Saturday, 30 April 2016

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बोर्ड परीक्षाओं की कापियों के मूल्यांकन की समाप्ति के उपरांत माध्यमिक विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना/दुग्ध वितरण कार्यक्रम के संचालन के सम्बन्ध में।

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फतेहपुर : प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक अध्यापको की पदोन्नति हेतु काउंसलिंग दिनांक 03.05.2016 एवम् 04.05.2016 को सम्पन्न कराये जाने के सम्बन्ध में समस्त खण्ड शिक्षाधिअकारियों को निर्देश जारी

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कक्षा 8 तक के स्कूलों में 6 मई के बाद से गर्मी की छुट्टी ,लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

कक्षा 8 तक के स्कूलों में 6 मई के बाद से गर्मी की छुट्टी
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लखनऊ। कार्यालय संवाददाता
Updated: 30-04-16 03:21 PM

भीषण गर्मी और तेज धूप को देखते हुए जिला प्रशासन ने छह मई के बाद से कक्षा आठ तक के स्कूल गर्मी की छुट्टियों तक बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सोमवार से छह मई तक नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाएं सुबह 7 से 11 बजे तक ही चलेंगी।
शनिवार को जिलाधिकारी की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक सोमवार से नौवीं से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह सात से दोपहर 12 बजे तक ही चलेंगी। साथ ही 20 मई के बाद इनमें भी ग्रीष्मकालीन अवकाश हो जाएगा। जिलाधिकारी राजशेखर ने ये निर्देश जारी करते हुए स्कूलों को यह हिदायत भी दी कि निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए।
परीक्षाओं के लिए 27 तक खुलेंगे स्कूल
जिन स्कूलों में 20 मई के बाद नौवीं से 12वीं तक की परीक्षाएं या होम एग्जाम होने हैं, उन्हें स्कूल खोलने की अनुमति दी गई है। मगर इस स्थिति में भी स्कूलों को 27 मई तक परीक्षाएं खत्म करके स्कूल बंद करने होंगे।
बच्चों की सेहत का रखें ध्यान
जिला प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रचंड गर्मी को देखते हुए स्कूलों में बच्चों की सेहत व सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। जब तक स्कूल खुल रहे हैं, वहां पीने का पानी, पंखे और छाया वाली जगह पर प्रार्थना आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

यूपी टीईटी : 38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’ ओएमआर शीट न भरने की वजह से परीक्षा से बाहर

38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’

ओएमआर शीट न भरने की वजह से परीक्षा से बाहर

राब्यू, इलाहाबाद : शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2015 में इस बार 38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’ हो गए हैं। यानी उन्होंने अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली। युवा अपनी ओएमआर शीट सलीके से नहीं भर सके। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुए बिना ही वह रेस से बाहर से हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए परीक्षा देने वाले ऐसे युवाओं की तादाद प्राथमिक की अपेक्षा चार गुना अधिक रही है।

टीईटी 2015 में प्राथमिक विद्यालयों के लिए दो लाख 58 हजार 372 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, उनमें से दो लाख 37 हजार 620 परीक्षा में बैठे। इनमें महज 17 फीसद युवा उत्तीर्ण हुए। एनआइसी लखनऊ ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी को परिणाम जारी करने के बाद जो रिपोर्ट सौंपी है वह दिलचस्प है। इसमें 4242 ऐसे युवा हैं जिन्होंने अपनी ओएमआर शीट में उत्तर पुस्तिका का सीरियल नंबर यानी क्रमांक नहीं भरा। वहीं 3628 युवा ऐसे थे जिन्होंने ओएमआर शीट में भाषा का कॉलम काला नहीं किया। इस बार टीईटी में भले ही अलग से भाषा का प्रश्नपत्र नहीं था, लेकिन जिस भाषा के सवालों का जवाब देना था उस गोले को काला किया जाने का निर्देश था। ऐसे ही उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए छह लाख 71 हजार 796 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, उनमें से छह लाख 22 हजार 437 परीक्षा में बैठे। इनमें से 5801 युवा ऐसे थे जिन्होंने ओएमआर शीट में सीरियल नंबर नहीं डाला। 7941 ऐसे युवा थे जिन्होंने भाषा का उल्लेख नहीं किया। 16 हजार 811 अभ्यर्थी ऐसे थे, जिन्होंने उत्तर पुस्तिका के ए, बी, सी और डी सीरीज में से किसी एक का अंकन ओएमआर शीट में नहीं किया। इन कमियों के कारण उनकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन ही नहीं किया गया। युवा इसके लिए कक्ष निरीक्षकों को दोषी मानते हैं।

