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Friday, 21 April 2017

PENSION: न्यू पेंशन स्कीम या न्यू टेंशन स्कीम, एक ही पद से सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन में असमानता:अभिनव सिंह'राजपूत'

न्यू पेंशन स्कीम या न्यू टेंशन स्कीम

यह कैसा समानता का अधिकार है कि एक ही पद पर नियुक्त कर्मी जब सेवानिवृत्त होते हैं तो एक कर्मी को 25000 की पेंशन और दूसरे को  मात्र 1000 की पेंशन!आखिर ये कैसी समानता का अधिकार है। हमारी सरकारें इतना भी न समझ पायीं कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए तो न्यू पेंशन स्कीम लागू कर दी ,लेकिन खुद के लिए वही पुरानी पेंशन।मतलब माननीय चाहे कुछेक समय तक निर्वाचित रहें ,उसे पुरानी पेंशन और कर्मचारी चाहे 20 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लें,उसे नाम मात्र की  नयी पेंशन। इस देश का दुर्भाग्य कहें या नेताओं का सौभाग्य,एकबार जन प्रतिनिधि चुने जाने के बाद वे ताउम्र पेंशन के हकदार हो जाते हैं ,भले ही वे अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा भी न कर सकें।

              यह सच है कि सरकारी सेवा क्षेत्र में नौकरियों कर अवसर समय के साथ साथ कम हुए हैं,फिर भी आज जिन लोगों को सरकारी नौकरी मिली है ,संतोष उन्हें भी नही है।इसकी मुख्य वजह है पहले तो नौकरी का अनुबंध पर मिलना ,दूसरा सबसे बड़ी चिंता सेवाकाल के बाद बिना पेंशन के बुढापा।आखिर एक कर्मचारी के लिए पेंशन की चिंता क्यों जायज है???

     में कुछेक पहलुओं पर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि पुरानी पेंशन क्यों जरूरी है।भारतीय संविधान ने सबको समानता का अधिकार दिया लेकिन व्यवस्था ने समय के साथ अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इसको समानता की जगह असमानता में बदल दिया।बात हो रही है पुरानी पेंशन की।वर्ष 2004 के बाद सरकारी क्षेत्र में नियुक्त होने वाले कर्मियों के लिए केंद्रीय एवम राज्य सरकारों ने पुरानी पेंशन बन्द कर उसकी जगह नई पेंशन योजना शुरू कर दी । शुरू में जानकारी के अभाव में इसका विरोध कम हुआ लेकिन 10-12 वर्षों बाद NPS के परिणाम या दुष्परिणाम कहें,सामने आ रहे हैं।इसका जीवंत उदाहरण हाल ही में कांगड़ा के कुछेक जीबीटी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति पर देखने को मिला है।इसबात पर कोई मुह नही मोड़ सकता कि मात्र हजार रुपये में सेवानिवृत्त व्यक्ति अपने व अपने परिवार का भरण पोषण कैसे कर सकता है।

      मैं नयी और पुरानी पेंशन की तकनीकी पहलुओं पर नही जाना चाहता मैं तो उन सामाजिक पहलुओं पर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं जिसकी तस्वीर बहुत दर्दनाक है।सबसे मुख्य बात पुरानी कर्मियों का GPF कटता है जो कि सरकारी खजाने में जाता है और ब्याज भी वर्तमान दर की देय होती है वहीं नई पेंशन स्कीम में कर्मचारी का CPF कटता है जिसमे कर्मचारी के मूल वेतन की 10% राशि कटती है जबकि इतनी ही राशि सरकार या नियोक्ता द्वारा डाली जाती है।यह सब राशि शेयर बाजार में लगती है इसे सरकारी खजाने में नही रखा जाता।यहाँ भी सरकार ने एक कर्मी की जमा पूंजी को बाजार के हवाले कर दिया।एक कर्मचारी GPF पहले अपनी मर्जी से जमा करता था लेकिन NPS के अधीन कर्मी चाहकर भी बचत नही कर सकता।GPFके एक कर्मी जब मर्जी,जरूरत के हिसाब से अपना पैसा निकाल सकता है वहीं नई पेंशन योजना में CPF में जमा पैसा बहुत ही कड़े नियम व शर्तें पूरी करने के बाद भी 10 साल बाद ही निकाल सकता है जिसके लिए फिर एक नई शर्त है।जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपना ही पैसा शेयर बाजार में लगाकर असहाय होकर उसको ताकते रहना।ऊपर से सबसे बड़ा मजाक क्या हो सकता है कि जो कर्मचारी जितनी राशि जमा कर रहा है उसकी वह राशि शेयर बाजार में कम हो रही है जिसमे कोई निश्चित रिटर्न नही है।एक कर्मी,जिसने 15-20 वर्ष सरकारी नौकरी करने के बाद अपने बच्चों एवं परिवार पर सारी जमापूंजी ख़र्च की ,लेकिन जब बुढापा आया,तो वही बच्चे माँ बाप को छोड़कर चले जाते हैं।इससे दुखदायी और क्या हो सकता है कि उसकी सेवानिवृत्ति पर सरकार ने भी उसे भूखा मरने के लिए असहाय छोड़ दिया,आखिर क्यों??
मैं व्यवस्था के कुछेक प्रश्नों का समाधान मांगूंगा कि यदि पुरानी पेंशन से देश का वित्तीय घाटा बढ़ा, तो क्या माननीयों की पेंशन से यह घाटा नही बढ़ा होगा? एक बात नही समझ नही आयी कि यदि 2004 के बाद नियुक्त होने वाले कर्मचारियों की पुरानी पेंशन स्कीम बन्द कर दी गयी तो फिर वर्ष 2004 के बाद चुने हुए माननीयों की पेंशन क्यों नही बन्द की गई?
       किसी भी लोकतांत्रिक देश मे कल्याणकारी राज्य ही वहां की परिभाषा है।वर्तमान में पूरे देश मे पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठ रही है,क्योंकि न्यू पेंशन के परिणाम को देखकर कदापि न्यायोचित नही कि केवल समय के आधार पर आप अपने कर्मचारियों को अलग-अलग पेंशन दें,वह भी तब,जब वह एक ही पद पर सेवनिवृत्त हुए हों।आज जरूरत है सरकारी क्षेत्र को ऊपर उठाने की और इसको ऊपर मात्र वहाँ के कर्मी ही उठा सकते हैं वह भी तब जब उनका बुढापा सुखदायी प्रतीत होगा।कोई भी इंसान वर्तमान स्थिति से खुश नही होता,खुश होता है वह अपने भविष्य को देखकर,भविष्य की तस्वीर ही उसकी वर्तमान क्षमता को बढ़ाती है।
   उम्मीद है देश-प्रदेश की सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए उसकी पेंशन को बहाल करेंगी,जिस पेंशन को हमारे माननीय या 2004 के पहले के कर्मी उपभोग कर रहे हैं।


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