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शासनादेश  आवेदन पत्र भरने हेतु महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश   ( ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व दिशा निर्देश ध्यान पूर्वक पढ़ लें एवं आवेदन के प्र...

Monday, 30 November 2015

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को निर्देश जारी किए,21 हजार से अधिक शिक्षकों की स्थायी पदों पर की जाएगी भर्ती। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

स्कूलों में करीब 21 हजार शिक्षकों के पद हैं खाली
एसकेगुप्ता | नई दिल्ली
दिल्लीके सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत दिल्ली में 21 हजार से अधिक शिक्षकों की स्थायी पदों पर भर्ती की जाएगी। दरअसल शिक्षकों की कमी के चलते स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार की ओर से डीएसएसएसबी को अगले सत्र तक नए शिक्षकों की भर्ती करने को कहा गया है। यह जानकारी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दी।
बता दें कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते कांट्रेक्ट बेसिस पर 21 हजार से अधिक शिक्षकों को लगाया गया है। इसके बावजूद कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। छात्रों का अनुपात शिक्षक अनुपात में काफी कम है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा मंत्री सिसोदिया बताते हैं कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में 32 हजार 964 शिक्षक हैं। स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात की बात करें तो एक कक्षा पांचवी तक 60 बच्चों पर दो शिक्षक, छठी से आठवीं कक्षा तक हर कक्षा के हिसाब से एक शिक्षक होना अनिवार्य है, शिक्षकों में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा के शिक्षकों का होना जरूरी है या फिर 35 छात्रों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है। जहां सौ से अधिक बच्चों को दाखिला दिया गया है वहां प्रिंसिपल का होना भी अनिवार्य है। इसके अलावा भवन, लाइब्रेरी, खेल का मैदान भी अनिवार्य है। हमने डीएसएसएसबी को तीन स्तर पर शिक्षकों की भर्ती करने को कहा है। इसमें पीजीटी अध्यापकों की सीधी भर्ती करने को कहा है। आरक्षित श्रेणी के पदों को भरने के लिए समय-समय पर मांग पत्र भी भेजे गए हैं।
टीजीटी शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने डीएसएसएसबी से कहा है, इसके अलावा तीसरे स्तर में विविध श्रेणी के अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने के लिए डीएसएसएसबी को मांगपत्र भेजा जा चुका है। जिन्हें जल्द भरा जाएगा। नियुक्ति विवरणिका मिलते ही इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। दिल्ली सरकार और एमसीडी में गेस्ट और अतििथ कुल मिलाकर 21 हजार 211 शिक्षकों की कमी है। उम्मीद है कि डीएसएसएसबी इन पदों को भरने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू करेगी।

'सत्र लाभ' के सम्बन्ध में रिट याचिका संख्या 3653 (एस एस)/2015 रमेश चन्द्र तिवारी व् अन्य बनाम उ0प्र0 राज्य व् अन्य के सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय के पारित आदेश के अनुपालन में प्रमुख सचिव द्वारा ज़ारी किया गया आदेश। ⏳आदेश की प्रति देखें: शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

फतेहपुर: 'सत्र लाभ' की दरकार पर विभाग से लाचार, शासनादेश ज़ारी होने के बावजूद विभाग ने नही दिया सत्रलाभ, कुछ शिक्षकों को एकल आदेशों पर दिया लाभ। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

टीईटी के आवेदन भरने को उमड़े युवा,दस हजार ने किया आवेदन,इस बार नहीं चूकना चाहते छात्र। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