अंग्रेजी का उत्तीर्ण प्रतिशत बेहतर : प्राथमिक विद्यालयों के लिए अंग्रेजी भाषा को लेकर परीक्षा देने वाले युवाओं की सफलता का ग्राफ सबसे अधिक रहा। अंग्रेजी भाषा की परीक्षा 72 हजार 283 युवाओं ने दी थी उनमें से 28 हजार 393 यानी 39.28 फीसद सफल रहे। ऐसे ही संस्कृत भाषा की परीक्षा देने वालों की तादाद काफी अधिक एक लाख 54 हजार 18 रही, लेकिन सफल 29 हजार 983 यानी 19.47 फीसद हो सकें। वहीं, उर्दू के लिए 11 हजार 319 ने परीक्षा दी और केवल 686 यानी 6.06 फीसद सफल हो पाए। उच्च प्राथमिक विद्यालय की भाषा परीक्षा में संस्कृत सबसे आगे रही। दो लाख 27 हजार 794 युवाओं ने परीक्षा दी और 42 हजार 286 यानी 18.56 फीसद सफल रहे। ऐसे ही अंग्रेजी में तीन लाख 84 हजार 782 ने परीक्षा दी और 44 हजार 133 यानी 11.47 फीसद सफल हुए। उर्दू की परीक्षा में 9861 शामिल हुए, उनमें 934 यानी 9.47 फीसद सफल हो पाए हैं।

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7वां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों को जून-जुलाई तक मिल सकती है बढ़ी हुई सैलरी

7वां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों को जून-जुलाई तक मिल सकती है बढ़ी हुई सैलरी
नई दिल्‍ली : एक जनवरी 2016 से लागू होने वाले सातवें वेतन आयोग का लाभ केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने का इंतजार जल्‍द खत्‍म हो सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सातवें वेतन आयोग के तहत अगले दो महीनों
में केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिल सकता है। एक न्‍यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी जून या जुलाई महीने तक मिल सकती है।

इस रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सचिवों की अधिकार प्राप्त समूह सैलरी और पेंशन देने को लेकर वेतन आयोग की सिफारिशों पर जल्‍द सहमति प्रदान कर सकती है।

बता दें कि सरकार ने इसके लिए जनवरी में ही हाई पावर्ड पैनल बना दिया था, जिसे कैबिनेट सेक्रेट्री पीके सिन्‍हा हेड कर रहे हैं। इस पैनल को 7वें वेतन आयोग के सुझावों को लागू करवाना है। अगर 7वां वेतन आयोग लागू होता है तो इससे 47 लाख कर्मचारियों और 52 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। नए पे स्‍केल लागू होने के बाद एक अनुमान के तौर पर सरकार के ऊपर 1.02 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा।
7वें वेतन आयोग को 2016-17 में लागू किया जाना है। 7वें वेतन आयोग को लागू करने से खजाने पर पड़ने वाले बोझ संबंधी रिपोर्ट तैयार हो रही है।

