Tuesday, 31 May 2016

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सूखाग्रस्त जनपदों में मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन के सप्ताहवार अनुश्रवण के सम्बन्ध में आदेश जारी एवम् अनुश्रवण पत्र का प्रारूप भी देखें

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बाँदा : ग्रीष्मावकाश में मध्यान्ह भोजन योजना संचालित किये जाने हेतु शासनादेश के विपरीत शिक्षकों को लगाये जाने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी बाँदा ने बीएसए बाँदा को शासनादेश के अनुसार तत्काल कार्यवाही किये जाने हेतु दिए निर्देश

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फतेहपुर : खाना बनाने के आदेश का पालन न करने पर अब शिक्षकों का कार्यवाही का ताना-बाना तैयार, सोमवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें शिक्षकों को निर्देश हैं कि वह स्कूल जाए और बच्चों के अभिभावक से संपर्क कर उन्हें स्कूल तक लाकर खाना खिलाएं।

फतेहपुर, जागरण संवाददाता : गर्मी की छुट्टियों में परिषदीय स्कूलों में
खाना बनाने के आदेश का पालन न करने पर अब शिक्षकों का कार्यवाही का ताना-बाना तैयार कर लिया गया है। अब उन शिक्षकों पर कार्यवाही का शिकंजा कसा जाएगा। जो गर्मी की छुट्टी मे
एमडीएम के तहत छात्र संख्या शून्य भेज रहे हैं। शिक्षकों को स्कूल जाना होगा और बच्चों को एमडीएम खिलाना होगा। सोमवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक नया आदेश जारी
किया है, जिसमें शिक्षकों को निर्देश हैं कि वह स्कूल जाए और बच्चों के अभिभावक से संपर्क कर उन्हें स्कूल तक लाकर खाना खिलाएं। इसका निरीक्षण प्रतिदिन किया जाएगा।
बीएसए विनय कुमार ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वह स्कूलों का प्रतिदिन निरीक्षण करे आख्या सौपेंगे। जिन स्कूलों से छात्र संख्या शून्य है वहां के शिक्षकों पर कार्यवाही की जायेगी ।

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अब सीटों को लेकर बिफरे शिक्षामित्र 16448 सीटों पर समायोजन कराने की जुगत में थे शिक्षामित्र शासन के फरमान को न्यायालय में ही चुनौती देने की तैयारी

अब सीटों को लेकर बिफरे शिक्षामित्र

16448 सीटों पर समायोजन कराने की जुगत में थे शिक्षामित्र

शासन के फरमान को न्यायालय में ही चुनौती देने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : सीटों के आवंटन के साथ ही शिक्षामित्रों के समायोजन का मुद्दा फिर सतह पर आ गया है। शिक्षामित्र विभागीय अफसरों से गुहार लगा रहे हैं कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फरमान न आ जाए, तब तक 16448 सीटों पर नियुक्तियां न की जाएं। असल में इन नवसृजित पदों पर समायोजन की शिक्षामित्र उम्मीद संजोए थे, जो फिलहाल टूटती नजर आ रही है।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए इन दिनों तेजी से प्रयास जारी हैं। परिषदीय स्कूलों में 19948 नए पद सृजित हुए, उनमें से 3500 पद उर्दू शिक्षकों को दे दिए गए हैं। शेष पदों को लेकर कशमकश जारी थी। 15 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लगातार यह पद देने की मांग कर रहे थे। उनका दावा था कि कई अलग-अलग वर्गो के अभ्यर्थियों को आवेदन करने का मौका मिला इसलिए संख्या इतनी अधिक हो गई है कि पद बढ़ाना जरूरी है। पिछले माह बेसिक शिक्षा परिषद सचिव ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भी भेजा था। अंत में शासन ने न्यायालय का निर्देश लेकर 15 हजार शिक्षक भर्ती के पद बढ़ाने पर सहमति दे दी है।

इसके बाद से शिक्षामित्र परेशान हैं। उनका कहना है कि अभी 26 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन होना शेष है जब सारे पद भर जाएंगे तो वह कहां समायोजित होंगे। इसलिए इन पदों पर फिलहाल नियुक्ति न की जाए बल्कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही शिक्षामित्रों की सुनवाई खत्म होने का इंतजार किया जाए। विभागीय अफसरों से अनुरोध के साथ ही कोर्ट में भी इस आशय की याचिका दायर करने की तैयारी है। उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा है कि शासन को शिक्षामित्रों का ध्यान रखना होगा। इसलिए इन पदों पर नियुक्तियों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इस मामले को लेकर शासन एवं परिषद में जल्द ही ज्ञापन भी दिया जाएगा।