टीईटी के आवेदन भरने को उमड़े युवा

अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी। बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा शिक्षकों की भर्ती के लिए दो साल के इंतजार के बाद शिक्षा पात्रता परीक्षा-2016 की तिथि दो फरवरी घोषित कर दी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए ऑन लाइन आवेदन भरने की प्रक्रिया 27 नवंबर से शुरू हो गई है। युवाओं में इसे लेकर काफी क्रेज दिख रहा है। साइबर कैफे पर भी आवेदन भरने के लिए भीड़ जुट रही है।
शिक्षा मित्रों का जो समायोजन रद्द हुआ, इसमें एक मुख्य वजह उनका टीईटी पास न होना भी था। इसलिए शिक्षक बनने के लिए टीईटी का उत्तीर्ण होना नितांत आवश्यक माना जाने लगा है। सूबे में 1.72 लाख शिक्षा मित्रों में सिर्फ 20 हजार की टीईटी उत्तीर्ण थे। वर्ष-2013 में टीईटी परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन इसके बाद बेसिक शिक्षा निदेशालय ने अब टीईटी परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेमचंद्र यादव ने बताया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन के लिए 27 नवंबर से वेबसाइट खोल दी गई है। ऑनलाइन आवेदन भरने शुरू हो गए हैं। आवेदन भरने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर है।
दस हजार ने किया आवेदन

-युवाओं में टीईटी के प्रति क्रेज का अंदाजा इस बात सभी लगाया जा सकता है कि चुनावी आपाधापी के बीच अभी सिर्फ वेबसाइट को खुले दो दिन ही हुए हैं लेकिन ऑनलाइन आवेदन भरने वालों की संख्या दस हजार को भी पार कर गई है। साइबर कैफे में आवेदन भरने को भीड़ जुटने लगी है।
इस बार नहीं चूकना चाहते

-शिक्षा मित्रों का समायोजन करने के लिए प्रदेश शासन ने विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण दिया था। 1610 का समायोजन हुआ था, जो अब रद्द हो चुका है। अब बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र भी टीईटी परीक्षा के आवेदन भरने में जुटे हुए हैं। लेकिन इस बार चूकना नहीं चाहते। आशंका यह भी है कि कहीं टीईटी की अनिवार्यता आगे बनता काम न बिगाड़ दे।
-टीईटी ऑन लाइन आवेदन भरने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर है। जूनियर हाई स्कूलों में शिक्षक पद के लिए बीएड डिग्रीधारक व प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त ही आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा दो फरवरी को आयोजित की जाएगी।

प्रेमचंद्र यादव बेसिक शिक्षा अधिकारी संभल

7वाँ वेतन आयोग :दूध में उबाल की तरह है भत्तों में बढ़ाेतरी की सिफारिश। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

दूध में उबाल की तरह है भत्तों में बढ़ाेतरी की सिफारिश
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सातवें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भले ही विभिन्न श्रेणियों में एचआरए भुगतान 10, 20 एवं 30 फीसदी से घटाकर आठ, 16 एवं 24 फीसदी किए जाने का प्रस्ताव रखा हो लेकिन नए फॉर्मूले से एचआरए भुगतान की राशि बढ़कर तकरीबन दोगुनी हो जाएगी। हालांकि कर्मचारी इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि भत्तों में प्रस्तावित बढ़ोत्तरी दूध में उबाल के समान है। रिटायरमेंट दौरान या उसके बाद इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। अगर वेतन में बढ़ोतरी मांग के अनुरूप होती तो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के दौरान ग्रेच्युटी और उसके बाद पेंशन में फायदा होता। प्रस्तावित वेतन वृद्धि में तो मौजूदा महंगाई का भी ध्यान नहीं रखा गया और न ही इस बात पर मंथन किया गया कि दस साल जब आठवां वेतन आयोग लागू होगा तो उस वक्त महंगाई की स्थिति क्या होगी।
यह बात सही है कि सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों में कर्मचारियों के भत्तों में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा गया है। कर्मचारियों को पहले मूल वेतन पर एचआरए मिलता था लेकिन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक अब कुल वेतन पर एचआरए मिलेगा। उदाहरण के तौर पर किसी का मूल वेतन सात हजार रुपये है तो उसे वर्तमान दस फीसदी की दर से सात सौ रुपये एचआरए मिलता है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के मुताबिक सात हजार रुपये मूल वेतन पाने वाले का कुल वेतन 18000 रुपये किए जाने का प्रस्ताव है लेकिन एचआरए की दर 10 से घटाकर आठ फीसदी किए जाने का प्रस्ताव है। ऐसे में सातवें वेतन आयोग लागू होने के बाद आठ फीसदी की दर से कर्मचारी को 1440 रुपये एचआरए का भुगतान होगा। इसी तरह अन्य भत्तों में भी बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई लेकिन वेतन में मामूली बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है।
सिविल एकाउंट्स ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी का कहना है कि सात हजार मूल वेतन पाने वाला कर्मचारी कुल साढ़े सोलह हजार के आसपास वेतन पा रहा है। ऐसे में दस वर्ष बाद उसके वेतन में महज डेढ़ हजार रुपये की बढ़ोतरी पूरी तरह से अनुचित है। भत्तों का भुगतान तो नौकरी के साथ खत्म हो जाएगा। पेंशन, ग्रेच्युटी, पेंशन कम्युटेशन सहित सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले सभी लाभ अंतिम वेतन पर ही आधारित होते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के दौरान और उसके बाद कर्मचारियों को काफी नुकसान होगा। कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले दस साल के दौरान जिस अनुपात में महंगाई बढ़ी, वेतन बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव उससे काफी कम है। साथ ही प्रस्ताव बनाने वक्त यह ध्यान भी नहीं रखा गया कि दस साल बाद जब आठवां वेतन आयोग लागू होगा तो उस वक्त महंगाई की स्थिति क्या होगी।