गौर हो कि केंद्र सरकार से सातवें वेतन आयोग ने सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कर्मचारियों के वेतन और भत्ते 23.55 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की थी और सैनिकों की तर्ज पर असैन्य कर्मचारियों के लिए भी ‘वन रैंक - वन पेंशन’ की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपी गई वेतन आयोग की रिपोर्ट में मौजूदा कमर्चारियों के मूल वेतन में 16%, भत्तों में 63% और पेंशन में 24% इजाफे की सिफारिश की गई थी। न्यायमूर्ति एके माथुर की अगुवाई वाले इस सातवें वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18 हजार और अधिकतम 2.25 लाख रुपये तय करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में सालाना तीन फीसदी वृद्धि की भी सिफारिश की है। छठा वेतन आयोग 1 जनवरी, 2006 से लागू हुआ था और माना जा रहा है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू हो जाएंगी। यानी कर्मचारियों को एरियर एक जनवरी 2016 से मिलेगा। आमतौर पर राज्यों द्वारा भी कुछ संशोधनों के साथ इन्हें अपनाया जाता है। एक महत्वपूर्ण सिफारिश में आयोग ने ग्रैच्युटी निर्धारण में अधिकतम वेतन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है और जब कभी महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा, तो वेतन की अधिकतम सीमा में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

Friday, 29 April 2016

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यूपी में बढ़ेंगी बीटीसी की 20 हजार सीटें: 407 नए निजी बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की तैयारी,सीटें जुड़ने के बाद 2015-16 सत्र के लिए बीटीसी की कुल 82,150 सीटें हो जाएंगी,मई के पहले सप्ताह से प्रवेश का प्रस्ताव

यूपी में बढ़ेंगी बीटीसी की 20 हजार सीटें: 407 नए निजी बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की तैयारी

इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता

इलाहाबाद। बीटीसी 2015-16 सत्र में प्रवेश के लिए मई के पहले सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की
ओर से शासन को भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2015-16 का सत्र 22 सितम्बर से शुरू करने का आदेश दिया है। 2016-17 सत्र का प्रवेश एक अप्रैल 2016 से शुरू होना है।

मई के पहले सप्ताह से प्रवेश का प्रस्ताव

प्रदेश में 2015-16 सत्र से बीटीसी की लगभग 20 हजार सीटें बढ़ेंगी। नए सत्र के लिए 407 प्राइवेट बीटीसी कॉलेजों ने 50-50 सीटों पर प्रवेश के लिए संबद्धता देने का अनुरोध किया है। इनमें से 377 कॉलेजों को संबद्धता देने के लिए राज्य स्तरीय समिति ने संस्तुति कर दी है।शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें संबद्धता का पत्र जारी कर दिया जाएगा। बचे हुए 40 में से 32 कॉलेजों में कुछ कमी रह गई है जबकि आठ ने 2016-17 सत्र से बीटीसी शुरू करने के लिए संबद्धता मांगी है। मई तक इन 32 निजी कॉलेजों को भी मंजूरी मिल जाएगी।इस प्रकार 2015-16 सत्र के लिए 399 नए प्राइवेट कॉलेजों की 19,950 सीटें बढ़ जाएंगी। वर्तमान में 1034 प्राइवेट कॉलेजों में 51,700 और 63 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में 10,500 यानि कुल 62,200 सीटें हैं। नए 399 निजी कॉलेजों की 19950 सीटें जुड़ने के बाद 2015-16 सत्र के लिए बीटीसी की कुल 82,150 सीटें हो जाएंगी। इन कॉलेजों ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से बीटीसी कोर्स चलाने के लिए पहले ही मान्यता ले ली है।

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यूपी में बढ़ेंगी बीटीसी की 20 हजार सीटें: 407 नए निजी बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की तैयारी,सीटें जुड़ने के बाद 2015-16 सत्र के लिए बीटीसी की कुल 82,150 सीटें हो जाएंगी,मई के पहले सप्ताह से प्रवेश का प्रस्ताव

यूपी में बढ़ेंगी बीटीसी की 20 हजार सीटें: 407 नए निजी बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की तैयारी

इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता

इलाहाबाद। बीटीसी 2015-16 सत्र में प्रवेश के लिए मई के पहले सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की
ओर से शासन को भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2015-16 का सत्र 22 सितम्बर से शुरू करने का आदेश दिया है। 2016-17 सत्र का प्रवेश एक अप्रैल 2016 से शुरू होना है।