बीएड में बढ़ सकती हैं सात हजार सीटें

बीएड में बढ़ सकती हैं सात हजार सीटें

जासं, लखनऊ : सूबे में बीएड के दो वर्षीय कोर्सेज में करीब सात हजार सीटें इस बार बढ़ सकती है। इस बार 70 से 80 नए कॉलेज जुड़ेंगे। सोमवार को कॉलेज संबद्धता का अंतिम दिन था, ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों से कॉलेज व सीटों का अंतिम ब्यौरा पहुंचाया जा रहा है। फिलहाल इस सत्र में करीब सात हजार सीटें बढ़ेंगी।

बीएड की प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस बार लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) ने करवाया है। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के राज्य कोआर्डिनेटर प्रो. वाईके शर्मा ने बताया कि इस बार लगभग सात हजार सीटें बढ़ने की उम्मीद है। अभी सभी विश्वविद्यालय अपना अंतिम डाटा भेज रहे हैं। दो वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिले का परिणाम घोषित किया जा चुका है। अब प्रवेश काउंसिलिंग छह जून से शुरू होगी। पिछले वर्ष बीएड में करीब 1.84 लाख सीटें थी। इस बार इसमें लगभग सात हजार नई सीटें जुड़ेंगी तो यह आंकड़ा दो लाख के पार हो जाएगा। बीएड में दाखिले के लिए इस बार करीब 3.02 लाख अभ्यर्थी अर्ह घोषित किए गए हैं। ऐसे में ज्यादातर अभ्यर्थी दाखिला पाने में सफल होंगे।

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ताकि हो सके खंड शिक्षा अधिकारियों की भर्ती सेवा नियमावली तैयार करने में जुटा शिक्षा विभाग

ताकि हो सके खंड शिक्षा अधिकारियों की भर्ती

सेवा नियमावली तैयार करने में जुटा शिक्षा विभाग

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : ब्लाक स्तर पर बेसिक शिक्षा की कमान संभालने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों की भर्ती का रास्ता जल्दी खुल सकेगा। राजपत्रित अधिकारियों का दर्जा पाये खंड शिक्षा अधिकारियों की सेवा नियमावली को शासन अंतिम रूप देने में जुटा है। नियमावली के तहत खंड शिक्षा अधिकारियों का चयन पीसीएस परीक्षा (उप्र प्रवर अधीनस्थ चयन सेवा) के जरिये कराने का इरादा है।

जुलाई 2011 में काडर रिव्यू के जरिये उप विद्यालय निरीक्षक (डीआइ) और प्रति उप विद्यालय निरीक्षक (एसडीआइ) के संवर्गो को मिलाकर खंड शिक्षा अधिकारी पदनाम का नया संवर्ग बनाया गया था। उसी समय खंड शिक्षा अधिकारियों का ग्रेड वेतन 2800 से बढ़ाकर 4800 रुपये कर दिया गया था। इस आधार पर कि जब वे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को नियंत्रित करते हैं, तो उनका वेतन उनसे कम नहीं होना चाहिए। उन्हें राजपत्रित अधिकारी का दर्जा भी दिया गया था।

राजपत्रित अधिकारी का दर्जा मिलने के बावजूद अब तक उनकी सेवा नियमावली नहीं बनी है। प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के 1031 पद हैं जिनमें से लगभग दो सौ पद अभी खाली हैं। सेवा नियमावली न पाने के कारण शिक्षा विभाग खंड शिक्षा अधिकारियों की भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को अधियाचन नहीं भेज पा रहा है।

पिछली बार वर्ष 2006 में लोक सेवा आयोग ने स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिये खंड शिक्षा अधिकारियों का चयन किया था। अब 4800 रुपये ग्रेड वेतन के साथ राजपत्रित अधिकारी होने पर उनका चयन पीसीएस परीक्षा के जरिये कराने का प्रस्ताव है। लिहाजा विभाग सेवा नियमावली को अंतिम रूप देने में जुटा है जिससे कि खाली पदों पर खंड शिक्षा अधिकारियों की भर्ती हो सके।

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फंस गया 80 हजार सीटों पर बीटीसी का प्रवेश,सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से बीटीसी प्रवेश-2015 के लिए शासन से अनुमति नहीं मिलने से बीटीसी की खाली सीटों पर प्रवेश नहीं हो पा रहा

