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Thursday, 2 March 2017

Badaun:खुद के रुपयों के लिये परेशां हो रहे शिक्षक

खुद के रुपयों के लिए परेशान हो रहे शिक्षक
बीएसए कार्यालय पर शिक्षकों ने किया हंगामा

जागरण संवाददाता, बदायूं : बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा विभाग की कार्यशैली में सुधार नहीं हो पा रहा है। शिक्षक-शिक्षिकाओं को उनके खुद के रुपयों के लिए टहलाया जा रहा है। रुपये न मिलने से परेशान शिक्षकों ने बुधवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हंगामा किया। 1कर्मचारियों की कार्यशैली कहें या स्टाफ कम होने का रोना। बेसिक शिक्षा का लेखा विभाग वित्तीय अनियमितताओं का अड्डा बनता जा रहा है। जरूरतमंद शिक्षक-शिक्षिकाओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षकों को खुद के रुपयों के लिए भटकना पड़ रहा है। वेतन को लेकर भविष्य में लेखा विभाग कोई दिक्कत पेश न कर दे, इसलिए कोई शिकायत तक नहीं कर पाता। विकास क्षेत्र दहगवां के एक शिक्षक के बैंक खाता संख्या गलत किए जाने की वजह से नवंबर महीने का वेतन नहीं आया। उसने खाता संख्या सही कराई तो वेतन आया, लेकिन नवंबर महीने का वेतन रुका रहा। लेखाकारों के चक्कर इधर-उधर टालमटोल की। आज तक नवंबर महीने का भुगतान नहीं किया गया है। हर बार फोन पर बता देने का आश्वासन दिया जा रहा है। उझानी विकास क्षेत्र के एक शिक्षक ने जीपीएफ के रुपये निकालने के लिए तकरीबन एक महीने पहले आवेदन किया। तब से चक्कर ही लगा रहे हैं। बकौल शिक्षक लेखाकार किसी चपरासी के पास तो चपरासी लेखाकार के पास भेज देता है। शिक्षक ने बताया कि उसे बीमारी होने की वजह से रुपयों की जरूरत थी। जिसके चलते जीपीएफ की मांग की थी, लेकिन कार्यालय में परेशान किया जा रहा है। बताया गया था कि चेक तैयार है, लेकिन वह दिया नहीं जा रहा। वित्त एवं लेखाधिकारी महिमा चंद ने बताया कि शिक्षक-शिक्षिकाओं को लेखा विभाग से जुड़ी कोई भी समस्या होने पर उनसे शिकायत की जा सकती है।जागरण संवाददाता, बदायूं : बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा विभाग की कार्यशैली में सुधार नहीं हो पा रहा है। शिक्षक-शिक्षिकाओं को उनके खुद के रुपयों के लिए टहलाया जा रहा है। रुपये न मिलने से परेशान शिक्षकों ने बुधवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हंगामा किया। 1कर्मचारियों की कार्यशैली कहें या स्टाफ कम होने का रोना। बेसिक शिक्षा का लेखा विभाग वित्तीय अनियमितताओं का अड्डा बनता जा रहा है। जरूरतमंद शिक्षक-शिक्षिकाओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षकों को खुद के रुपयों के लिए भटकना पड़ रहा है। वेतन को लेकर भविष्य में लेखा विभाग कोई दिक्कत पेश न कर दे, इसलिए कोई शिकायत तक नहीं कर पाता। विकास क्षेत्र दहगवां के एक शिक्षक के बैंक खाता संख्या गलत किए जाने की वजह से नवंबर महीने का वेतन नहीं आया। उसने खाता संख्या सही कराई तो वेतन आया, लेकिन नवंबर महीने का वेतन रुका रहा। लेखाकारों के चक्कर इधर-उधर टालमटोल की। आज तक नवंबर महीने का भुगतान नहीं किया गया है। हर बार फोन पर बता देने का आश्वासन दिया जा रहा है। उझानी विकास क्षेत्र के एक शिक्षक ने जीपीएफ के रुपये निकालने के लिए तकरीबन एक महीने पहले आवेदन किया। तब से चक्कर ही लगा रहे हैं। बकौल शिक्षक लेखाकार किसी चपरासी के पास तो चपरासी लेखाकार के पास भेज देता है। शिक्षक ने बताया कि उसे बीमारी होने की वजह से रुपयों की जरूरत थी। जिसके चलते जीपीएफ की मांग की थी, लेकिन कार्यालय में परेशान किया जा रहा है। बताया गया था कि चेक तैयार है, लेकिन वह दिया नहीं जा रहा। वित्त एवं लेखाधिकारी महिमा चंद ने बताया कि शिक्षक-शिक्षिकाओं को लेखा विभाग से जुड़ी कोई भी समस्या होने पर उनसे शिकायत की जा सकती है।

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