मई के पहले सप्ताह से प्रवेश का प्रस्ताव

प्रदेश में 2015-16 सत्र से बीटीसी की लगभग 20 हजार सीटें बढ़ेंगी। नए सत्र के लिए 407 प्राइवेट बीटीसी कॉलेजों ने 50-50 सीटों पर प्रवेश के लिए संबद्धता देने का अनुरोध किया है। इनमें से 377 कॉलेजों को संबद्धता देने के लिए राज्य स्तरीय समिति ने संस्तुति कर दी है।शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें संबद्धता का पत्र जारी कर दिया जाएगा। बचे हुए 40 में से 32 कॉलेजों में कुछ कमी रह गई है जबकि आठ ने 2016-17 सत्र से बीटीसी शुरू करने के लिए संबद्धता मांगी है। मई तक इन 32 निजी कॉलेजों को भी मंजूरी मिल जाएगी।इस प्रकार 2015-16 सत्र के लिए 399 नए प्राइवेट कॉलेजों की 19,950 सीटें बढ़ जाएंगी। वर्तमान में 1034 प्राइवेट कॉलेजों में 51,700 और 63 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में 10,500 यानि कुल 62,200 सीटें हैं। नए 399 निजी कॉलेजों की 19950 सीटें जुड़ने के बाद 2015-16 सत्र के लिए बीटीसी की कुल 82,150 सीटें हो जाएंगी। इन कॉलेजों ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से बीटीसी कोर्स चलाने के लिए पहले ही मान्यता ले ली है।

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टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट: पंजीकरण, अनुक्रमांक, जन्मतिथि व वर्ष भरकर पा सकेंगे प्रमाणपत्र

टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट: पंजीकरण, अनुक्रमांक, जन्मतिथि व वर्ष भरकर पा सकेंगे प्रमाणपत्र
टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट

पंजीकरण, अनुक्रमांक, जन्मतिथि व वर्ष भरकर पा सकेंगे प्रमाणपत्र

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद

शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2015 उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट दिया जाएगा। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। एनआइसी की वेबसाइट से अभ्यर्थी इसका प्रिंट ले सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थियों को पंजीकरण नंबर, अनुक्रमांक, जन्मतिथि, परीक्षा वर्ष भरना होगा, तभी प्रमाणपत्र हासिल कर सकेंगे। प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने वाले महकमे परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने इस बार टीईटी का प्रमाणपत्र निर्गत करने के नियमों में संशोधन किया है। पहले 90 फीसद अंक पाने वाले सामान्य वर्ग एवं 55 फीसद से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग एवं 82 और इससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को पात्रता प्रमाणपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के जरिए दिया जाता था। हाईटेक होती व्यवस्था में परीक्षा नियामक ने इस सर्टिफिकेट को पारदर्शी बनाया है।

इस बार से अभ्यर्थियों को ई-प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। अभ्यर्थियों के अंक का विवरण एनआइसी लखनऊ की वेबसाइट पर जारी होगा। बदले नियमों के तहत ऑनलाइन आवेदन में अभ्यर्थी का नाम, माता-पिता का नाम या फिर वर्तनी में त्रुटि है तो ई-प्रमाणपत्र प्राप्त होने के एक माह के अंदर अपने आवेदन पत्र की हार्डकॉपी, संबंधित अभिलेख तथा सचिव के नाम 300 रुपये के डिमांड देना होगा। जांच के बाद दावा सत्य होने पर संशोधित ई-प्रमाणपत्र वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

15 मई के बाद मिलेगा प्रमाणपत्र

एनआइसी की वेबसाइट पर ई-प्रमाणपत्र का प्रकाशन परीक्षाफल घोषित होने के चार सप्ताह में किए जाने का दावा किया है। हालांकि इस बार यह समयावधि बुधवार को ही पूरी हो गई है। अभी एनआइसी की ओर से बनाई जाने वाली वेबसाइट की पड़ताल होगी और सारा रिकॉर्ड अपलोड किया जाएगा। ऐसे में कम से कम एक पखवारे का वक्त लगेगा। रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि अभ्यर्थी 15 मई के बाद ई-प्रमाणपत्र हासिल कर सकेंगे।

