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Thursday, 2 March 2017

MAINPURI : बीएसए ने 30 शिक्षक किये बर्खास्त, टीईटी की मार्कशीट मिली फर्जी, फर्जी शिक्षकों से होगी वेतन की रिकवरी

फर्जी शिक्षकों से होगी वेतन की रिकवरी

जागरण संवाददाता, मैनपुरी: फर्जी दस्तावेजों के बूते नौकरी पाने वाले 23 शिक्षक वेतन के रूप में 90 लाख रुपये ले चुके हैं। बर्खास्त किए गए इन शिक्षकों से विभाग इस धनराशि की रिकवरी करेगा। शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थियों ने अंकतालिकाओं में हेराफेरी कराई थी, टीईटी के प्रमाण पत्र भी फर्जी पाए गए हैं।1 पिछले वर्ष हुई शिक्षकों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की आशंका पर जांच में एक शिक्षक की कारस्तानी पकड़ी गई। इसे तो बर्खास्त कर ही दिया गया, जांच के बाद 22 अन्य शिक्षकों की भी बुधवार को सेवा समाप्ति कर दी गई। ये 23 शिक्षक अपनी नौकरी के दौरान लगभग 90 लाख रुपये का वेतन भी पा चुके थे। फर्जीवाड़ा सामने आने पर इनका वेतन रोक दिया गया। अब विभाग इन बर्खास्त शिक्षकों से वेतन रिकवरी की तैयारी कर रहा है। 1 इन 23 शिक्षकों मे से 21 के शैक्षिक प्रमाण पत्र ही फर्जी थे। दो शिक्षकों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अंकतालिका फर्जी थीं। इनमें एक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की थी, तो एक राजस्थान शिक्षा बोर्ड की। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट में उत्तीर्ण का वर्ष और अनुक्रमांक तो ठीक था। लेकिन, मेरिट बढ़ाने के लिए उनमें अंक बढ़ा दिए गए थे। जबकि दो अन्य शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। 1विभाग की ओर से जारी नोटिस को लेकर किसी ने बीमार होने का बहाना बनाकर जवाब देने में असमर्थता जताई, तो किसी ने ऑनलाइन जांच पर विश्वास न कर ऑफलाइन जांच कराने की मांग की। कुछ शिक्षक जवाब देने में लगातार टालमटोल करते रहे। 1छह संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच नहीं: आठ माह पहले 15 हजार शिक्षक भर्ती में छह शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। लेकिन अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग इन शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच नहीं करा पाया है। जिले में इस भर्ती के तहत तीन सौ शिक्षकों की जिले में नियुक्ति हुई थीं। 1विभागीय कर्मियों पर घूम रही शक की सुई: शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े को लेकर शक की सुई विभाग के ही कर्मचारियों पर घूम रही है। बीते दिनों बीएसए रामकरन यादव ने दो लिपिकों को इस बाबत नोटिस भी दिया। कमलप्रताप लिपिक को निलंबित किया गया था। दस हजार शिक्षक भर्ती का काउंसिलिंग रजिस्टर गायब है। ये रजिस्टर कमल प्रताप के पास रहता था। जबकि दूसरे लिपिक कुशल प्रताप पर भी कार्रवाई के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक को लिखा है।

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