72000 शिक्षक भर्ती की होगी जांच,सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तलब किया रिकॉर्ड। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तलब किया रिकॉर्ड
72000 शिक्षक भर्ती की होगी जांच
जागरण संवाददाता, आगरा
लंबे इंतजार और लड़ाई के बाद 72825 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन इसकी फिर से जांच होगी। प्रदेश में आगरा सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिनके कट ऑफ से ज्यादा अंक हैं। इसके बाद भी उनका चयन नहीं हुआ है।
टीईटी पास 72,825 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरिट लिस्ट तैयार कर काउंसिलिंग हुई थी। इस पर अभ्यर्थियों ने उंगली उठाई है। आगरा के साढ़े तीन सौ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन दिया है कि चयन के लिए जारी कटऑफ से ज्यादा उनके अंक थे। मगर इसके बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हुई। इसमें सामान्य वर्ग में 70 फीसद और आरक्षित वर्ग में 60 फीसद से ज्यादा अंक वाले अभ्यर्थी शामिल हैं
नियुक्ति न होने पर ऐसे अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में सिविल याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव से रिपोर्ट मांगी है। इसके तहत ही ऐसे अभ्यर्थियों से प्रत्यावेदन मांगे थे। आगरा में 100 पदों पर नियुक्ति होनी थी, लेकिन 350 से ज्यादा ने प्रत्यावेदन दिए हैं। सचिव ने बीएसए और डायट प्राचार्य को प्रत्यावेदन देने वालों का पूरा ब्योरा भी भेजा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभाग के हाथ पांव फूल गए हैं। बेसिक शिक्षा सचिव को तीन दिन में बीएसए और डायट प्राचार्य को नियुक्ति प्रक्रिया की पूरी रिपोर्ट देनी है। इसमें उन्हें बताना होगा कि कितने अभ्यर्थी काउंसिलिंग में शामिल नहीं हुए। कितने ऐसे थे, जो काउंसिलिंग में उपस्थित हुए लेकिन उनका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया। ऐसे कितने थे, जो काउंसिलिंग में आए, लेकिन चयन नहीं हुआ। कितने ऐसे थे जिनका चयन तो हुआ, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं लिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तलब किया रिकॉर्डचयन प्रक्रिया डायट ने पूरी की थी। उनके द्वारा दी गई अंतिम सूची पर हमने अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी। पूरा रिकॉर्ड उनके पास ही है, वो ही रिपोर्ट शासन को देंगे।
-धर्मेद्र सक्सेना, बीएसए।

फेल न करने की नीति में बदलाव पर राज्यों में मतभेद:आठवीं तक फेल न करने का मामला,•कर्नाटक ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को ठुकराया •उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम नीति को बदलने के पक्ष में। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

