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जनपद के अंदर स्थानांतरण प्रकिया में ऑनलाइन आवेदन करें, समस्त दिशा निर्देश पढ़ते हुए यहां से आवेदन करें

शासनादेश  आवेदन पत्र भरने हेतु महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश   ( ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व दिशा निर्देश ध्यान पूर्वक पढ़ लें एवं आवेदन के प्र...

Wednesday, 31 August 2016

परिषदीय प्राथमिक/उ0प्रा0विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण के फलस्वरूप अध्यापकों को कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में।

अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण: कतिपय अध्यापकों/अध्यपिकाओं द्वारा तथ्यों को छुपाकर ग्रामीण से नगर क्षेत्र में स्थानांतरित शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने एवं उक्त त्रुटि में सम्बन्धित जांच अधिकारी/खण्ड शिक्षा अधिकारी के विरुद्घ कार्यवाही करने के सम्बन्ध में आदेश

रामपुर : 16448 काउंसलिंग उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी, डाउनलोड करे और नाम देखें

गोरखपुर : नवनियुक्त शिक्षकों का ऑनलाइन / सम्बन्धित संस्था द्वारा सत्यापन उपरांत वेतन आदेश जारी, डाउनलोड करे और नाम देखें

चुनाव से पहले उर्दू शिक्षकों की एक और भर्ती की तैयारी, डेढ़ से दो हजार शिक्षकों की भर्ती हेतु 2-4 दिन में भेजा जायेगा प्रस्ताव,

●शिक्षकों के खाली पदों का मांगा ब्यौरा ●15 दिन में में ब्यौरा जुटाकर घोषणा कर दी जायेगी शिक्षक भर्ती की ●सरकार चुनाव से पहले टेट पास प्रशिक्षुओं को देगी एक और शिक्षक भर्ती का तोहफा

●शिक्षकों के खाली पदों का मांगा ब्यौरा

●15 दिन में में ब्यौरा जुटाकर घोषणा कर दी जायेगी शिक्षक भर्ती की

●सरकार चुनाव से पहले टेट पास प्रशिक्षुओं को देगी एक और शिक्षक भर्ती का तोहफा

गांव से निकले और शहर में तैनात, अंतर जिला तबादले में बड़े पैमाने पर हेराफेरी

गांव से निकले और शहर में तैनात, अंतर जिला तबादले में बड़े पैमाने पर हेराफेरी

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद : शिक्षकों के अंतर जिला तबादले में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई है। कई जिलों में ऐसे शिक्षक बहुतायत में है जिन्होंने तथ्य छिपाकर नगर क्षेत्र में तबादला करा लिया है, जबकि वे मूलरूप से ग्रामीण
क्षेत्र में नियुक्त हैं। यही नहीं, जिस शिक्षक की नियुक्ति के तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं, उसका तबादला सीतापुर से आगरा हो गया है। शिक्षा अधिकारियों ने काउंसिलिंग के नाम पर सिर्फ खानापूरी की, इसलिए गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई। अब खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। 1परिषदीय शिक्षकों का तीन वर्ष के बाद अंतर जिला तबादला हुआ है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए गए। तीन वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों को आवेदन करने से रोका गया, फिर भी तमाम नियम-कानूनों को धता बताकर शिक्षक मनचाहा आदेश करवाने में सफल रहे हैं। बांदा में अतर्रा की एक शिक्षिका ने तथ्य छिपा कानपुर नगर अपना तबादला करा लिया था। औरैया जिले में बारह शिक्षकों ने अपना तबादला दूसरे जिले के नगर क्षेत्र में करा लिया है।

16448 शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी की आशंका, भर्ती के अनेक दावेदारों का नाम गृह जिले के कटऑफ में आने के बावजूद उन्होंने काउंसिलिंग दूसरे जिलों में जाकर कराई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर यह नौबत क्यों आई?

शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी की आशंका

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती में फशिक्षक भर्ती में गड़बड़ी की आशंका1राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा हुआ है। यह आशंका कोई और नहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी ही जता रहे हैं। दरअसल, भर्ती के अनेक दावेदारों का नाम गृह जिले के कटऑफ में आने के बावजूद उन्होंने काउंसिलिंग दूसरे जिलों में जाकर कराई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर यह नौबत क्यों आई? अपने जिले में ही काउंसिलिंग कराने से उन्हें किसने रोका था। दूसरे जिले को वरीयता देने का कारण अभिलेखों में गड़बड़ी तो नहीं है? परिषदीय विद्यालयों में इधर बड़ी संख्या में नई नियुक्तियां हुई हैं। उनमें से लगभग सभी शिक्षकों के दो प्रमाणपत्र जांच करके वेतन भुगतान भी शुरू हो गया है। शिक्षकों के सभी प्रमाणपत्रों की जांच अब तक लंबित है, हालांकि इस संबंध में कई बार निर्देश जारी हुए हैं। अब तक हरदोई जिले में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक पकड़े गए हैं। उन्हें न केवल सेवा से बर्खास्त किया गया, बल्कि एफआइआर भी दर्ज कराई गई है। अब हरदोई के बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने ही 16 हजार शिक्षक भर्ती पर सवाल खड़े किए हैं। इससे फर्जीवाड़े की आशंका को बल मिल रहा है।

स्थानान्तरण : एक स्कूल वाले स्कूलों में दूसरा अध्यापक तैनात करने के निर्देश

जूता पॉलिश कर बीटीसी प्रशिक्षुओं ने जताया विरोध, बीटीसी 2013 के अभ्यर्थी नयी भर्ती की कर रहे मांग

बिना अवकाश निदेशालय आए तो होगी कार्यवाही : सचिव

शिक्षा निदेशालय का ताला खुला, मांगें नहीं हुईं पूरी माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा द्वारा नौ दिनों से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर की जा रही थी तालाबंदी

शिक्षा निदेशालय का ताला खुला, मांगें नहीं हुईं पूरी

माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा द्वारा नौ दिनों से माध्यमिक शिक्षा

निदेशालय पर की जा रही थी तालाबंदी

जासं, लखनऊ : माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा उत्तर प्रदेश द्वारा पिछले नौ दिनों से पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया जा रहा था। मंगलवार को शासन द्वारा मानदेय देने का शासनादेश जारी करने का ठोस आश्वासन देने पर ताला तो खोल दिया गया लेकिन रात तक शासनादेश जारी नहीं हो पाया। ऐसे में अब वित्तविहीन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक काफी आक्रोशित हैं और वह बुधवार को बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे धोखेबाजी करार दिया है और इसका जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं।

माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, उप्र के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष व एमएलसी उमेश द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने मांगें पूरी होने के आश्वासन पर अपना नौ दिनों से चल रहा प्रदर्शन खत्म कर दिया। पिछले नौ दिनों से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में पूर्णतया तालाबंदी थी और इसके कारण कामकाज पूरी तरह ठप था। शासन के उच्चाधिकारियों ने हमें पूरा भरोसा दिलाया कि शाम तक शासनादेश जारी हो जाएगा लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे में यहां पर शिक्षकों को गुमराह किया गया। फिलहाल शिक्षक काफी आक्रोशित हैं और अब बुधवार को विधानभवन का घेराव होगा या फिर दोबारा तालाबंदी शुरू कर दी जाएगी। मालूम हो कि यूपी सरकार ने फरवरी 2016 में बजट में वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय देने के लिए दो सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। मगर शिक्षकों को अभी तक धनराशि नहीं दी गई।

माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा द्वारा नौ दिनों से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर की जा रही थी तालाबंदी

स्थानांतरण समिति में संशोधन, शासनादेश जारी डीएम अध्यक्ष, सीडीओ उपाध्यक्ष एवं बीएसए सदस्य सचिव होंगे

स्थानांतरण समिति में संशोधन, शासनादेश जारी

डीएम अध्यक्ष, सीडीओ उपाध्यक्ष एवं बीएसए सदस्य सचिव होंगे

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : अंतर जिला तबादले के बाद शिक्षकों का जिले के अंदर स्थानांतरण/समायोजन करने का आदेश भी जारी हो गया है। स्थानांतरण समिति में शासन ने संशोधन किया है अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति संबंधित जिले के अंदर तबादले कर सकेगी। समिति के उपाध्यक्ष उस जिले के मुख्य विकास अधिकारी एवं सदस्य सचिव वहां के बेसिक शिक्षा अधिकारी होंगे। बड़ी संख्या में एकल एवं बंद विद्यालयों को संचालित करना समिति की पहली प्राथमिकता होगी।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों का जिले के अंदर स्थानांतरण/समायोजन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह ने इस बार स्थानांतरण/समायोजन करने की समिति में संशोधन कर दिया है। हर जिले में डीएम की अगुवाई में समिति गठित करने का आदेश जारी हुआ है। इसके साथ एक प्रपत्र जारी किया गया है जिस पर बीएसए सूचना अंकित करके समिति के समक्ष स्थानांतरण प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे और समिति इस संबंध में निर्णय लेगी। प्रपत्र में जहां से जहां के लिए जाना है वहां शिक्षक के नाम से लेकर, विद्यालय, ब्लाक, छात्र संख्या, कार्यरत शिक्षक एवं तबादले का औचित्य तक लिखा जाएगा। सचिव ने निर्देश दिया है कि स्थानांतरण/समायोजन नियमों के तहत ही होने चाहिए।