फंस गया 80 हजार सीटों पर बीटीसी का प्रवेश

प्रदेश के सरकारी एवं निजी बीटीसी कॉलेजों में खाली बीटीसी प्रशिक्षण की 80 हजार सीटों का प्रवेश फंस गया है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से बीटीसी प्रवेश-2015 के लिए शासन से अनुमति नहीं मिलने से बीटीसी की खाली सीटों पर प्रवेश नहीं हो पा रहा है। परीक्षा नियामक की ओर से शासन के पास मई में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया था।
प्रदेश में इस समय कुल 63 जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) एवं 1415 निजी बीटीसी कॉलेज हैं। सरकारी डायट में कुल मिलाकर 10450 सीटें खाली हैं। इसके साथ 1034 निजी बीटीसी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पहले से चल रही है, जबकि 381 बीटीसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए शासन से अनुमति मिल चुकी है। इस प्रकार कुल मिलाकर 1415 निजी बीटीसी कॉलेजों में 50 सीट के हिसाब से कुल मिलाकर 70750 सीटें आती हैं।

इस प्रकार सरकारी एवं निजी कॉलेजों कुल मिलाकर 82200 सीटें खाली हैं। पहले से प्रवेश की समस्या को लेकर परेशान निजी बीटीसी कॉलेजों के प्रबंधन की इस कारण से परेशानी बढ़ गई है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से होने वाला बीटीसी प्रवेश फंस गया है। शासन की ओर से प्रवेश प्रक्रिया को हरी झंडी नहीं दिखाए जाने के कारण परीक्षा नियामक की ओर से प्रदेश के सरकारी एवं निजी बीटीसी कॉलेजों की 80 हजार सीटों पर प्रवेश नहीं हो पा रहा है।

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टीजीटी-पीजीटी, प्रधानाचार्य के लिए आवेदन छह जून से

टीजीटी-पीजीटी, प्रधानाचार्य  के लिए आवेदन छह जून से

प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों की भर्ती के लिए इंतजार कर रहे प्रतियोगी छात्रों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी)-प्रवक्ता भर्ती (पीजीटी) एवं प्रधानाचार्यों भर्ती-2016 के खाली पदों को भरने के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया छह जून से शुरू कर रहा है। आवेदन की अंतिम तिथि पांच जुलाई होगी। इसके लिए परीक्षा अक्तूबर-नवंबर में कराए जाने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष हीरालाल गुप्त के अनुसार टीजीटी के 7603, पीजीटी के 1353 एवं प्रधानाचार्य के 612 पदों कुल मिलाकर 9568 पदों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सामान्य एवं ओबीसी के अभ्यर्थियों के लिए शुल्क 625 रूपए,एससी के लिए 350 रुपये एवं एसटी के लिए 175 रुपये शुल्क तय किया गया है। चयन बोर्ड अध्यक्ष का कहना है कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरा करके स्कूलों में खाली पदों को भरा जाएगा। उन्होंने अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि ऑनलाइन आवेदन के समय पूरी जांच के बाद ही फार्म को सम्मिट करें। सम्मिट करने के बाद संशोधन संभव नहीं होगा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 2013 में टीजीटी-पीजीटी के पदों की घोषणा के बाद तीन वर्षों के अंतराल के बाद खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

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व्हाइटनर लगाया तो नहीं जंचेगी टीजीटी-पीजीटी की ओएमआर

व्हाइटनर लगाया तो नहीं जंचेगी टीजीटी-पीजीटी की ओएमआर

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से होने वाली टीजीटी-पीजीटी परीक्षा-2011 में ओएमआर पर व्हाइटनर लगाया तो मूल्यांकन नहीं होगा। 15,16 एवं 17 जून को होने वाली टीजीटी-पीजीटी परीक्षा से पहले चयन बोर्ड ने अभ्यर्थियों को चेताया है कि एक बार ओएमआर में उत्तर भर देने के बाद उसमें बदलाव संभव नहीं होगा।
बोर्ड की परीक्षाओं में अभ्यर्थी उत्तर भरते समय गलती कर बैठते हैं। इसके बाद अभ्यर्थी ओएमआर में काला किए हुए भाग को पहले रबर से मिटाने की कोशिश करते हैं जिसमेें ओएमआर खराब हो जाती है। कई अभ्यर्थी काला किए हुए भाग को व्हाइटनर लगाकर उत्तर बदलने की कोशिश करते हैं। अब ऐसी कोशिश करने वालों की ओएमआर नहीं जांची जाएगी। परीक्षा में गलत उत्तर भरने के बाद उत्तर बदलना ठीक नहीं होगा।

शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष हीरालाल गुप्त के मुताबिक उत्तर बदलने की किसी प्रकार की कोशिश ओएमआर की कार्बन कॉपी में दर्ज हो जाएगी। ऐसे में उस प्रश्न का मूल्यांकन नहीं होगा। परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी को किसी भी हालत में व्हाइटनर नहीं लाने दिया जाएगा, यदि कोई ले गया तो उसकी कॉपी का मूल्यांकन नहीं होगा। ओएमआर में व्हाइटनर लगाने के बाद परीक्षार्थी कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। इसी परेशानी से बचने केलिए चयन बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट घोषणा कर दी है। दरअसल टीईटी, दरोगा भर्ती परीक्षा सहित कई अन्य परीक्षाओं में व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया फंस जाती है।

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छात्रों के साथ गुरुजी को भी देनी होगी परीक्षा, होगा मूल्यांकन

छात्रों के साथ गुरुजी को भी देनी होगी परीक्षा, होगा मूल्यांकन

गोरखपुर। जितेन्द्र पाण्डेय First Published:30-05-2016 10:25:06 PMLast Updated:30-05-2016 10:25:06 PM
    
बेसिक व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अब गुरुजी का भी टेस्ट होगा। परीक्षा में टॉप करने वाले शिक्षकों की ग्रेडिंग के हिसाब से सूची तैयार होगी। स्कूल की कक्षाओं में  इन शिक्षकों का  फोटो व नाम लगाया जाएगा। इस परीक्षा में फेल होने वाले शिक्षको को छह माह बाद फिर टेस्ट देना होगा। अफसरों के मुताबिक जुलाई से इस योजना पर अमल शुरू हो जाएगा।  

नई व्यवस्था में छात्रों के साथ अब गुरुजी लोगों को भी अपने विषय पर पकड़ बनानी होगी। नहीं तो वह विभागीय टेस्ट में फेल हो सकते हैं। टेस्ट लेने के पहले अधिकारियों को स्कूलवार बच्चों से एक-एक विषय के बारे में पूछा जाएगा। जिस विषय में जो बच्चा कमजोर मिलेगा या फिर वो कहेगा कि इस विषय के अध्यापक पढ़ाते ही नहीं है। उन लोगों की सूची तैयार की जाएगी। जो पास होगा उनकी ग्रेडिंग तैयार की जाएगी।

Monday, 30 May 2016

Saturday, 28 May 2016

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15000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में 16448 पदों को शामिल किये जाने के सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय में अंतरिम प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निर्देश प्राप्त करते हुए चयन की कार्यवाही समयबद्ध तरीके से सम्पादित करने हेतु विशेष सचिव, उ0प्र0 शासन ने शिक्षा निदेशक ( बेसिक ) लखनऊ एवम् सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद को दिए निर्देश

Friday, 27 May 2016

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जहाँ जरूरत होगी वहीबनेगा एमडीएम - जिलाधिकारी ने बताया गुरुवार की शाम को मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की ओर से पत्र आ गया है जिसके मुताबिक उन्ही स्कूलों में भोजन बनवाया जायेगा जहाँ वास्तव में गर्मी के बावजूद बच्चें आते हैं

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प्रदेश के जनपदों में तैनात शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानातंरण 30 जून तक होंगे। इसके लिए शिक्षकों को कम से कम पांच जिलों का विकल्प देना होगा। तबादले के लिए एक जून से ऑनलाइन आवेदन करना होगा

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने की बेसिक शिक्षा मंत्री से मुलाकात

डेली न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश के जनपदों में तैनात शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानातंरण 30 जून तक होंगे। इसके लिए शिक्षकों को कम से कम पांच जिलों का विकल्प देना होगा। तबादले के लिए एक जून से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह जानकारी गुरुवार को बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने दी। श्री हसन और प्राथमिक शिक्षक संघ प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन विशिष्ट बीटीसी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इस दौरान बेसिक शिक्षा निदेशक डीबी शर्मा भी मौजूद रहे। मंत्री से वार्ता के दौरान एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह और प्रांतीय महामंत्री आशुतोष मिश्र भी मौजूद थे। इस मौके पर उपस्थित एसोसिएशन के सरंक्षक और शिक्षक विधायक उमेश द्बिवेदी की मौजूदगी में शिक्षकों को स्थानान्तंरण को लेकर बात की गई। जिसमें मंत्री ने बताया कि शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। 30 जून तक इसकी पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। लेकिन इसके लिए शिक्षकों को पांच जिलों का विकल्प देना होगा। बैठक के दौरान इसके अलावा भी संगठन के पदाधिकारी पंकज यादव और आकाश मल्होत्रा उपस्थित रहे।

