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डी० एल० एड० ( पूर्व प्रचलित नाम बी० टी० सी० ) प्रशिक्षण- 2016 के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ, समस्त नियम शर्ते अर्हता आदि को पढ़ते समझते हुए यहां से आवेदन करें

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Monday, 31 August 2015

शिक्षामित्रों संघ का आरोप , अभिलेखों के सत्यापन के नाम पर की जा रही वसूली ।वही दूसरी ओर टीईटी संघर्ष मोर्चा की बैठक में कहा गया है कि शिक्षक भर्ती में समय बिता रही है है सरकार। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाएं आज दिनांक 31.08.2015 को कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मऊ द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी है जिसमें मा0 मुख्यमंत्री के आज जनपद आगमन पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हार्द्रिक स्वागत एवं अभिनंदन के विषय में है साथ-ही-साथ विज्ञप्ति में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाएं दी गयी है । अगर आप शिक्षक है तो जानिए आपके विभाग में कौन- कौन सी योजनाएं संचालित है। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

शिक्षक शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

सरकारी स्कूलों मे बच्चों को पढाने का फैसला लागू हो। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

आज से शुरू होगा अंगेजी विद्यालय का संचालन। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

डीएम ने बीएसए से तलब किया जबाब-शिक्षक संगठनों ने साधी चुप्पी। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

बेसिक स्कूलों में हर हफ्ते होगा कुछ नया, ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

प्रथम नियुक्ति के आधार पर हो पदोन्नति। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

कमरों में कैद नौनिहालों का भविष्य। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

रसोईयों को मिले नियमित कर्मचारी का दर्जा। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

विद्यालयों के बाहर लिखी जाएगी अंग्रेजी वर्णमाला, ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

अब मानदेय लेकर ही दम लेंगे शिक्षक। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

जौनपुर : माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा द्वारा रविवार को नगर के ¨हदी भवन में पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें जिले के पत्रकारों को सम्मानित कर वादाखिलाफी करने वाली सपा सरकार पर जमकर गरजने के बाद वक्ताओं ने कहा कि आगामी 4 सितंबर को मानदेय की मांग पूरा कराकर ही दम लेंगे।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शशि मोहन ¨सह'क्षेम'ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका अदा करता है तो पत्रकार समाज को दर्पण दिखाने का काम करता है। विशिष्ट अतिथि शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने कहा कि वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को मानदेय देने का वादा कर सत्ता हासिल करने वाली सपा सरकार वादाखिलाफी पर उतर आई है। अब वार्ता का समय नहीं रहा, शिक्षक अपना हक लेने के लिए विधानसभा का घेराव कर जब तक सरकार द्वारा मानदेय का शासनादेश जारी नहीं हो जाता तब तक शिक्षक धरने व अनशन पर बैठे रहेंगे। वित्त विहीन प्रबंधक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र को सुयोग्य नागरिक देने वाले शिक्षकों के बीच समाज को आइना दिखाने वाले पत्रकारों को सम्मानित कर हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
अध्यक्षता कर रहे प्रदेशीय महामंत्री छोटेलाल यादव ने सभा में आए प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों से 4 सितंबर को विद्यालय बंद कर समस्त शिक्षक कर्मचारियों के साथ लखनऊ पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की बात कही। आयोजकों द्वारा जिले भर के दो दर्जन से अधिक पत्रकारों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित कियागया। वक्ताओं में विष्णु प्रताप ¨सह, डा.रमेश चंद्र वर्मा, अखिलेश ¨सह, श्रद्धेय गुप्त, लालजी यादव, विकास ¨सह, प्रकाश चंद्र पाल, आदेश ¨सह, देवानंद पटेल, सुशील ¨सह आदि रहे। संचालन जिलाध्यक्ष राजेश मिश्र व आभार पत्रकार शरद ¨सह ने ज्ञापित किया।

प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में डेढ़ लाख शिक्षकों की कमी। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नौकरशाहों, राजनेताओं एवं सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। आदेश के पालन में एक जो बड़ी बाधा है वह है स्कूलों में शिक्षकों की कमी। प्रदेश में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती पर बने गतिरोध के कारण शिक्षक और छात्रों का अनुपात आरटीई मानक के अनुरूप नहीं है।
आरटीई 2009 के अनुसार विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों का अनुपात एक और तीस होना चाहिए, जबकि यह अनुपात एक और 45 का बना हुआ है। राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से जारी रिपोर्ट में आरटीई मानक के लिए लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों की कमी बनी है। आरटीई मानक के अनुसार शिक्षकों की बात कौन करे, कुछ विद्यालय तो ऐसे हैं जहां एक शिक्षक के भरोसे सैकड़ों छात्रों का भविष्य जुड़ा है।

