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Friday, 17 February 2017

ALLAHABAD:प्रशिक्षुओं को नियुक्ति देने का दिया आदेश 🎯हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति मामले में 1100 प्रशिक्षु शिक्षकों को सहायक अध्यापक के पद पर तीन सप्ताह में नियुक्ति दी जाए।

प्रशिक्षुओं को नियुक्ति देने का दिया आदेश
🎯हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति मामले में 1100 प्रशिक्षु शिक्षकों को सहायक अध्यापक के पद पर तीन सप्ताह में नियुक्ति दी जाए।

विधि संवाददाता, इलाहाबाद : हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति मामले में 1100 प्रशिक्षु शिक्षकों को सहायक अध्यापक के पद पर तीन सप्ताह में नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की इस दलील को नहीं माना कि आचार संहिता लागू होने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया आचार संहिता लागू होने से पहले पूरी हो चुकी है, नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जानी हैं। इसमें प्रदेश सरकार का कोई श्रेय नहीं है।1मनोज कुमार और अरविंद कुमार सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने यह आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का विज्ञापन 2011 में जारी किया गया था। प्रदेश सरकार 15वें संशोधन के आधार पर क्वालिटी प्वाइंट पर चयन कर रही थी, जिसे हाईकोर्ट ने शिवकुमार पाठक केस में रद कर दिया तथा चयन टीईटी मेरिट पर करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चयन टीईटी प्राप्तांक पर चयन करने का निर्देश दिया। 1कोर्ट ने यह भी निर्देश था कि चयन परिणाम याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सात दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले 1100 अभ्यर्थियों नियुक्ति दी जाए। प्रदेश सरकार सभी को प्रशिक्षु शिक्षक के पद पर नियुक्ति दे चुकी है। इनको छह माह का प्रशिक्षण कराकर परीक्षा भी आयोजित की गई। तीन जनवरी 2017 को सरकार ने शासनादेश जारी कर कहा कि अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण व परीक्षा कराई जा चुकी है इसलिए उनको सहायक अध्यापक के पद पर तदर्थ नियुक्ति दी जाए। चार जनवरी से प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू हो होने से नियुक्ति लटक गई। अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि चूंकि नियुक्ति प्रक्रिया चुनाव के पहले से जारी है और नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हो रही है इसलिए चुनाव के कारण नियुक्ति न रोकी जाए। चुनाव आयोग का कहना था कि नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि इससे मतदाता प्रभावित होंगे। कोर्ट ने आयोग की दलील खारिज करते हुए कहा कि तीन सप्ताह में सभी को नियुक्तियां दी जाए।विधि संवाददाता, इलाहाबाद : हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति मामले में 1100 प्रशिक्षु शिक्षकों को सहायक अध्यापक के पद पर तीन सप्ताह में नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की इस दलील को नहीं माना कि आचार संहिता लागू होने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया आचार संहिता लागू होने से पहले पूरी हो चुकी है, नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जानी हैं। इसमें प्रदेश सरकार का कोई श्रेय नहीं है।1मनोज कुमार और अरविंद कुमार सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने यह आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया है कि 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का विज्ञापन 2011 में जारी किया गया था। प्रदेश सरकार 15वें संशोधन के आधार पर क्वालिटी प्वाइंट पर चयन कर रही थी, जिसे हाईकोर्ट ने शिवकुमार पाठक केस में रद कर दिया तथा चयन टीईटी मेरिट पर करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चयन टीईटी प्राप्तांक पर चयन करने का निर्देश दिया। 1कोर्ट ने यह भी निर्देश था कि चयन परिणाम याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सात दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले 1100 अभ्यर्थियों नियुक्ति दी जाए। प्रदेश सरकार सभी को प्रशिक्षु शिक्षक के पद पर नियुक्ति दे चुकी है। इनको छह माह का प्रशिक्षण कराकर परीक्षा भी आयोजित की गई। तीन जनवरी 2017 को सरकार ने शासनादेश जारी कर कहा कि अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण व परीक्षा कराई जा चुकी है इसलिए उनको सहायक अध्यापक के पद पर तदर्थ नियुक्ति दी जाए। चार जनवरी से प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू हो होने से नियुक्ति लटक गई। अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि चूंकि नियुक्ति प्रक्रिया चुनाव के पहले से जारी है और नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हो रही है इसलिए चुनाव के कारण नियुक्ति न रोकी जाए। चुनाव आयोग का कहना था कि नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि इससे मतदाता प्रभावित होंगे। कोर्ट ने आयोग की दलील खारिज करते हुए कहा कि तीन सप्ताह में सभी को नियुक्तियां दी जाए।


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