एडी बेसिक की समिति हाशिए पर : परिषदीय शिक्षकों का जिले के अंदर फेरबदल करने का अधिकार अब तक मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक (एडी बेसिक) के पास रहा है। 13 मई 2013 को बेसिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव पर शासन ने एडी बेसिक की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। इसमें संबंधित जिले का बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव एवं जिला विद्यालय निरीक्षक/उनके द्वारा नामित सदस्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य की ओर से नामित अधिकारी सदस्य बनाए गए थे, लेकिन यह समिति कारगर नहीं रही।

बदलाव की आखिर क्यों आई नौबत : शैक्षिक सत्र के ठीक मध्य में जिले के अंदर तबादला आदेश जारी होने से हर कोई सन्न है। उसे यह सूझ नहीं रहा है कि आखिर यह आदेश अब क्यों जारी हुआ है। असल में इधर परिषदीय स्कूलों में नई नियुक्तियां लाखों संख्या में हुई एवं जिले के अंदर समय-समय पर फेरबदल भी हुए, फिर भी बड़ी संख्या में प्रदेश में विद्यालय एकल शिक्षक वाले एवं तमाम बंद पड़े हैं। इस पर सरकार एवं शासन के अफसर कुपित रहे हैं।

परिषद मुख्यालय भी हुआ दरकिनार

मई, जून में जिले के अंदर बड़ी संख्या में तबादले किए गए थे। उसमें बीएसए के प्रस्ताव पर बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव से अनुमोदन लिया गया। उसी के आधार पर शिक्षकों को इधर से उधर किया गया। इस बार भी जिले के अंदर तबादलों में किसको अधिकार दिया जाए। इस पर काफी दिनों तक मंथन चला।

स्थानांतरण समिति में संशोधन, शासनादेश जारी

डीएम अध्यक्ष, सीडीओ उपाध्यक्ष एवं बीएसए सदस्य सचिव होंगे

परिषदीय विद्यालयों में भर्तियों की बहार , जिलों में उर्दू शिक्षक, बीपीएड समेत अन्य रिक्त पदों की तलाश शुरू:बेसिक शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिया है कि जिलों में शिक्षकों के रिक्त पदों का संकलन किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया सितंबर माह के अंत तक शुरू कराई जा सके:रिक्त पदों की संख्या 50 हजार तक होने के आसार

परिषदीय विद्यालयों में भर्तियों की बहार

जिलों में उर्दू शिक्षक, बीपीएड समेत अन्य रिक्त पदों की तलाश शुरू

कवायद :

विस चुनाव अधिसूचना के पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भर्तियों की बहार फिर आने वाली है। इसकी तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं। प्रदेश सरकार की मंशा है कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले परिषदीय विद्यालयों में व्यापक भर्ती प्रक्रिया शुरू हो। अफसरों को निर्देश हुआ है कि वह जिलों में उर्दू शिक्षक, बीपीएड एवं अन्य रिक्त पदों की तलाश करके रिपोर्ट तैयार करें। शिक्षकों के करीब 50 हजार पदों पर भर्ती शुरू होने के पूरे आसार हैं।

परिषदीय स्कूलों में 15 हजार शिक्षकों की भर्ती पूरी होने के बाद अब 16448 शिक्षकों की नियुक्ति चल रही है। यह सिलसिला सूबाई सरकार रुकने नहीं देना चाहती है। इसीलिए सोमवार को शिक्षा विभाग के अफसरों की बैठक राजधानी में हुई और उसमें बेसिक शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिया है कि जिलों में शिक्षकों के रिक्त पदों का संकलन किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया सितंबर माह के अंत तक शुरू कराई जा सके। विभागीय मंत्री के कड़े आदेश के बाद जल्द ही बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी होंगे, क्योंकि पदों की तलाश जिलेवार होनी है। परिषद सूत्रों की मानें तो भर्तियों में ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे, रिक्त पदों की संख्या 50 हजार तक होने के आसार हैं।

