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Saturday, 21 January 2017

गुरूजी का चेहरा कब देख पायेंगे छात्र ⛔जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वर्षों से सम्बद्ध है दर्जनों शिक्षक ⛔आखिर सम्बद्धीकरण वाले शिक्षकों पर कब गिरेगी गाज ? ⛔ऐसा ही रहा तो शिक्षा मन्त्री की मंशा पर फिरेगा पानी


गुरूजी का चेहरा कब देख पायेंगे छात्र
⛔जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वर्षों से सम्बद्ध है दर्जनों शिक्षक
⛔आखिर सम्बद्धीकरण वाले शिक्षकों पर कब गिरेगी गाज ?
⛔ऐसा ही रहा तो शिक्षा मन्त्री की मंशा पर फिरेगा पानी

✍सीतापुर।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वर्षों से सम्बद्ध चल रहे शिक्षकों का चेहरा क्या परिषदीय स्कूलों के बच्चे अपने गुरू जी का चेहरा देख पायेंगे या नहीँ, ये सब विभागीय अफसरों की मर्जी पर आधारित दिख रहा है।क्योंकि ऑफिस में वर्षों से करीब एक दर्जन शिक्षकों का सम्बद्धीकरण चल रहा है।जोकि विभाग की मेहरबानियो के चलते अब तक समाप्त नहीँ हो सका है।लेकिन अगर शिक्षकों के सम्बद्धीकरण को समाप्त नहीँ किया गया तो परिषदीय स्कूलों का शैक्षिक स्तर दिन दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है।बीएसए कार्यालय में लगभग 50 शिक्षक  जिनमें खैराबाद ब्लॉक के  उ0प्रा0वि0 सधवापुर के स0अ0 प्रदीप कुमार तिवारी, प्रदीप वर्मा प्र0अ0 प्रा.वि.परसेहरा, पिसावां ब्लॉक मनीष, सकरन ब्लाक के अनूप कुमार आदि वर्षों से आफिस में ही अटैच हैं।और स्कूल का मुह झांकने को मुनासिफ नहीँ समझते।इस सम्बद्धीकरण के खेल को बीएसए ऑफिस में वर्षों बीतने वाले है व् पढ़ाई का सत्र भी खत्म होने में 4 माह बचे हैं।लेकिन बच्चे अपने स्कूल के गुरू जी का चेहरा आज तक नहीँ देख सके हैं।अब सवाल यह है कि बेसिक शिक्षा मन्त्री अहमद हसन द्वारा नये सत्र को लेकर तैयार की जा रही रणनीति क्या रंग ला पाती है या फिर बीएसए कार्यालय में सभी शिक्षकों का खेल ऐसे ही चलता रहेगा।गौरतलब है कि उ0प्र0 के जूनियर स्कूलों में शिक्षकों की कमी चल रही है तो फिर जिले के खैराबाद ब्लॉक के उ0प्रा0वि0 सधवापुर के स0अ0 प्रदीप कुमार तिवारी , प्रदीप वर्मा प्र0अ0 प्रा.वि.परसेहरा, पिसावां ब्लॉक मनीष, सकरन ब्लाक के अनूप कुमार तथा अन्य शिक्षकों का सम्बद्धीकरण समाप्तकर नये शिक्षकों को क्यों नहीँ लगाया गया।जबकि सम्बद्धीकरण का कार्य कुछ समय के लिये होता है न कि वर्षोँ के लिये।लेकिन सीतापुर बीएसए कार्यालय सम्बद्धीकरण को ही मूल पत्र माने हुए परिषदीय शिक्षकों ने अपनी तैनाती बीएसए कार्यालय में समझ अपने ही साथी शिक्षकों के साथ अभद्र ब्यवहार करने के साथ साथ उनका आर्थिक उत्पीड़न करना भी आम आम बात हो गयी है।

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