6,615 शिक्षक भर्ती में ग्रहण, रद्द होंगी कई नियुक्तियां। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रशिक्षित शिक्षक (एलटी) भर्ती में फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाले 375 अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। इसमें 220 पुरुष व 155 महिला अभ्यर्थी हैं। यह स्थिति तब है जब 2909 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया है।
शासन से लेकर निदेशालय तक अब इसको लेकर सतर्क है। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। फर्जी प्रमाण पत्र लगाने का खुलासा माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मंडलवार प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर हुआ है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राजकीय इंटर कॉलेजों में 6,615 शिक्षकों की भर्ती खोली थी। मंडल स्तर पर भर्ती का अधिकार मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को दिया गया। कुल पदों में 2633 पुरुष व 3882 महिला शिक्षकों के पद हैं। मंडलीय स्तर पर होने वाली भर्ती मेरिट के आधार पर शुरू की गई।
मेरिट के आधार पर होने वाली भर्ती में स्थान पाने के लिए अभ्यर्थियों ने खूब फर्जीवाड़ा किया। अधिकतर मंडलों में फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी हथियाई गई। इसका खुलासा उस समय हुआ जब लखनऊ विश्वविद्यालय को प्रमाण पत्रों की जांच में भारी गड़बड़ी मिली।
इन जिलों में इतने फर्जी प्रमाण पत्र
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लखनऊ मंडल में जांच के दौरान 113 पुरुष व 83 महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। वाराणसी में 92 पुरुष व 61 महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
बरेली में पांच पुरुष व चार महिला, कानपुर में दो पुरुष व एक महिला तथा मिर्जापुर में आठ पुरुष व छह महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
यह स्थिति तब है जब प्रदेश में मात्र 2909 अभ्यर्थियों को शिक्षक का नियुक्ति पत्र बांटा गया। पात्रों में 742 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण किया है, इसमें 301 पुरुष व 441 महिला शिक्षिकाएं हैं।
बर्खास्त कर होगी एफआईआर
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माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजे निर्देश में कहा है कि संदेह के आधार पर भर्ती होने वालों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाए।
इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वर्मा ने यह भी निर्देश दिया है कि इसकी सूचना उन्हें देने के साथ अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भी दी जाए

85 कालेजों के नाम से बनाई 25000 फर्जी मार्कशीट। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

डाक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री घोटाले में एक और खुलासा हुआ है। रेट फिक्स करके बेची गई 25 हजार फर्जी डिग्रियां 85 कालेजों के नाम से बनाई गईं थीं। इनमें कई कालेज ऐसे हैं, जिनके मैनेजमेंट को पता ही नहीं चला कि घोटाले में उनका नाम इस्तेमाल हुआ है। कुछ ऐसे हैं, जो खुद जालसाजी में शामिल रहे। एसआईटी ने सभी कालेजों का ब्योरा तैयार कर हाईकोर्ट के सामने रखा है।
इस पर सुनवाई दो सितंबर को होनी है। सभी 85 कालेज आगरा जनपद के हैं। ज्यादातर देहात में और प्राइवेट है। इनके नाम से बीएड की डिग्री जारी की गई। एसआईटी के सूत्रों ने बताया कि फर्जी डिग्रियों की जांच में इन कालेजों के नाम सामने आया। डिग्री पर नाम देखकर कालेजों में जांच पड़ताल की गई। पता चला कि जिनका इन कालेजों में दाखिला ही नहीं था, उनकी डिग्रियों पर कालेज का नाम था।
एसआईटी जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही है। घोटाले में विश्वविद्यालय के लिपिकों से लेकर आला अधिकारी तक फंसे हैं। अब इन कालेजों के मैनेजमेंट भी घबरा गए हैं, जिनके नाम फर्जी डिग्रियों में मिले। देखना है कि इनके बारे में हाईकोर्ट से एसआईटी को क्या निर्देश मिलता है। जांच पूरी होने के बाद केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट लखनऊ में होनी है। एसआईटी के मामले इसी कोर्ट में जाते हैं। हालांकि घोटाले की एफआईआर आगरा में दर्ज कराई गई थी।
आगे की जांच में ही इन कालेजों की भूमिका साफ होगी। पहले जांच आगरा डीआईजी के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी में लखनऊ के अधिकारी हैं। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