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रसोइयों का मानदेय होगा दोगुना,राज्य सरकार ने मानदेय एक हजार रुपये से बढ़ा कर 2 हजार रुपए करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा

रसोइयों का मानदेय होगा दोगुना
राज्य मुख्यालय शिखा श्रीवास्तव

मिड डे मील से जुड़े लगभग 4 लाख रसोइयों का मानदेय दोगुना होगा। राज्य सरकार ने मानदेय एक हजार रुपये से बढ़ा कर 2 हजार रुपए करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा है।
केंद्र ने अगर धनराशि दे दी तो इसी वित्तीय वर्ष में रसोइयों को लाभ मिलना तय है।एमडीएम में 3,98,073 रसोइये काम कर रहे हैं। रसोइये लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं लेकिन इस बार राज्य सरकार ने इसके लिए केन्द्र से 1041.68 करोड़ रुपये मांगे हैं। हालांकि यूपी में रसोइयों के 4,34,032 पद स्वीकृत हैं लेकिन अभी तक लगभग 4 लाख ही कुक रखे गए हैं। यूपी में रसोइयों को मानदेय देने में तत्परता नहीं बरती जाती है। पिछले वर्ष की रिपोर्ट देखे तो जितना बजट इसके लिए मिलता है उसका 58 फीसदी ही इस्तेमाल किया गया। गौतमबुद्ध नगर ऐसा जिला रहा जहां रसोइयों को मानदेय दिया ही नहीं गया। वहीं 18 जिले ऐसे हैं जहां 50 फीसदी से भी कम रसोइयों को मानदेय मिला। मिड डे मील में गांवों में स्थित स्कूलों में रसोइये रखे गए हैं। नियमानुसार रसोइयां वही बन सकता है जिसका बच्च उस स्कूल में पढ़ रहा हो।

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प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में जाने की राह खुली,कोर्ट ने आदेश दिया है कि सहायक अध्यापक यदि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29334 गणित-विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती में भी चयनित हुए हैं तो उन्हें तीन माह में नियुक्ति दी जाए

प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में जाने की राह खुली

विधि संवाददाता, इलाहाबाद : परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की 72825 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को उच्च प्राथमिक में नियुक्ति की जा सकेगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सहायक अध्यापक यदि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29334 गणित-विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती में भी चयनित हुए हैं तो उन्हें तीन माह में नियुक्ति दी जाए।
ऐसे कई अभ्यर्थियों ने चयनित होने के बाद नियुक्ति देने से इनकार करने के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि राजेंद्र कुमार प्रजापति सहित 20 लोगों ने याचिका दाखिल कर कहा था कि वे 72825 सहायक अध्यापकों की भर्ती के तहत चयनित हुए और कार्यभार ग्रहण कर लिया। बाद में उनका चयन 29334 सहायक अध्यापकों में भी हो गया। चूंकि गणित-विज्ञान अध्यापकों की नियुक्ति 15वें संशोधन के तहत हुई है और 15वां संशोधन हाईकोर्ट द्वारा रद किया जा चुका है तथा मामला अभी न्यायालय में लंबित है इसलिए याचियों ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया। बाद में जब उन्होंने कार्यभार ग्रहण कराने के लिए कहा तो विभाग ने मना कर दिया। कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया है कि याचीगण को तीन माह में कार्यभार ग्रहण कराया जाए। इसके बाद वह सहायक अध्यापक पद के लिए पुन: दावा प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे।

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इस बार 33 केंद्रों पर होगी बीएड काउंसिलिंग: अभ्यर्थियों की सहूलियत को बढ़ाए काउंसिलिंग केंद्र दो जून से शुरू होगी बीएड प्रवेश की काउंसिलिंग

