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Thursday, 2 March 2017

Ambedakar nagar:काश ! किसी को होती नौनिहालो की फिक्र

काश! किसी को होती नौनिहालों की फिक्र
जागरण टीम, (अंबेडकरनगर) : परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को अच्छी शिक्षा, सुरक्षा एवं उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर साल करोड़ों रुपये का बजट दिया जाता है। जिम्मेदारों की उदासीनता ने इस व्यवस्था पर ग्रहण लगा दिया। कारण कहीं एमडीएम नहीं बन रहा तो कहीं गुरुजी ही नदारद हैं। हफ्ते में एक दिन दूध पिलाने की व्यवस्था तो लगभग खत्म हो चुकी। दैनिक जागरण टीम ने बुधवार को कुछ परिषदीय विद्यालयों का जायजा लिया तो हकीकत सामने आ गयी। अब सोचने वाली बात होगी कि जिम्मेदार कब जागेंगे?
होगी कार्रवाई 1बेसिक शिक्षा अधिकारी जेएन सिंह ने बताया कि चुनाव की वजह से विद्यालयों का निरीक्षण नहीं हो पा रहा है। जिन विद्यालयों में दूध नहीं पिलाया जा रहा है, उनका इस मद का पैसा रोका जाएगा तथा एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को बैठाने के मामले में गंभीरता से जांच करायी जाएगी, जो दोषी पाया जाएगा, कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
दूध पिलाने की व्यवस्था तोड़ गई दम, अधिकारियों को परिषदीय विद्यालयों का हाल जानने की फुर्सत नहीं

किछौछा 1 केस एक : शिक्षा क्षेत्र बसखारी के एबीएसए कार्यालय से संबद्ध प्राथमिक विद्यालय बसखारी के अतिरिक्त कक्ष में पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। कक्ष के सामने लगे गंदगी के ढेर के बीच नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। वहीं अकबरपुर-आजमगढ़ राजमार्ग के किनारे स्थित इस विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी नहीं बन सकी। ऐसे में बच्चे कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं।1केस दो : प्राथमिक विद्यालय मलिकपुर में पंजीृत 59 छात्रों को पेयजल के संकट का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षण व्यवस्था जहां ठीक रही, वहीं पंजीकृत 59 बच्चों के सापेक्ष 32 बच्चों को एमडीएम योजना का लाभ नहीं मिल सका। प्रधानाध्यापक सरफराज हुसैन ने बताया कि पेयजल के लिए कई बार पत्रचार के माध्यम से विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन सुधार नहीं हो सका। गांव के संबंधित कोटेदार द्वारा राशन न उपलब्ध कराए जाने से एमडीएम बनवाने में दिक्कत हो रही है और चावल खरीदकर पकवाना पड़ रहा है। 1केस तीन : प्राथमिक विद्यालय मकोइया में पेयजल व्यवस्था फेल नजर आयी। शिक्षिका कक्ष में बच्चों को पढ़ाती मिलीं। प्रधानाध्यापक रामसूरत ने बताया कि जर्जर भवन होने के चलते हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। इस बारे में कई बार विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 1केस चार : उच्च प्राथमिक विद्यालय मकोइया में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखी। मानकों के अनुरूप शिक्षक होने के बाद भी पंजीकृत 30 बच्चों का शिक्षण कार्य बाधित चल रहा है। स्कूल में अक्सर एक शिक्षक के आने के चलते बच्चे सिर्फ समय बिता रहे। सहायक अध्यापक राजेंद्र कुमार बच्चों को पढ़ाते मिले, जबकि प्रधानाध्यापक अनुपस्थित थे। उनके बारे में पूछे जाने पर सहायक अध्यापक राजेंद्र ने बताया कि बीमारी के कारण स्कूल नहीं आ रहे हैं, जबकि सहायक अध्यापक राकेश कुमार बीआरसी रामनगर में तैनात हैं, इस कारण विद्यालय नहीं आते। 1प्राथमिक विद्यालय मकोइया में हैंडपंप से निकल रहे दूषित जल को पीते छात्र और बसखारी में अतिरिक्त कक्ष के सामने उगी घास व बिखरा कूड़ा और खांशा पहाड़पुर में इस तरह गिनती पढ़ते छात्र-छात्रएं ’जागरणकेदारनगर : केस एक : प्राथमिक विद्यालय खांशा पहाड़पुर में 10.40 बजे पहुंचने पर 50 बच्चे उपस्थित मिले, जबकि 76 बच्चे पंजीकृत हैं। दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों को बरामदे में एक साथ ही बैठाया गया था। ब्लैक बोर्ड पर दिनांक भी 20 फरवरी का ही था। इससे यहां के जिम्मेदार शिक्षकों की गैरजिम्मेदारी सामने आयी। अंदर के कमरे में कक्षा चार एवं पांच के बच्चों को एक साथ बैठाकर गिनती गिनाई जा रही थी। मध्याह्न भोजन के समय नौनिहालों को फर्श पर बैठाया गया। बुधवार को बच्चों को दूध पिलाया जाना था, लेकिन व्यवस्था नहीं थी। प्रधानाध्यापक सुदीप रंजन ने बताया कि दूध मिल नहीं पाता है।1केस दो : प्राथमिक विद्यालय बेलासपुर में 11 बजे पंजीकृत 26 बच्चों में 16 मौजूद मिले। सफाईकर्मी झाड़ू लगा रहा था, जिससे पूरे विद्यालय में धूल उड़ रही थी। बगल में रसोईघर के बाहर मध्याह्न भोजन बन रहा था, जो धूल से दूषित हो रहा था। यहां वर्ष 2009 से प्रधानाध्यापक नहीं हैं। कार्यभार सहायक अध्यापिका मोनालिसा ही देखती हैं। नौनिहालों को दूध पिलाने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी। सहायक अध्यापिका ने बताया कि हम दो सहायक अध्यापक ही विद्यालय चलाते हैं। विद्यालय के भवन में दरारें पड़ गयी हैं। 1केस तीन : प्राथमिक विद्यालय खूखूतारा 11.20 बजे पंजीकृत 88 में 50 बच्चे उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापक ओमकार विद्यालय में नहीं थे। सहायक अध्यापिका ने बताया कि वह

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