इधर, बीटीसी 2011, 2012 एवं 2013 सहित अन्य शिक्षक कोर्स करने वाले युवाओं ने बड़ी संख्या में लखनऊ में धरना-प्रदर्शन किया है। इनका कहना है कि शिक्षकों की भर्ती में शिक्षामित्र, डीएड, बीएलएड सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं इससे उन्हें नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। सरकार विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर किसी को नाराज नहीं करना चाहती। इसलिए भर्तियां करने का निर्देश जारी किया गया है।

बिना अवकाश मुख्यालय आने पर होगी कार्रवाई

बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय पर इन दिनों प्रदेश भर के शिक्षकों का जमावड़ा लगा है। इस बीच अंतर जिला तबादले के लिए शिक्षक परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इसे परिषद सचिव संजय सिन्हा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि कोई भी शिक्षक-शिक्षिका अपने जिले के बीएसए से बिना अवकाश लिए निदेशालय आता है तो उस पर सख्त विभागीय कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि जो भी शिक्षक उनसे मिलने आएंगे उनकी हाजिरी रजिस्टर पर ली जाएगी और वह रजिस्टर संबंधित जिले के बीएसए को भेजा जाएगा। यदि अवकाश न लिया होगा तो जिले एवं निदेशालय दोनों स्तर पर कार्रवाई होगी।

Tuesday, 30 August 2016

उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों का शैक्षिक सत्र 2016-17 में जनपद के अंतर्गत समायोजन/स्थानान्तरण के सम्बन्ध में आदेश

हरदोई : 16448 द्वितीय कट ऑफ जारी

कन्नौज: 16448 शिक्षक भर्ती में द्वितीय काउंसलिंग उपरांत कट ऑफ जारी

नवम्बर में होगा टीईटी 2016 , 10 सितम्बर से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की संभावना

Monday, 29 August 2016

16448 शि0भ0 में फर्जीवाड़े को देखते हुए बीएसए हरदोई ने समस्त बीएसए से मांगी 16 एवं 17 अगस्त को हुई काउंसलिंग की कट ऑफ: आदेश देखें

