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Sunday, 16 April 2017

ALLAHABAD:किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों की नियुक्तियों पर जवाब-तलब,सख्ती। 🎯आरोप है कि इन नियुक्तियों में धांधली की गई है तथा नियम-कानून दरकिनार कर अपात्र व चहेतों को नियुक्तियां दी गई।

किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों की नियुक्तियों पर जवाब-तलब,सख्ती।
🎯आरोप है कि इन नियुक्तियों में धांधली की गई है तथा नियम-कानून दरकिनार कर अपात्र व चहेतों को नियुक्तियां दी गई।
विधि संवाददाता, इलाहाबाद : सरकारी महकमों में अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षक आदि की नियुक्तियां ही विवादित नहीं है, बल्कि सपा सरकार में आयोगों में सदस्यों की नियुक्तियों में खामियां सामने आ रही हैं। प्रदेश भर के जिलों में की गई किशोर न्याय बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप है कि इन नियुक्तियों में धांधली की गई है तथा नियम-कानून दरकिनार कर अपात्र व चहेतों को नियुक्तियां दी गई। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव महिला एवं बाल कल्याण सहित छह चयनित सदस्यों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कन्हैयालाल अग्रहरि सहित दस लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति डीएम त्रिपाठी की पीठ सुनवाई कर रही है। याचीगण के अधिवक्ता प्रशांत शुक्ल ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में किशोर न्याय बोर्ड में दो-दो सदस्यों की नियुक्ति के लिए 22 जून, 2015 को विज्ञापन जारी किया गया। विज्ञापन में शर्त थी कि अभ्यर्थी की आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो, वह परास्नातक की डिग्री रखता हो तथा बाल कल्याण के क्षेत्र में काम करने का सात वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी का उसी जिले का मूल निवासी होना आवश्यक है, जहां उसकी नियुक्ति की जानी है। याची का कहना है कि इन सभी नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की गई। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जो उस जिले के निवासी नहीं है। अनुभव और योग्यता भी नहीं देखी गई। नियमानुसार दो सदस्यों के बोर्ड में एक पुरुष और एक महिला सदस्य होनी चाहिए, मगर इसका भी ध्यान नहीं रखा गया और कहीं दोनों पुरुष तो कहीं दोनों सदस्य महिला नियुक्त किए गए। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सभी पक्षकारों से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।


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