सातवाँ वेतन आयोग करेगा मायूस, उम्मीद से कम वेतन बढ़ने के आसार। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

न्यूनतम वेतन 7 हजार से 26 हजार करने में हिचकिचाहट
छोटे कर्मचारी और कैबिनेट सचिव के वेतन में रहेगा बड़ा अंतर
कर्मचारी छठे वेतन आयोग जैसा इसे लुभावना न समझें
नई दिल्ली। वस्तुओं के जो बाजार भाव सातवें वेतन आयोग ने जमा किए हैं, उसके चलते नया वेतन आयोग कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग जैसा लुभावना नहीं रहेगा । बताया जा रहा है कि सातवें वेतन आयोग को बाजार में वैसी महंगाई नहीं दिखाई दे रही है, जैसी कि वास्तविकता में है। पिछले वेतन आयोग ने बाजार में महंगाई पर काबू पाने में सरकार की नाकामी के चलते कर्मचारियों के भत्तों में जबर्दस्त इजाफा किया था । कर्मचारियों के वेतन में पौने दो गुना तक की बढोतरी हुई थी।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नए वेतन आयोग में बेसिक वेतन 26000 रुपये मासिक करने का आग्रह किया गया है लेकिन खबर है कि जस्टिस अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता वाला सातवां वेतन आयोग इतना मासिक वेतन देने के लिए केंद्र सरकार को नहीं कहने वाला है । अभी सबसे छोटे कर्मचारी का बेसिक वेतन 7000 रुपए है। महंगाई के मद्देनज़र वेतन में यह छलांग साढे तीन गुना से ज्यादा मांगी गई है। इसी प्रकार से कैबिनेट सचिव और सबसे छोटे कर्मचारी के वेतन के बीच फासला 1 : 8 (एक अनुपात आठ) रखने की मांग है। खबर है कि सातवां वेतन आयोग इसे भी नहीं मानने जा रहा है। अभी कैबिनेट सचिव और सबसे छोटे कर्मचारी के वेतन में 1:12.5 (एक अनुपात साढे बारह) का अंतर है।
कर्मचारियों के लिए खुशखबरी यह है कि सातवां वेतन आयोग यह जरूर ध्यान रखेगा कि छोटे-बड़े कर्मचारियों के वेतन वृद्धि एक समान प्रतिशत में की जाए । पिछला वेतन आयोग कई मामलों में बहुत अच्छा रहा था लेकिन उसमें यह विसंगति रह गई थी कि किसी पद को 5% के वेतनवृद्धि मिल गई थी और किसी को उससे कम ।
सबसे छोटे कर्मचारी के लिए बेसिक वेतन 26000 रुपये करने की मांग करने वाले मज़दूर संगठनों का तर्क यह है कि अभी उन्हें 7000 बेसिक और 113% डीए मिलाकर (इसमें मोदी सरकार से मिली 6 % के बढोतरी भी शामिल की जानी है) 15 हजार रुपये से ज्यादा मिल रहे हैं । इसलिए बेसिक वेतन 26 हजार करना ज्यादा बडी़ बढोतरी नहीं है । उनका यह भी कहना है कि सातवें वेतन आयोग ने बाजार में वस्तुओ के जो भाव जमा किए हैं, वो पुराने हैं और थोक बाजार से जमा किए है बताया यह भी जा रहा है कि गेंहू, चावल, दाल के भाव काफी ऊपर चढे़ हुए हैं । इन दलीलों का असर सातवें वेतन आयोग पर होगा, अभी कहना मुश्किल है।

