New

डी० एल० एड० ( पूर्व प्रचलित नाम बी० टी० सी० ) प्रशिक्षण- 2016 के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ, समस्त नियम शर्ते अर्हता आदि को पढ़ते समझते हुए यहां से आवेदन करें

डी० एल० एड० ( पूर्व प्रचलित नाम बी० टी० सी० ) प्रशिक्षण- 2016 परीक्षा नियामक प्राधिकारी, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश STEP 1 आवेदन पत्र भर...

Friday, 14 April 2017

अगले साल से उर्दू में भी कराना होगा ‘नीट’,

अगले साल से उर्दू में भी कराना होगा ‘नीट’

नई दिल्ली, प्रेट्र : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह शैक्षणिक सत्र 2018-19 से चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का आयोजन उर्दू भाषा में भी कराए। फिलहाल इसका आयोजन दस भाषाओं हंिदूी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, उड़िया, बंगाली, असमी, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ में कराया जाता है।1याचिकाकर्ता स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआइओ) ने केंद्र सरकार पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत से मांग की थी कि इसी साल सात मई को होने वाले ‘नीट’ में उर्दू भाषा को शामिल किया जाए। इस पर जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस एमएम शांतनागोदार की पीठ ने कहा कि सरकार के लिए उर्दू को इसी साल से शामिल करना संभव नहीं होगा। 1पीठ ने कहा, ‘इसमें कई सारी मुश्किलें हैं। कृपया समझने की कोशिश कीजिए कि हम सरकार से चमत्कार करने के लिए नहीं कह सकते। परीक्षा सात मई को है और आज 13 अप्रैल है। इसकी प्रक्रिया काफी लंबी है।’ केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने भी कहा कि वे भी 2018 से ‘नीट’ को उर्दू में भी कराने के सुझाव का विरोध नहीं कर रहे हैं।नई दिल्ली, प्रेट्र : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह शैक्षणिक सत्र 2018-19 से चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का आयोजन उर्दू भाषा में भी कराए। फिलहाल इसका आयोजन दस भाषाओं हंिदूी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, उड़िया, बंगाली, असमी, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ में कराया जाता है।1याचिकाकर्ता स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआइओ) ने केंद्र सरकार पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत से मांग की थी कि इसी साल सात मई को होने वाले ‘नीट’ में उर्दू भाषा को शामिल किया जाए। इस पर जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस एमएम शांतनागोदार की पीठ ने कहा कि सरकार के लिए उर्दू को इसी साल से शामिल करना संभव नहीं होगा। 1पीठ ने कहा, ‘इसमें कई सारी मुश्किलें हैं। कृपया समझने की कोशिश कीजिए कि हम सरकार से चमत्कार करने के लिए नहीं कह सकते। परीक्षा सात मई को है और आज 13 अप्रैल है। इसकी प्रक्रिया काफी लंबी है।’ केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने भी कहा कि वे भी 2018 से ‘नीट’ को उर्दू में भी कराने के सुझाव का विरोध नहीं कर रहे हैं।

Blog Archive

Blogroll

Recommended Posts × +