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शासनादेश  आवेदन पत्र भरने हेतु महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश   ( ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व दिशा निर्देश ध्यान पूर्वक पढ़ लें एवं आवेदन के प्र...

Sunday, 9 April 2017

RAEBARELI:प्राथमिक स्कूलों में लैब निर्माण में सार्वजनिक हुई लापरवाही, लैब का बजट लैप्स ♨सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक वेदपति मिश्र ने मामले पर खासी नाराजगी जताते हुए बीएसए के निलम्बन को लेकर सचिव बेसिक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी है।

प्राथमिक स्कूलों में लैब निर्माण में सार्वजनिक हुई लापरवाही, लैब का बजट लैप्स
♨सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक वेदपति मिश्र ने मामले पर खासी नाराजगी जताते हुए बीएसए के निलम्बन को लेकर सचिव बेसिक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी है।
📚रायबरेली : प्राथमिक स्कूल की जान्हवी निजी स्कूल की ¨प्रसी की तरह विज्ञान के प्रोजेक्ट बना सके और गणित के गुणसूत्रों को सीख सके। इसके लिए शासन ने प्राथमिक स्कूलों में राष्ट्रीय आविष्कार योजना के तहत लैब बनाने का निर्णय लिया। जिले को 70 हजार रुपये प्रति लैब के हिसाब से 37 लैब का बजट मिल भी गया, लेकिन बीएसए साल भर में कोई निर्माण एजेंसी ही नहीं ढूंढ पाए, लिहाजा बजट लैप्स हो गया। इस लापरवाही पर डीएम जांच करा रहे हैं तो वहीं शासन ने भी इस पर नाराजगी जताई है। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय ने नवाचार योजना के अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान योजना का संचालन किए जाने के निर्देश पिछले साल दिए गए थे। आशीष दीक्षित की पड़ताल करती रिपोर्ट।इस योजना का उद्देश्य छात्र छात्रओं में गणित, विज्ञान व प्रौद्योगिकी की समझ को विकसित करना।उनका प्रयोग करना, विश्लेषण करना, निष्कर्ष निकालना, मॉडल तैयार करना।खोज करना, विवेकपूर्ण तार्किकता। परीक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ विज्ञान व गणित के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना है।26लाख 60 हजार रुपए होने थे खर्च ।जिले में योजना के तहत हर ब्लाक में दो लैब प्राथमिक स्कूल में बननी थी। इस तरह शासन ने 26 लाख 60 हजार रुपए आवंटित करा दिए लेकिन किसी भी ब्लाक में लैब नहीं बन सकी।यह अनदेखी या फिर कुछ और जब शासन ने लैब निर्माण के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को धन आवंटित करा दिया तो फिर लैब क्यों नहीं बनायी गयी। यह एक सवाल अनसुलझा बन कर रहा गया है। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों से मनमाफिक कमीशन सेट नहीं हो सका।इसी कारण इस बड़ी योजना की अनदेखी की गई। वहीं शासन के आदेश के बाद बेसिक स्तर पर कम करने की कोई संजीदगी नहीं दिखायी गयी। कई बार वित्त विभाग ने इस पर अवगत भी कराया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।


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