अमेठी: 16448 द्वितीय कट ऑफ जारी

लेख : शिक्षा में सुधार की कवायद :: प्रकाश जावेडकर

शिक्षा में सुधार की कवायद

शिक्षा किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि हम बच्चों को सही शिक्षा दें तभी हम योग्य और कुशल मानव संसाधन का विकास कर सकेंगे। शिक्षा शोध और नवाचार का माहौल बनाने में देश की मदद करती है। शिक्षा देश के नागरिकों के व्यक्तित्व, आचरण और मूल्यों को निखारती है और उन्हें एक विश्व नागरिक बनने में मदद करती है। इसीलिए सभी देश एक निश्चित अंतराल पर शिक्षा में सुधार करने का कठिन प्रयास करते हैं और अपनी शिक्षा नीति की समीक्षा करते हैं। आजादी के बाद से ही हमने इस संबंध में कई बड़े कदम उठाए हैं। सबसे पहले मुदलियार आयोग का गठन हुआ था। उसके बाद कोठारी आयोग बना। 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। उसके पच्चीस साल बीते चुके हैं। जाहिर है, आबादी की बदली जरूरतों और शिक्षा, नवाचार तथा शोध के स्तर पर पैदा हुई आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह एक सतत प्रयास है और इसीलिए हम सभी को एक नई शिक्षा नीति का हिस्सा बनना चाहिए, जो कि आम सहमति और विचार विमर्श से विकसित की जा सकती है। यही वजह है कि सरकार ने इस संबंध में जनवरी 2015 में ही पुनर्विचार प्रक्रिया आरंभ कर दी थी।1स्कूली शिक्षा के लिए 13 विषय चयन किए गए थे, जिसमें अध्ययन के परिणाम, माध्यमिक शिक्षा, वोकेशनल शिक्षा, परीक्षा, टीचर एजुकेशन, सूचना एवं संचार तकनीक का प्रयोग, शिक्षा शास्त्र, स्कूल प्रणाली, समावेशी शिक्षा, भाषा और बाल स्वास्थ्य शामिल थे। आज हर कोई स्कूली शिक्षा के लिए इन विषयों की प्रासंगिकताओं को स्वीकारेगा। इससे बढ़कर बात यह है कि कोई भी व्यक्ति इनसे संबंधित अपने सुझाव दे सकता है। उच्च शिक्षा के लिए 20 विषयों का चयन किया गया था, जिसमें उच्च शिक्षा का संचालन, गुणवत्ता, विनियमन, केंद्रीय संस्थाएं, राज्य विश्वविद्यालय, कौशल विकास, ओपेन यूनिवर्सिटी, क्षेत्रीय विषमताएं, लैंगिक और सामाजिक खाई, समाज से जुड़ाव, भाषा, पीपीपी फाइनेंसिंग, उद्योग जगत से जुड़ाव, रिसर्च, नवचार और नया ज्ञान शामिल हैं। इसके अलावा इसमें कई और विषय भी जोड़े जा सकते हैं। इसके लिए 26 जनवरी 2015 से ऑनलाइन विचार विमर्श की प्रक्रिया आरंभ हुई, जिसके जरिए कुछ बिंदु रखे गए और उन पर उनके विचार मांगे गए। 31 अक्टूबर, 2015 तक 29 हजार प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं। मई 2015 में एक लाख दस हजार गांवों, 3015 ब्लॉकों, 406 जिलों और 962 स्थानीय निकायों में जमीनी स्तर पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया आरंभ हुई। विभिन्न शिक्षा कमेटियों के सदस्यों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यो और शिक्षा से जुड़े सभी लोगों ने इन विषयों पर चर्चा की और अपने सुझाव दिए। 21 राज्यों ने भी स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। इस प्रक्रिया के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छह जोनल बैठकें की गई थीं। इस जोनल बैठक में कई राज्यों के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे।1इस प्रकार शिक्षा नीति के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श हुआ और इस क्रम में तमाम सुझाव हमें प्राप्त हुए। इसके बाद इन सभी सुझावों को समझने और छांटने के लिए टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई। कुछ लोगों ने अर्थ लगाया कि यह कमेटी नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार के लिए गठित की गई है। सुब्रमण्यम कमेटी ने बड़े पैमाने पर आए सुझावों की जांच-पड़ताल की। इस कमेटी ने भी शिक्षा से जुड़े विभिन्न लोगों के साथ बैठक की थी। इस गहन और विस्तृत विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद कमेटी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे के विकास के लिए भारत सरकार को अपने सुझाव दिए। इस प्रकार जमीनी स्तर पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया से आए सुझाव और सुब्रमण्यम कमेटी की सिफारिशों ने नई शिक्षा नीति पर चर्चा और बहस आरंभ करने के लिए महत्वूपर्ण इनपुट दिए हैं। सुब्रमण्यम कमेटी द्वारा दी गईं सिफारिशें शिक्षा नीति का मसौदा नहीं हैं, क्योंकि यह अभी न तो कैबिनेट के समक्ष लाई गई हैं और न ही कैबिनेट ने उन पर मुहर लगाई है। दरअसल यह सिर्फ नई शिक्षा नीति के मसौदे का एक खाका भर है।1यहां यह समझना जरूरी है कि किस आधार पर नई शिक्षा नीति का विकास होना चाहिए। भारत के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने और हर व्यक्ति को अवसर मुहैया कराने के लिए नई शिक्षा नीति पांच स्तंभों पर टिकी होनी चाहिए। ये हैं-पहुंच, सामथ्र्य, गुणवत्ता, समानता और जवाबदेही। विगत सत्तर सालों के दौरान शिक्षा को हम हर दरवाजे पर ले गए हैं और इसके विस्तार के अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहे हैं। अब प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक हर स्तर पर शिक्षा के स्तर को सुधारने की चुनौती है। अर्थात हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना साकार करना होगा। लिहाजा नई शिक्षा नीति का मुख्य जोर गुणवत्ता पर रखना होगा। नई नीति में सामाजिक न्याय और समानता के तत्वों को शामिल कर शिक्षा को समावेशी बनाना भी समान महत्व रखता है। जाहिर है, हमारे सामने सबसे मुख्य चुनौती तर्कसंगत समाधान खोजना है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधरे और हर स्तर पर सभी छात्रों को अवसर भी मिले।1अपने इस लेख के जरिए मैं आप सभी से अपने सुझाव देने की अपील करता हूं। हमने नई शिक्षा नीति के मसौदे के लिए सुझाव देने की तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी है। अभी हाल ही में संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में भी नई शिक्षा नीति पर संक्षिप्त चर्चा हुई थी, जिसमें कई सदस्यों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। राज्यसभा के कुछ सांसदों की मांग पर हम उन सांसदों के लिए नई शिक्षा नीति पर एक वर्कशॉप आयोजित करने पर विचार कर रहे हैं जिनकी इसमें रुचि है और जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। इस बीच कुछ लोग नई शिक्षा नीति पर सस्ती राजनीति भी करने की कोशिश कर रहे हैं। यह नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेरा मानना है कि शिक्षा एक राष्ट्रीय एजेंडा है, न कि एक पार्टी का एजेंडा। इस प्रकार सरकार की मंशा के ऊपर सवाल उठाने या गलतफहमी पैदा करने और दुष्प्रचार अभियान में लिप्त होने से कोई परिणाम नहीं निकलेगा। मैंने पढ़ा है कि कुछ लोग यह उल्लेख कर रहे हैं कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मिले अधिकारों को खत्म कर देगी। उन्हें मैं स्पष्ट कहना चाहूंगा कि हम संविधान में सुनिश्चित अधिकारों में तनिक भी कटौती का इरादा नहीं रखते हैं। साथ ही मैं यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि हम ऐसे कदम उठाना चाहते हैं ताकि एससी, एसटी, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और सभी वंचित वर्गो को शिक्षा में समान अवसर प्राप्त हों।

