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Tuesday, 25 April 2017

अटेवा: नई पेंशन नीति से छीनी जा रही बुढ़ापे की लाठी:संदीप यादव

नई पेंशन नीति से छीनी जा रही बुढ़ापे की लाठी
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वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल2005  के बाद नियुक्त हुए सभी शिक्षकों/कर्मचारियों/अधिकारियों के मध्य जिस योजना को लेकर ज्यादा चर्चा है वो है -नई पेंशन योजना।
वह इस पेंशन योजना से होने वाले फायदे व नुकसान से स्वयं को परिचित करा रहा है।
कर्मचारियों का एक धड़ा,जिसकी नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 से पूर्व की है वह इस नयी पेंशन योजना से होने वाली हानि से इत्तेफाक नहीं रखता क्योंकि ये पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित हैं।
अप्रैल 2005 के बाद सरकारी नौकरी पाये युवा कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना से होने वाले लाभ से पूरी तरह से वाकिफ हैं वो भी अपने लिए इसी योजना को बहाल करने की मांग सरकार से कर रहे हैं।जिससे उनका बुढ़ापा सुरक्षित हो सके।उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में पुरानी पेंशन बहाली के लिए "अटेवा" द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है।अटेवा का एक ही उद्देश्य है-पुरानी पेंशन की बहाली।विगत वर्षों में अटेवा ने अपने आंदोलन से पुरानी पेंशन बहाली की उम्मीद युवा कर्मचारियों के बीच जगायी है।
जनपद फैज़ाबाद में पुरानी पेंशन बहाली के लिए आवाज बुलंद करने में अटेवा पेंशन बचाओ मंच फैज़ाबाद के संदीप यादव इस काम में अपने कई साथियों के साथ लगे हुए हैं।संदीप यादव ने कहा कि
अगर समय रहते पुरानी पेंशन योजना को लेकर कर्मचारी एकजुट न हुए तो उनकी बुढ़ापे की लाठी सरकार छीन लेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक जिस पेंशन को कर्मचारियों का हक बता चुका है, उसी पेंशन को अब शेयर पर लगाकर हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नई पेंशन योजना में एक दो नहीं दर्जनों खामियां हैं।
नई पेंशन योजना शिक्षकों,कर्मचारियों पर तो लाद दी गई, परंतु सांसदों, विधायकों, सशस्त्र सैनिक बल आदि इंडिया सर्विस एक्ट के आच्छादित छूट दी गई है। यह दोहरा मापदंड कर्मचारी कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
आज सभी सरकारी विभागों में अधिकतर युवा कर्मचारी हैं जिन्हें न्यू पेंशन योजना में डाल दिया गया है जहाँ पर हम अपना ही पैसा कटवा कर ये भी नहीं जान पा रहे हैं की हमें रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम कितनी पेंशन मिलेगी ???क्या तेजी से बढ़ रही मंहगाई के इस दौर में नई पेंशन योजना से मिलने वाली पेंशन से परिवार का भरण पोषण हो पायेगा??
ऐसे प्रश्न उठना भी स्वाभाविक है क्योंकि आपकी गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा सरकार शेयर मार्केट में लगा रही है और इससे मिलने वाली आय से ही आपको पेंशन मिलेगी।शेयर मार्केट के उतार चढ़ाव से युवा वाकिफ है
इसी शेयर मार्केट में लोगो को अमीर से भिखारी बनते देखा गया है
कभी कभी लोगों ने मुनाफा भी कमाया है ।आपको बताते चलें कि बुढ़ापे में लोगो की रिस्क लेने की क्षमता बहुत ही कम होती है।30-35 साल नौकरी करने के बाद लोग अपना बुढ़ापा अच्छे से,बिना किसी परेशानी के बिताना चाहते हैं इसी लिए युवाओं का झुकाव पुरानी पेंशन के प्रति बढ़ा है।और वो हर हाल में पुरानी पेंशन बहाल कराना चाहते हैं।अगर युवा एकजुट होकर इस दिशा में काम करेंगे तो निश्चित ही उत्तर प्रदेश  सरकार को इसे बहाल करना ही पड़ेगा।
। सरकारी कर्मचारी दोनों योजना में अन्तर निकालने के साथ नफा-नुकसान पर मंथन करते देखे जा रहे है।
कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए जीपीएफ सुविधा उपलब्ध है, जबकि नयी पेंशन योजना में नहीं है। इसी तरह पुरानी पेंशन के लिए वेतन से कोई कटौती नहीं होती है, जबकि नयी पेंशन योजना में प्रति माह 10% की कटौती निर्धारित है। पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेन्ट के समय एक निश्चित पेंशन (अन्तिम वेतन का 50%) की गारण्टी है, लेकिन नयी योजना में पेंशन कितनी मिलेगी ? यह निश्चित नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह शेयर मार्केट व बीमा कम्पनी पर निर्भर है । कर्मचारियों का तर्क हैै कि  पुरानी पेंशन सरकार देती है, जबकि नयी पेंशन बीमा कम्पनी देगी। यदि कोई समस्या आती है तो हमे सरकार से नहीं, बीमा कम्पनी से लडना पडेगा। पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी ( अन्तिम वेतन के अनुसार 16.5 माह का वेतन) मिलता है, जबकि नयी पेंशन वालों के लिये ग्रेच्युटी की कोई व्यवस्था नहीं है। पुरानी पेंशन वालों को सेवाकाल में मृत्यु पर डेथ ग्रेच्युटी मिलती है, जबकि नयी पेंशन वालों के लिए डेथ ग्रेच्युटी की सुविधा समाप्त कर दी गयी थी जिसमे बाद में बहाल किया गया
पुरानी पेंशन में आने वाले लोगों को सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन मिलती है, जबकि नयी योजना में पारिवारिक पेंशन को समाप्त कर दिया गया था जिसे बहाल किया गया। पुरानी पेंशन पाने वालों को हर छ: माह बाद महंगाई तथा वेतन आयोगों का लाभ भी मिलता है,  जबकि नयी योजना में फिक्स पेंशन मिलेगी। महंगाई या वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलेगा यह हमारे समझ से सबसे बडी हानि है।
पुरानी पेंशन योजना वालों के लिए जीपीएफ से आसानी से लोन लेने की सुविधा है, जबकि नयी पेंशन योजना में लोन की कोई सुविधा नही है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ निकासी ( रिटायरमेंट के समय) पर कोई आयकर नहीं देना पडता है, जबकि नयी पेंशन योजना में जब रिटायरमेंट पर अंशदान का 60% वापस मिलेगा। इसी तरह जीपीएफ पर ब्याज दर निश्चित है, जबकि एनपीएस पूरी तरह शेयर पर आधारित है।
इन सबको बातों को ध्यान में रखते हुए युवाओं ने पुरानी पेंशन को ही उत्तम माना है।
संदीप यादव अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि पुरानी पेन्शन बहाली तो हमारे मान सम्मान की वापसी है  परंतु विभिन्न संगठनों से मिल रही प्रतिक्रियाओं को सुनने के बाद अब पेन्शन की लडाई हम युवाओं के लिये सबसे बडी चुनौती है, कुछ लोगो को लगता है कि आज का  युवा जिसे सोशल मीडिया जैसे फेसबुक,व्हाट्सएप्प ,मोबाइल  से फ़ुर्सत नही वो क्या पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई लडेगें!!!
ऐसे संगठनों से मैं पूछना चाहता हूँ कि 12 वर्षों तक पुरानी पेंशन बहाली के लिए आपने क्या  किया???क्यों नहीं आपने पुरानी पेंशन के पक्ष में आवाज बुलंद किया??? क्यों आप सब ने अपने मांग पत्र में नहीं रखा??अगर रखा भी तो सबसे नीचे ,आखिर ऐसा क्यों???
पूर्व की तरह आज भी आप सब की निष्क्रियता से आज का युवा बहुत चिंतित है और अपनी चिंता दूर करने अर्थात अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए अब खुद ही आगे आ रहा है
आज युवाओं द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है इस आंदोलन को अटेवा द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है  जिसमें युवा  लगातार सहयोग कर रहा है ।आज पुरानी पेंशन बहाली के लिए देश के लगभग सभी राज्यों में आंदोलन बहुत तेजी से गति पकड़ लिया है।
इस लिये मित्रो मै आप सभी युवा साथियों से अपील करता हू कि अब समय आ गया कि आप सभी पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें और पुरानी पेंशन को बहाल कराएं। क्योंकि इसी में सभी कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित है

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