रंग लाई एसोसिएशन की मेहनत

लखनऊ। काफी समय से शिक्षकों के तबादले रुके हुए थे। इस संबंध में बेसिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन की ओर से बार.बार कोशिश आखिरकार रंग लायी। इस बारे में एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में मंत्री ने पूरी तरह से आश्वस्त किया है कि शिक्षकों के तबादले इस बार नहीं रुकेंगे। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गयी हैं।
मंत्री ने कहा, शिक्षकों को पांच जिलों का देना होगा विकल्प

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राजधानी में आज से नहीं बंटेगा मिड-डे मील-अक्षयपात्र संस्था ने भी मिड-डे-मील बांटने से इनकार कर दिया है। संस्था ने गुरुवार को बीएसए को पत्र भेजकर बताया है कि दो दिन में 17,650 बच्चों का खाना बरबाद हो चुका है। ऐसे में शुक्रवार से मिड-डे मील नहीं बांटा जा सकेगा।

राजधानी में आज से नहीं बंटेगा मिड-डे मील

गर्मी की छुट्टियों में मिड-डे मील (एमडीएम) बांटने की घोषणा का शिक्षक शुरू से विरोध कर रहे थे। अब अक्षयपात्र संस्था ने भी मिड-डे-मील बांटने से इनकार कर दिया है। संस्था ने गुरुवार को बीएसए को पत्र भेजकर बताया है कि दो दिन में 17,650 बच्चों का खाना बरबाद हो चुका है। ऐसे में शुक्रवार से मिड-डे मील नहीं बांटा जा सकेगा।

जिले के 700 सरकारी स्कूलों में करीब एक लाख बच्चे हैं। अक्षयपात्र के उपमहाप्रबंधक सुनील मेहता ने बताया कि स्कूल खुले रहने पर सबके लिए मिड-डे मील भेज जाता है। गर्मी की छुट्टियां शुरू होने पर बुधवार को सिर्फ 13,000 बच्चों का खाना भेजा गया, लेकिन सिर्फ 250 बच्चों ने खाना खाया। गुरुवार को सिर्फ उन्हीं स्कूलों में मिड-डे मील भेजा गया, जहां बच्चों ने खाया था। दूसरे दिन 5,000 बच्चों का खाना बना, लेकिन सिर्फ 100 बच्चों ने ही मील खाया। इस तरह दो दिन में 17,650 बच्चों का खाना बरबाद हुआ। ऐसे में बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी को शुक्रवार से एमडीएम न बांटने की सूचना भेजी है।

कहीं स्कूल नहीं खुले, कहीं MDM नहीं आया

राजधानी के कई प्राइमरी स्कूलों में गुरुवार को ताला लगा रहा। ऐसे में वहां मिड-डे मील लेकर पहुंची वैन लौट गई। कुछ स्कूल ऐसे भी थे, जहां एमडीएम पहुंचा ही नहीं। रिवर बैंक कॉलोनी स्थित प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक इजहार हुसैन ने बताया कि स्कूल में बच्चे तो आए, लेकिन मिड-डे मील नहीं आया। इसके उलट वजीरगंज स्थित प्राइमरी स्कूल-1 और प्राइमरी स्कूल-2 में न बच्चे आए, न मिड-डे मील।•एनबीटी, लखनऊ

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मिडडे मील बनवाने में शिक्षकों की डयूटी कैसे लगाई जाए। इसके लिए विस्तृत आदेश दिए जाए ? मिडडे मील को स्पष्ट हों दिशा निर्देश- उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूमा.) शिक्षक संघ ने गुरुवार को ग्रीष्मावकाश के दिनों में मिड डे मील बनवाने के संबंध में डीएम व बीएसए को ज्ञापन सौंपा।

