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Sunday, 19 March 2017

ALLAHABAD:अभ्यर्थी घटे, सफलता का प्रतिशत धड़ाम, टीईटी का हाल 🎯2011 में सबसे अधिक अभ्यर्थी बैठे और आधे से अधिक उत्तीर्ण हुए। ⛔2016 में दावेदार कम हुए तो महज 11 फीसद युवा ही हो सके उत्तीर्ण।

अभ्यर्थी घटे, सफलता का प्रतिशत धड़ाम, टीईटी का हाल
🎯2011 में सबसे अधिक अभ्यर्थी बैठे और आधे से अधिक उत्तीर्ण हुए।
⛔2016 में दावेदार कम हुए तो महज 11 फीसद युवा ही हो सके उत्तीर्ण।
धर्मेश अवस्थी
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद।प्रदेश में शिक्षक बनने के दावेदारों ने फिर शर्मसार कर दिया है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2016 उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं। ऐसा नहीं है कि परिणाम इतना खराब पहली बार आया है। इसके पहले भी 2013 में रिजल्ट 14 प्रतिशत आ चुका है, लेकिन इस बार परीक्षा परिणाम महज 11 फीसद होने से सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। इससे युवाओं की योग्यता व बीटीसी कालेजों में हो रही पढ़ाई की भी पोल खुल गई है। बेसिक शिक्षा परिषद के सभी विद्यालयों में एनसीटीई के निर्देश लागू होने के बाद से शिक्षक बनने के लिए टीईटी अनिवार्य है। पहली बार सूबे में 2011 में यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कराई, उसमें अब तक के रिकॉर्ड में सर्वाधिक अभ्यर्थी शामिल हुए और उसी के सापेक्ष उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद से यह इम्तिहान परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश करा रहा है। परीक्षा नियामक ने अब चौथा इम्तिहान कराया है और इसमें शामिल होने वाले अभ्यर्थी घटते व बढ़ते रहे हैं, लेकिन वर्ष 2011 के ग्राफ को वह पार नहीं कर सका है। ऐसे ही परीक्षा परिणाम भी अधिकतम 24.99 तक ही पहुंचा है। इसकी मुख्य वजह स्तरीय प्रश्नपत्र का होना एवं परीक्षार्थियों की लचर तैयारी ही है। हालत यह है कि परीक्षार्थी ओएमआर शीट में अपने से जुड़ी सारी सूचनाएं तक नहीं भर रहे हैं। इससे असफल अभ्यर्थियों का आकड़ा बढ़ रहा है। इस परिणाम ने बीटीसी कालेजों को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। वहां पढ़ाई न होने के आरोप काफी दिनों से लग रहे हैं, लेकिन अब टीईटी परिणाम ने वहां की कलई खोल दी है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने कहा कि टीईटी परीक्षा में नियमों एवं प्रश्नपत्र की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। सवाल कठिन नहीं थे, बल्कि युवाओं की तैयारी करने में कहीं न कहीं कमी रही होगी।


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