फेल न करने की नीति में बदलाव पर मतभेद:आठवीं तक फेल न करने का मामला
नई दिल्ली: कक्षा एक से आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति को बदलने के मुद्दे पर कांग्रेस शासित राज्यों की अलग-अलग राय सामने आई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अब तक 14 राज्यों ने अपनी राय पेश कर दी है।
इनमें से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और मिजोरम ने कक्षा एक से आठवीं तक परीक्षा नहीं होने की नीति को खामियों भरा बताते हुए इसे बदलने की मांग मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की है।
वहीं, कांग्रेस के लिए सबसे प्रमुख राज्य कर्नाटक ने इस नीति को हटाने के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव का विरोध किया है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, यूपी, उत्तराखंड, पुड्डुचेरी, दिल्ली और कर्नाटक ने कक्षा एक से आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति के मुद्दे पर अपनी राय भेज दी है। इन राज्यों में से सिर्फ कर्नाटक ही अकेला राज्य है, जिसने इस नीति को बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया है। कर्नाटक ने तर्क दिया है कि इस नीति से पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि पहले बच्चे फेल होने की स्थिति में निराश होकर शिक्षा छोड़ देते थे।
नो डिटेंशन पॉलिसी यूपीए सरकार के समय लागू हुई थी। इस नीति को लागू करने में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अहम भूमिका थी। यह नीति शुरू से ही विवादों में रही।
आठवीं तक फेल न करने का मामला
•कर्नाटक ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को ठुकराया
•उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम नीति को बदलने के पक्ष में

टीईटी में परखा जाएगा अब बाल मनोविज्ञान। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

टीईटी में परखा जाएगा अब बाल मनोविज्ञान
इलाहाबाद (ब्यूरो)। परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश की ओर से दो फरवरी को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी)2015 की तैयारी शुरू हो गई है। रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी नवल किशोर ने बताया कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक टीईटी अलग-अलग होगी। प्राथमिक टीईटी में गणित, बाल मनोविज्ञान, हिंदी भाषा, पर्यावरण अध्ययन, अंग्रेजी-संस्कृत-उर्दू और उच्च प्राथमिक टीईटी में पर्यावरण अध्ययन की जगह विज्ञान की परीक्षा होगी।
रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बताया कि 2014 की टीईटी में नौ लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे, परीक्षा में 7.50 लाख शामिल हुए थे। 2014 की परीक्षा में प्रदेश भर में 600 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस बार उम्मीद है कि प्रदेश केप्राथमिक विद्यालयों में काम कर रहे सभी शिक्षामित्र भी टीईटी में शामिल होंगे, ऐसे में उम्मीद है कि 2015 की टीईटी में परीक्षार्थियों की संख्या 10 लाख पार कर जाएगी। इसलिए परीक्षा नियामक की ओर से प्रदेश भर में एक हजार परीक्षा केंद्र बनाए जाने की तैयारी है। प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों में सर्वाधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।

इंटर कालेजों में बढ़ाये जायेंगे शिक्षकों के पद। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

वाइटनर का प्रयोग किया तो टीईटी से बाहर अभ्यर्थी परीक्षा कक्ष में नहीं ले जा सकेंगे कोई अतिरिक्त सामान। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