इस बार 33 केंद्रों पर होगी बीएड काउंसिलिंग: अभ्यर्थियों की सहूलियत को बढ़ाए काउंसिलिंग केंद्र

दो जून से शुरू होगी बीएड प्रवेश की काउंसिलिंग

बढ़े केंद्र

जागरण संवाददाता, लखनऊ : बीएड में दाखिले के लिए आयोजित हुई संयुक्त प्रवेश परीक्षा की काउंसिलिंग में इस बार अभ्यर्थियों को काफी सहूलियत होगी। इस बार नौ केंद्र बढ़ाए गए हैं। पिछली बार 24 केंद्रों पर हुई थी काउंसिलिंग, जबकि इस बार 33 केंद्र बनाए गए हैं। बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम 25 मई से पहले ही घोषित करने की तैयारी की जा रही है। काउंसिलिंग दो जून से शुरू होगी।

बीएड के राज्य प्रवेश समन्वयक प्रो. वाईके शर्मा ने बताया कि इस बार बीएड में दाखिले के लिए होने वाली काउंसिलिंग में केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। गाजियाबाद, आजमगढ़ में काउंसिलिंग सेंटर पहली बार बनाए जा रहे हैं। वहीं लखनऊ, मेरठ, आगरा, अलीगढ़ व कानपुर में एक-एक काउंसिलिंग सेंटर बढ़ाया गया है। काउंसिलिंग शुल्क में किसी भी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। काउंसिलिंग शुल्क अभ्यर्थियों को 500 रुपये जमा करना होगा। अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग शुल्क का बैंक ड्राफ्ट लविवि के वित्त अधिकारी के नाम पर बनवाना होगा।

काउंसिलिंग में सिर्फ डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए काउंसिलिंग केंद्र में आना होगा, अन्य सभी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। प्रो. वाईके शर्मा ने बताया कि आवेदन फॉर्म में हुई गलती को काउंसिलिंग सेंटर पर ही सही करवाना होगा। मार्कशीट की फोटोकॉपी जमा करने वालों का दोबारा सत्यापन होगा। काउंसिलिंग 17 जून तक चलेगी।

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शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण वैध : हाई कोर्ट

शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण वैध : हाई कोर्ट

विधि संवाददाता, इलाहाबाद : प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण दिए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध ठहराया है। कोर्ट ने फिलहाल इसके खिलाफ याचिका खारिज कर दी है और कहा है कि चूंकि मामला खंडपीठ से तय हो चुका है इसलिए हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है। छह माह के लंबे अंतराल बाद प्रदेश भर के शिक्षामित्रों ने राहत की सांस ली है।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षा मित्रों को दूरस्थ पद्धति से दो साल का प्रशिक्षण दिया गया था। इसके खिलाफ बीटीसी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से दूरस्थ विधि से दिया गया प्रशिक्षण नियमों के अनुसार नहीं है। इस मामले की न्यायमूर्ति बी. अमित स्थालेकर ने सुनवाई की। शिक्षा मित्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।

तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में यह मामला पहले आ चुका है जिसमें बीटीसी अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने तर्को से सहमति जताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि 12 सितंबर को शिक्षामित्रों का समायोजन रद करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दूरस्थ शिक्षा से प्रशिक्षण देने के मामले की वैधता एनसीटीई पर छोड़ दी थी। उस समय हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशिक्षण के मामले में एनसीटीई (नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजूकेशन) का निर्णय ही मान्य होगा। बाद में खंडपीठ का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व बरेली के एक अभ्यर्थी की ओर से मांगी गई जनसूचना का जवाब देते हुए एनसीटीई ने बीटीसी के दूरस्थ प्रशिक्षण को वैध माना था। उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि हाईकोर्ट के इस फैसले से शिक्षा मित्रों का मनोबल बढ़ा है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ और आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने भी कोर्ट से फैसले का स्वागत किया और सुभाष चौराहे पर मिठाइयां बांटी।

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