नए विवाद के बीच हुई आरओ भर्ती परीक्षा। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी-2014 मुख्य परीक्षा रविवार को संपन्न हो गई, लेकिन इसके साथ कुछ विवाद भी जुड़ गए हैं। सिविल लाइंस स्थिति एक परीक्षा केंद्र पर दो अभ्यर्थियों को दूसरे कमरे में बैठाने का आरोप है।
इसके अलावा शनिवार को हुई हिंदी के एक प्रश्न में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने पर भी विवाद शुरू हो गया है।
हिंदी के पेपर में आयोग ने पत्र लेखन में उच्चतर शिक्षा संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसका सार लिखने के लिए कहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र में उच्चतर शिक्षण संस्थानों के प्रवेश प्रक्रिया में माफिया, नेताओं और पूंजीपतियों के हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए इस पर निगरानी के लिए लिखने को कहा गया था। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं तो छात्र इसे खुद के आंदोलन से जोड़कर भी देख रहे हैं। इससे उनमें नाराजगी है।
रविवार को हुई परीक्षा में नेपाल भूकंप पर निबंध लिखने के लिए आया था। गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रारंभिक परीक्षा भी भूकंप के झटके लगने के अगले दिन हुई थी। इससे परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों में काफी दहशत रही। इसके अलाव समसामायिकी के खंड में विश्व योग दिवस और सुकन्या समृद्धि योजना पर निबंध लिखने के लिए कहा गया था। अभ्यर्थियों को इन तीनों में से किसी एक पर निबंध लिखना था। इनके अलावा साहित्य और संस्कृति का संबंध, प्राचीन सामाजिक जीवन में प्राकृतिक-संपदा की भूमिका, वर्तमान रानजीति-मानवीय मूल्यों के संदर्भ में, बहुल प्रौद्योगिकी प्रसार का पर्यावरण पर प्रभाव, बहुकर प्रणाली का औचित्य और जैविक-कृषि और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में से अलग-अलग खंडे से दो निबंध लिखने थे।
रक्षाबंधन के दिन परीक्षा से रही नाराजगी
आरओ-एआरओ मुख्य परीक्षा रक्षा बंधन तथा उसके अगले दिन (शनिवार और रविवार) पड़ने से अभ्यर्थियों में नाराजगी रही। उनका कहना था कि रक्षाबंधन के दिन वे घर से बाहर रहे। उनका यह भी कहना था कि यदि रविवार को परीक्षा न होती तब भी वे शनिवार को देर रात तक घर पहुंचकर राखी बंधवा लेते। महिला अभ्यर्थियों में इसे लेकर काफी नाराजगी रही।
नेपाल भूकंप पर लिखना था निबंध प्रारंभिक परीक्षा पर भी था इसकी साया

72000 प्रशिक्षु शिक्षकों का नहीं बदलेगा स्कूल। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

रुक सकता है समायोजित शिक्षामित्रों का वेतन। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

क्या सरकार सभी टेट पास का समायोजन करेंगी या सिर्फ ७२८२५ पर ही भर्ती करके बेरोजगारो के अरबो डकार जायेंगी ??? ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

यू.पी में सरकार के द्वारा २ बार सहायक अध्यापककी भर्ती के लिए विज्ञापन निकालेदोनो बार टेट पास प्रशिक्षुओ ने हजारो रूपये कर्ज पर लेकरआवेदन किये ! सरकार ने दोनो विज्ञापन के लिए अलग-अलगफीस ली मगर लगभग ३ वर्षो से एकविज्ञापन पर भी भर्ती पूरीनही कर पायी अब जब सुप्रीमकोर्ट ने दखल दिया तो पुराने विज्ञापन परभर्ती शुरू हुई ओर २ बार मेरिट द्वारा नियुक्ति पत्रभी बाटे गये !
मगर सरकार ने नये विज्ञापन सेआवेदन करने वाले प्रशिक्षओकी पूरी तरहअनदेखी की ! जबकि नये विज्ञापन मेहर जिले में ५०० रूपये आवेदन फीसरखी गयी ! इस प्रकार एकअभ्यार्थी ने ३५ से ४० हजार तक खर्च करकेआवेदन किये कुछ गरीब अभ्यार्थीयो नेतो कर्ज तक लेकर आवेदन किये ! मगर सरकार नेउनकी पूरी तरहअनदेखी की ! नये विज्ञापन से सरकार ने लगभग ५-६ अरब रूपये बेरोजगारो से वसूले, मगर आज तकउनका भविष्य अंधकार मे है दूसरी तरफ सरकारका शिक्षामित्रो के प्रति मोह ने इन प्रशिक्षुओ को निराशा के गर्तमें धकेल देिया है! एक तरफ जहाँ सरकार शिक्षामित्रो को अपनेपैसे से दूरस्थबी.टी.सी कराकर बिना टेटसमायोजन पर तुली हैवही दूसरी तरफ लाखो रूपये खर्चकरके बी.एड एवंबी.टी.सी. ओर टेट पासअभ्यार्थी सडको पर धक्के खाने वभीख माँगने पर मजबूर है ! आखिर सरकारक्या चाहती है ?
क्यो टेट पासअभ्यार्थीयो से २ बार आवेदन व २ बार हजारो रूपये शुल्क के रूप मे लेकर भी टेट पास के साथ दुरव्यवहार कर रही है !जबकी यू.पी. मे लगभग ३ वर्षो पहले३ लाख पद खाली थे जो अब तक ३.५ से ४ लाखहो गये है ! यदि सरकार चाहे तो सरकार सभी टेटपास को समायोजित कर सकती है ! मगर समायोजनतो दूर की बात है सरकार उन दोनो विज्ञापन केमिलाकर लगभग १४५००० पदो परभी भर्ती को तैयारनही जिन दोनो विज्ञापन के सरकार के पासअरबो आवेदन फीस व आवेदन फार्म हैउनकी तरफ सरकार देखने तक तैयारनही ओर दूसरी तरफ लगभग १.७२लाख अप्रशिक्षित शिक्षामित्रो को साहयक अध्यापको परसमायोजित कराने पर तुली है यहकैसी विडंमना हैकि न्यायपालिका भी विवश नजर आरही है ! यदि सरकार दोनो एड पर जल्दभर्ती शुरू कर दे तो लगभग ३ वर्षो का विवाद तुरंतसमाप्त हो जायेगा ओर दोनो विज्ञापन केअभ्यार्थीयो के हित भी सुरक्षितहोगे ! सबसे बडा सवाल क्या सरकार सभी टेट पासका समायोजन करेंगी या दोनो एड पर भर्ती करेंगी ! या सिर्फ ७२८२५ पर ही भर्ती करके बेरोजगारो के अरबो डकार जायेंगी ! यह तो बस पुराने ओर नयेविज्ञापन के अभ्यार्थीयो का हौशला बतायेंगा कि वो क्या करा पातेहै !

फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाले 375 अभ्यर्थियों का चयन रद्द। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

एलटी शिक्षक भर्ती : 220 पुरुष व 155 महिलाओं पर दर्ज होगी एफआईआर
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रशिक्षित शिक्षक (एलटी) भर्ती में फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाले 375 अभ्यर्थियों का चयन रद्द कर दिया है। इसमें 220 पुरुष व 155 महिला अभ्यर्थी हैं। यह स्थिति तब है जब 2909 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया है। शासन से लेकर निदेशालय तक अब इसको लेकर सतर्क है। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है।
फर्जी प्रमाण पत्र लगाने का खुलासा माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मंडलवार प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर हुआ है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राजकीय इंटर कॉलेजों में 6,615 शिक्षकों की भर्ती खोली थी। मंडल स्तर पर भर्ती का अधिकार मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को दिया गया। कुल पदों में 2633 पुरुष व 3882 महिला शिक्षकों के पद हैं। मंडलीय स्तर पर होने वाली भर्ती मेरिट के आधार पर शुरू की गई। मेरिट के आधार पर होने वाली भर्ती में स्थान पाने के लिए अभ्यर्थियों ने खूब फर्जीवाड़ा किया। अधिकतर मंडलों में फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी हथियाई गई। इसका खुलासा उस समय हुआ जब लखनऊ विश्वविद्यालय को प्रमाण पत्रों की जांच में भारी गड़बड़ी मिली।
लखनऊ मंडल में जांच के दौरान 113 पुरुष व 83 महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। वाराणसी में 92 पुरुष व 61 महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। बरेली में पांच पुरुष व चार महिला, कानपुर में दो पुरुष व एक महिला तथा मिर्जापुर में आठ पुरुष व छह महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। यह स्थिति तब है जब प्रदेश में मात्र 2909 अभ्यर्थियों को शिक्षक का नियुक्ति पत्र बांटा गया। पात्रों में 742 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण किया है, इसमें 301 पुरुष व 441 महिला शिक्षिकाएं हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजे निर्देश में कहा है कि संदेह के आधार पर भर्ती होने वालों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाए। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वर्मा ने यह भी निर्देश दिया है कि इसकी सूचना उन्हें देने के साथ अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भी दी जाए।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की मंडलवार रिपोर्ट में खुलासा

अगले महीने दस हजार शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन होगा जारी। ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

