचना आयोग के वेबसाइट पर दे दी गई है साथ ही अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर पर एसएमएस व ई-मेल के जरिए भी भेजी जा रही है।

विधि संवाददाता, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग इलाहाबाद के सचिव संजय कुमार सिंह की नियुक्ति की वैधता के खिलाफ याचिका पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया है।1डॉ. धीरेंद्र सिंह की याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण टंडन तथा न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र की खंडपीठ ने की। याची का कहना है कि सचिव पद की योग्यता नहीं रखते। फर्जी मार्कशीट देने का भी आरोप लग

Thursday, 23 March 2017

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