वाइटनर का प्रयोग किया तो टीईटी से बाहर
अभ्यर्थी परीक्षा कक्ष में नहीं ले जा सकेंगे कोई अतिरिक्त सामान1
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद
राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में वाइटनर का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों की कापियां नहीं जंचेंगी। उन्हें परीक्षा से बाहर मान लिया जाएगा। 2011 में टीईटी में वाइटनर का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों का मामला अदालत में जाने के बाद इस बार परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने पहले ही इस बारे में सचेत कर दिया है। इसके अलावा भी कई मार्गदर्शी सिद्धांत तय किए गए हैं।
राज्य शिक्षक पात्रता दो फरवरी,16 को प्रस्तावित है। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और लगभग पंद्रह लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए अभ्यर्थियों की गाइडलाइन तय कर दी गई है। किसी भी सवाल के उत्तर में परिवर्तन की गुंजाइश नहीं रहेगी। अभ्यर्थियों को सही जवाब पर टिक करने के लिए पहले सुनिश्चित होना होगा, अन्यथा उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वाइटनर का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि किसी अभ्यर्थी ने किया तो आप्टिकल स्कैनर उक्त कापी को खुद ही रिजेक्ट कर देगा। उत्तर पत्रक विशेष प्रकार का होगा जिसे आप्टिकल स्कैनर पर स्कैन किया जाएगा। टीईटी-2011 में हजारों अभ्यर्थियों ने वाइटनर का प्रयोग किया था और उनकी कापियां भी जांच ली गई थीं। इनमें कई सफल भी हुए थे और कुछ का चयन सहायक अध्यापक पदों पर किया भी जा चुका है। इसे अदालत में चुनौती दी गई है। गाइडलाइन के अनुसार बुकलेट की भी पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी की ही होगी। यदि कोई बुकलेट कम पाई गई तो माना जाएगा कि वह अभ्यर्थी अपने साथ ले गया है और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। नकल पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए कक्ष में कई सामानों को ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। विशेष तौर पर इलेक्ट्रानिक डिवाइस। कैलकुलेटर, रूलर, इलेक्ट्रानिक घड़ी, मोबाइल फोन, पेजर यदि किसी भी अभ्यर्थी के पास पाया गया तो उसे परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया जाएगा। किसी भी सवाल का जवाब पेंसिल से देने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

Sunday, 29 November 2015

शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी | अब नेट, सेट परीक्षा की तरह ही टीईटी (अध्यापक पात्रता परीक्षा) का सर्टिफिकेट लाइफ टाइम के लिए होगा वैध । ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट इन(सौरभ त्रिवेदी)

शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी
रायपुर। शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी है। अब नेट, सेट परीक्षा की तरह ही टीईटी (अध्यापक पात्रता परीक्षा) का सर्टिफिकेट लाइफ टाइम के लिए वैध होगा। शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार टीईटी देने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में जल्द ही सीजीटीईटी के लिए टीईटी सेल गठित होगा। परीक्षा के बाद 6 सप्ताह यानी 45 दिन के भीतर अब परिणाम घोषित करने होंगे। रिजल्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। सीटीईटी की तरह ही सीजीटीईटी का स्टैंडर्ड होगा। जिस तरह से अभी नेट की तरह सीजी सेट परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
37710 प्राथमिक शालाओं की संख्या
16572 पूर्व माध्यमिक शाला
2849 हाई एवं 3177 हायर सेकंडरी स्कूल
79 हजार करीब छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के पद खाली
2 लाख 50 हजार करीब शिक्षक प्रदेश में
अभी वैधता सिर्फ 7 साल
वर्तमान में टीईटी का सर्टिफिकेट सिर्फ सात साल के लिए वैध माना जाता है। यानी जिन अभ्यर्थियों ने 2010 में टीईटी पास किया है, उनका सर्टिफिकेट 2017 तक वैध होगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने पुराने नियम बदलने के साथ-साथ नए नियमों के लिए गाइड लाइन तैयार की है। इसकी अधिसूचना जल्द ही राज्यों को जारी कर दी जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) ने एनसीटीई के नए एजेंडे पर तैयारी शुरू कर दी है। पिछले महीने टीईटी की नई गाइड लाइन को लेकर हुई बैठक में चर्चा के बाद अब एससीईआरटी ने भी एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि एनसीटीई की जारी अधिसूचना के मुताबिक देश की स्कूली शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को अब पात्रता के लिए टीईटी देनी होगी। शिक्षा के अधिकार के अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के अंतर्गत कक्षा 1 से लेकर 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति से पहले निर्धारित योग्यता का परीक्षण किया जाएगा, जिसमें यह टेस्ट शामिल है।
अब हाई एवं हायर सेकंडरी के लिए भी होगी टीईटी
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत एनसीटीई ने अभी तक सिर्फ पहली से आठवीं तक टीईटी लेने का निर्णय लिया था, लेकिन अब हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में भी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी आयोजित की जाएगी। टीईटी पास करने के बाद यदि कोई शिक्षक दो सब्जेक्ट पढ़ा सकता है तो वह सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, कॉमर्स आदि किसी भी सब्जेक्ट को चूज कर सकेगा।
कॉलेजों को रखना होगा रिकॉर्ड
मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की गाइड लाइन के मुताबिक अब सभी कॉलेजों को टीईटी पास अपने छात्रों का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके लिए भी गाइड लाइन तय कर दी गई है। अब सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना जरूरी होगा। छत्तीसगढ़ में जो टीईटी सेल गठित होगा उसे नियमित रूप से एनसीटीई के साथ कम्यूनिकेशन रखना होगा। साथ ही हाई एवं हायर सेकंडरी कक्षाओं में शिक्षकों की भर्ती के लिए अभी जो नियम बने हैं उनमें संशोधन कर टीईटी पास होने की अनिवार्यता रखनी होगी। निजी स्कूलों में भी टीईटी पास शिक्षकों को ही पढ़ाने के लिए काबिल माना जाएगा।
अभी ये है व्यवस्था
पहली से पांचवीं स्तर की टीईटी में दसवीं कक्षा के स्तर के सवाल
छठवीं से आठवीं तक 12वीं स्तर के पूछे जा रहे हैं सवाल
अब तक हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों के लिए टीईटी नहीं थी
अभी सभी सब्जेक्ट में 60 फीसदी अंक लाना जरूरी है
टीईटी में 150 सवालों को हल करने के लिए 90 मिनट का समय
टीईटी के सर्टिफिकेट की वैधता 7 साल
अब ये होगी व्यवस्था
अब पांचवीं स्तर की टीईटी में सिर्फ आठवीं स्तर के सवाल होंगे
अब छठवीं से आठवीं स्तर की परीक्षा में सिर्फ दसवीं स्तर के सवाल होंगे
अब हाई एवं हायर सेकंडरी कक्षा के शिक्षकों को भी टीईटी पास करना है
अब हर सब्जेक्ट में 33 फीसदी अंक के साथ 60 फीसदी कुल अंक लाना है
टीईटी परीक्षा के लिए 150 सवालों को अब 150 मिनट में हल करेंगे
टीईटी पास करने के बाद अब जिंदगीभर इस सर्टिफिकेट की वैधता होगी
अब तक दो बार हो चुकी है राज्य में परीक्षा
शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 2 के तहत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। यह परीक्षा एनसीटीई के निर्देशानुसार संबंधित छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जाती है। इसके लिए छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल को नोडल एजेंसी बनाया गया है। पिछले सालों में अब तक दो बार परीक्षा हो चुकी है।
सीजीटीईटी-2012
परीक्षा स्तर कुल परीक्षार्थी उत्तीर्ण परीक्षार्थी
प्राइमरी - 531354 - 51662
मिडिल -203230 - 25882
सीजीटीईटी 2014
परीक्षा स्तर कुल परीक्षार्थी उत्तीर्ण परीक्षार्थी
प्राइमरी - 51181 - 11372
मिडिल -48049 - 7705
अभी चर्चा हुई है, अधिसूचना जारी होने पर पालन करेंगे
एनसीटीई ने चर्चा के अनुसार जो एजेंडा भेजा है उसके मुताबिक अब नेट, सेट की तरह ही टीईटी परीक्षा के सर्टिफिकेट की वैधता लाइफ टाइम करने पर विचार किया गया है। छत्तीसगढ़ में सीजीटीईटी के लिए सेल गठित करने पर भी विचार है। हालांकि अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। अधिसूचना जारी होते ही राज्य सरकार एनसीटीई के मापदंड का पालन करेगी। हम एजेंडे के हिसाब से तैयार हैं।
- संजय ओझा, संचालक, एससीईआरटी
एक्सपर्ट व्यू
शिक्षकों के लिए अच्छा प्रयास
शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई ने जो मापदंड बनाने की तैयारी की है। वह भविष्य में शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए बेहतर प्रयास है। हालांकि इसमें चुनौती यही होगी कि राज्य में टीईटी में ईमानदारी के साथ एनसीटीई के मापदंड पर कहां तक पालन किया जाएगा। इस पर ध्यान देने की जरूरत होगी।
- बीकेएस रे, शिक्षाविद

naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raipur-good-news-for-people-who-wish-to-become-teachers-585491

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