मिडडे मील को स्पष्ट हों दिशा निर्देश

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूमा.) शिक्षक संघ ने गुरुवार को ग्रीष्मावकाश के दिनों में मिड डे मील बनवाने के संबंध में डीएम व बीएसए को ज्ञापन सौंपा।

जिसमें कहा गया कि स्कूलों में मिड डे मील बनवाने के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं। इस वजह से प्रधानाध्यापकों में भ्रम की स्थिति है। मिडडे मील बनवाने में शिक्षकों की डयूटी कैसे लगाई जाए। इसके लिए विस्तृत आदेश दिए जाएं। बताया गया कि अवकाश के दिनों में विद्यार्थी भी स्कूल नहीं आते हैं। इससे व्यवस्था संचालित कराने में परेशानी आएगी। ज्ञापन सौंपने वालों में महामंत्री राजेश सिंह पटेल, करतार सिंह, रुद्र प्रताप, ब्रजदीप, विनोद, प्रवीण, अजय, अमरेश समेत कई शिक्षक शामिल रहे।6मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक का सूखाग्रस्त जिलों के लिए फरमान 1

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गर्मी की छुट्टियों में जो शिक्षक विद्यालयों में मिडडे-मील परोसने का कार्य देख रहे हैं उनकी रविवार व अन्य शासकीय अवकाश में भी छुट्टी नहीं है बल्कि छुट्टी के दिनों में भी मिडडे-मील परोसा जाएगा - मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक का सूखाग्रस्त जिलों के लिए फरमान

मिडडे मील को स्पष्ट हों दिशा निर्देश

मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक का सूखाग्रस्त जिलों के लिए फरमान

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : गर्मी की छुट्टियों में जो शिक्षक विद्यालयों में मिडडे-मील परोसने का कार्य देख रहे हैं उनकी रविवार व अन्य शासकीय अवकाश में भी छुट्टी नहीं है बल्कि छुट्टी के दिनों में भी मिडडे-मील परोसा जाएगा। झांसी एवं फरुखाबाद जिलों में रविवार को मिडडे-मील न परोसे जाने पर मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक श्रद्धा मिश्र ने वहां के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है।

प्रदेश के 50 सूखाग्रस्त जिलों में गर्मी की छुट्टियों 21 मई से 30 जून तक मिडडे-मील परोसे जाने के निर्देश दिए गए हैं। उसी के सापेक्ष शिक्षक उस दिन के तय मेन्यू के अनुसार खाना परोस रहे हैं। श्रद्धा मिश्र ने झांसी एवं फरुखाबाद जिलों के बीएसए को भेजे पत्र में लिखा है कि ग्रीष्मावकाश में भोजन परोसने का जो शासनादेश जारी हुआ है उसमें सभी शासकीय अवकाश एवं रविवार भी सम्मिलित हैं। ऐसे में रविवार के दिन पूर्व की भांति निर्धारित मेन्यू या फिर सोमवार से लेकर शनिवार तक के तय मेन्यू में से कोई एक अपनी सुविधानुसार चुनकर भोजन परोसा जाना है। इस आदेश से शिक्षकों में खलबली मच गई है। उनका कहना है कि ग्रीष्मावकाश की छुट्टियां पहले ही खत्म हो गई हैं, अब रविवार एवं अन्य अवकाश में भी मिडडे-मील बनवाना पड़ेगा। उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा है कि यह शिक्षकों के साथ ठीक नहीं हो रहा है। मिडडे-मील की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व स्थानीय निकाय को देनी चाहिए।

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूमा.) शिक्षक संघ ने गुरुवार को ग्रीष्मावकाश के दिनों में मिड डे मील बनवाने के संबंध में डीएम व बीएसए को ज्ञापन सौंपा।

जिसमें कहा गया कि स्कूलों में मिड डे मील बनवाने के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं। इस वजह से प्रधानाध्यापकों में भ्रम की स्थिति है। मिडडे मील बनवाने में शिक्षकों की डयूटी कैसे लगाई जाए। इसके लिए विस्तृत आदेश दिए जाएं। बताया गया कि अवकाश के दिनों में विद्यार्थी भी स्कूल नहीं आते हैं। इससे व्यवस्था संचालित कराने में परेशानी आएगी। ज्ञापन सौंपने वालों में महामंत्री राजेश सिंह पटेल, करतार सिंह, रुद्र प्रताप, ब्रजदीप, विनोद, प्रवीण, अजय, अमरेश समेत कई शिक्षक शामिल रहे।6मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक का सूखाग्रस्त जिलों के लिए फरमान 1

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