(लेखक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं)

आगरा : 16448: नियुक्ति पत्र न देने पर बीएसए कार्यालय पर रात तक हंगामा, अभ्यर्थियों का आरोप था कि उन्हें चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका

नियुक्ति पत्र न देने पर बीएसए कार्यालय पर रात तक हंगामा, अभ्यर्थियों का आरोप था कि उन्हें चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका

जागरण संवाददाता, आगरा: 16448 शिक्षक भर्ती में शनिवार शाम को बीएसए कार्यालय पर चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र न देने पर जमकर हंगामा किया। अभ्यर्थी गेट पर ही धरने पर बैठ गए। महिला अभ्यर्थियों ने
कार्यालय का गेट बंद नहीं होने दिया।
परिषदीय विद्यालयों में 16 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बेसिक शिक्षा सचिव द्वारा 26 अगस्त तक नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। शनिवार सुबह से ही चयनित अभ्यर्थी बीएसए कार्यालय पहुंचना शुरू हो गए। अभ्यर्थी बीएसए से नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि भीड़ को देखते हुए बीएसए थोड़ी देर बाद आने की कहकर कार्यालय से निकल गए। इसके अलावा नियुक्ति का कार्य देख रहे बाबू भी दिखाई नहीं दिए। गर्मी में सभी अभ्यर्थी कार्यालय के बाहर बीएसए के लौटने का इंतजार करते रहे। शाम पांच बजे तक बीएसए नहीं आए और कार्यालय बंद होने का समय हो गया तो अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। गेट बंद नहीं होने दिया। उनकी मांग थी कि बीएसए आज ही नियुक्ति पत्र जारी करें। बीएसए के फोन न उठाने पर अभ्यर्थियों ने डीएम आवास पर फोन कर जानकारी दे दी। इसके बाद एसीएम मौके पर पहुंच गए। थोड़ी देर बाद बीएसए भी आ गए। बीएसए ने कहा कि नियुक्ति पत्र तैयार न होने के कारण सोमवार को वितरित किए जाएंगे, लेकिन अभ्यर्थी अडे़ रहे। उनका कहना था कि जब नियुक्ति पत्र तैयार नहीं थे तो बुलाया क्यों था।
गड़बड़ी के आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप था कि उन्हें चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका है। पटल सहायक द्वारा 50 हजार रुपये लेकर मनपंसद विद्यालय दिए जा रहे हैं, इसलिए ही नियुक्ति पत्र देने में देरी की जा रही है।
80 अभ्यर्थियों के नाम नहीं
बीएसए ने चयनित अभ्यर्थियों की सूची चस्पा की थी। इसमें 390 अभ्यर्थियों के नाम थे। बाकी अभ्यर्थियों के नाम न होने पर बताया कि इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र में कमी है। सूत्रों की मानें तो गड़बड़ी का डर दिखाकर अभ्यर्थियों से मोटी वसूली की है।

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