जल्द होंगीं प्रधानाचार्यो की नियुक्तियां’
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष ने दी जानकारी
जागरण संवाददाता, एटा: चयन बोर्ड में चल रही गड़बड़ियों को दुरुस्त किया जा रहा है। अब बोर्ड में हर काम शुचिता से होगा। अगले महीने 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन जारी होगा। इसके साथ ही 20 सितंबर से प्रधानाचार्यो, टीजीटी-पीजीटी पदों की भर्तियां निकाली जाएंगी।
रविवार को सम्मान समारोह कार्यक्रम में पहुंचे उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनिल कुमार वर्मा ने ये जानकारी दी।
राजकीय इंटर कॉलेज में राजकीय शिक्षक संघ आगरा व अलीगढ़ मंडल के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि चयन बोर्ड की दशा को सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार को सभी के सहयोग की जरूरत है। शिक्षक एक गंगोत्री के समान होता है। जहां से आइएएस, पीसीएस, नेता और वैज्ञानिक निकलते हैं। शिक्षक से ही राष्ट्र का निर्माण होता है।इस मौके पर पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी, संयोजक और प्रभारी प्रधानाचार्य महावीर सिंह यादव, सह संयोजक चंद्रपाल सिंह यादव, रविकांत यादव ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण और प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।इस मौके पर पीसीएस 2014 में एसडीएम पद पर चयनित हुए गांव कोयला बादशाहपुर निवासी अरविंद यादव, मैनपुरी के प्रशांत यादव और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई में वैज्ञानिक पद पर चयनित राहुल प्रताप भदौरिया को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर अरविंद यादव ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के टिप्स दिए। इस दौरान शिक्षक नेता गुमान सिंह यादव, पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी ने भी विचार व्यक्त किए।

सभी कर्मचारियों को 6 प्रतिशत बढोत्तरी का लाभ 1 जुलाई 2015 से । ⏳पूरी ख़बर पढ़े : शिक्षा विभाग की हलचल डॉट कॉम:(सौरभ त्रिवेदी)

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के कर्मचारियों का 1 जुलाई 2015 से बकाया महंगाई भत्ता पर सरकार के आदेश का इंतजार है। केंद्र सरकार कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि वर्ष में दो बार यानि 1 जनवरी तथा 1 जुलाई से करती है। सरकार द्वारा आखिरी बढोत्तरी 1 जनवरी से की गई थी जिसकी घोषणा अप्रैल में हुई थी। उस समय महंगाई भत्ता 107 प्रतिशत से बढाकर 113 प्रतिशत किया गया था।
अब 1 जुलाई से महंगाई भत्ता में बढोत्तरी देय है जो 6 प्रतिशत लगभग तय है। परंतु इसकी घोषणा कब सरकार द्वारा की जाएगी इसका इंतजार सभी केंद्रीय कर्मचारियों को है। सामान्य तौर पर जुलाई से बढाये जाने वाले महंगाई भत्ता की घोषणा सरकार सितंबर माह दौरान करती है। इसी को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि सितंबर के दूसरे अथवा तीसरे सप्ताह में होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा और घोषणा की जाएगी। 6 प्रतिशत की बढोत्तरी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मूल वेतन पर महंगाई भत्ता कुल 119 प्रतिशत हो जाएगा। इसके बाद दिसंबर 2015 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की घोषणा जनवरी 2016 की आखिरी तारीख को होगी। जिसके आधार पर 1 जनवरी 2016 से मिलने वाले महंगाई भत्ता पर कितने प्रतिशत की बढोत्तरी होगी यह साफ होगा। इस पर जब कैबिनेट संभवत: मार्च अथवा अप्रैल 2016 में लेगी यदि तब तक सातवें वेतन आयोग की सिफारिश पर फैसला नहीं लिया गया हो। छठवें वेतन आयोग अंतर्गत 1 जनवरी 2016 से महंगाई भत्ते पर घोषित होने वाली यह संभावित आखिरी किश्त होगी। गौरतलब है कि हाल ही में सातवें वेतन आयोग द्वारा रिपोर्ट सौंपने के लिए आयोग ने सरकार से 4 महीने की मोहलत मांगी थी तथा रिपोर्ट 31 दिसंबर 2015 तक सौंपने की अनुमति मांगी थी। जिस पर सरकार ने मोहर लगाते हुए उनकी यह गुजारिश मंजूर की थी। संभवत: सातवां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2015 के आसपास सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। जिसके बाद इस पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय तथा कैबिनेट द्वारा सभी पहलूओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा और फैसला लिया जाएगा। इसके लिए सरकार को कम से कम 3 से 4 महीने का समय लगने की संभावना है। जिसके बाद ही आयोग की सिफारिशों पर अमल किया जाएगा। इसका मतलब है कि सातवें वेतन आयोग के वेतनमान अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को अप्रैल 2016 के बाद ही मिल सकते है। जिसमें 1 जनवरी 2016 से मिलने वाला बकाया भी शामिल होगा।

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