Wednesday, 8 March 2017

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ALLAHABAD:आयोग के खिलाफ ‘आधी दुनिया’ ने भरी हुंकार 🎯पीसीएस मुख्य परीक्षा की कॉपी बदलने का मामला 🎯सुहासिनी के साक्षात्कार के अंक बताने में आयोग कर रहा आनाकानी 🎯पीएम ने उठाया प्रकरण, न्याय मिलने तक लड़ेगे लड़ाई

आयोग के खिलाफ ‘आधी दुनिया’ ने भरी हुंकार
🎯पीसीएस मुख्य परीक्षा की कॉपी बदलने का मामला
🎯सुहासिनी के साक्षात्कार के अंक बताने में आयोग कर रहा आनाकानी
🎯पीएम ने उठाया प्रकरण, न्याय मिलने तक लड़ेगे लड़ाई
धर्मेश अवस्थी
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद।जो बच्चों को सिखाते हैं उस पर बड़े अमल करें तो यह धरती स्वर्ग बन जाए।’ इस सूत्र वाक्य पर रायबरेली की सुहासिनी वाजपेयी ने अमल करके एक नई लकीर खींच दी है। पहली बार किसी युवती ने उप्र लोकसेवा आयोग की धांधली के विरुद्ध तनकर खड़े होने की नजीर पेश की है। इतना ही नहीं जो काम पिछले कुछ वर्षो में युवा नहीं कर सके उसे इस मेधावी युवती ने कर दिखाया है। बात बहुत पुरानी नहीं है आयोग ने 2014 में डा. सुनील सिंह को आरटीआइ के जरिये ओएमआर शीट दिखाने से मना कर दिया था। इससे खफा होकर डा. सुनील ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। तीन बरस बाद सुहासिनी ने आरटीआइ के माध्यम से अपनी कॉपी दिखाने के लिए आयोग को मजबूर कर दिया। अहम परीक्षा में कॉपी बदलने की धांधली भी सामने आ गई। रायबरेली की सुहासिनी पढ़ने में शुरू से मेधावी रही हैं। परास्नातक तक की पढ़ाई उन्होंने फीरोज गांधी कालेज रायबरेली से की है। इन दिनों वह बनारस हंिदूू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू से शिक्षा शास्त्र में पीएचडी कर रही हैं। शैक्षिक तानेबाने को दुरुस्त करने पर उनका शोध चल रहा है। पढ़ाई छात्र केंद्रित हो, शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे हो और मूल्यांकन आदि की स्थिति कैसे बदले? इस पर तेजी से वह काम कर रही हैं। इसी बीच उन्होंने पीसीएस की तैयारी भी साथ-साथ जारी रखी। 2015 की प्रारंभिक परीक्षा में वह सफल भी हुईं लेकिन, मुख्य परीक्षा में असफल होना उनके गले नहीं उतरा। शैक्षिक सुधार के जो सपने उनके मन में थे वह साकार होने से पहले ही सुहासिनी खुद धांधली के चक्र में फंस गई तो आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए आगे आई। वह बोलीं, यह मामला सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि हर प्रतियोगी की लड़ाई वह लड़ाई लड़ना चाहती हैं, जो बातें हम सिखा रहे हैं उसकी खामियों से हमें ही दो-चार होना पड़ रहा है। सुहासिनी ने कहा कि सिर्फ एक प्रश्नपत्र में उनके अंक कम हैं, बाकी सभी में अच्छे नंबर आए हैं। इसी से स्पष्ट है कि कॉपी बदल दी गई है। बोलीं, प्रधानमंत्री ने हमारा प्रकरण उठाकर हमें और ताकत दी हैं उनसे मिलेंगे और न्याय मिलने तक लड़ेंगे।
📚📚📚📚गड़बड़ झाला📚📚📚📚📚📚
😈क्या है मामला♨ उप्र लोकसेवा आयोग की पीसीएस 2015 मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका बदलने का सनसनीखेज प्रकरण सुहासिनी की हिम्मत से ही उजागर हुआ है। उसे परीक्षा के परिणाम में अनुत्तीर्ण करार दिया गया, तब आरटीआइ के जरिए सुहासिनी ने उत्तर पुस्तिका दिखाने की मांग की। इसमें उसे दूसरे की कॉपी दिखाई गई। आयोग सचिव के स्तर तक प्रकरण पहुंचने पर दूसरी कॉपी मिली जिसमें उसे इतने अंक मिले थे कि वह मेंस उत्तीर्ण हो गई। पांच माह बाद उसका साक्षात्कार हुआ लेकिन, उसमें असफल घोषित कर दिया गया। यह प्रकरण पीएम नरेंद्र मोदी ने उठाया है।
😈प्रतियोगियों की बनीं रोल मॉडल ♨सुहासिनी आयोग के खिलाफ मुखर होकर प्रतियोगियों की रोल मॉडल बन गई हैं। दूसरे ही दिन उसका असर आयोग तक में दिखा, जब तमाम अभ्यर्थियों ने कॉपी दिखाने के लिए आरटीआइ के तहत आवेदन किया है।
😈साक्षात्कार के अंक नहीं बताए गए ♨अभ्यर्थी सुहासिनी ने बताया कि मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण करार देकर उनका इंटरव्यू हुआ और उसमें कुछ दिन हमें फेल होना बता दिया गया लेकिन, अभी साक्षात्कार के अंक नहीं बताए गए हैं। अब इसके लिए भी आरटीआइ के जरिये सूचना मांगेंगे। उन्होंने कहा कि आयोग यदि सही है तो वह हमारा सारा रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड करे।
आक्रोश


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