��हलचल एक नाम विश्वास का ��शिक्षा विभाग की समस्त खबरें एवं आदेश सबसे तेज एवं सबसे विश्वसनीय सिर्फ हलचल पर - सौरभ त्रिवेदी

Breaking

Tuesday, 18 April 2017

SHRAVASTI:आज दिनांक 18-04-2017 को बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान में केंद्रीय विद्यालय गिलौला- श्रावस्ती के प्रांगण में जिला अध्यक्ष अजीत शुक्ल की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई। 🎯बैठक में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद मौर्य, जिला संरक्षक राकेश तिवारी, जिला उपाध्यक्ष बृज किशोर सिंह, मंडल सोशल मीडिया प्रभारी अमिलेन्दु श्रीवास्तव, हरीश कुमार, रणविजय मिश्र, विशाल टंडन, राजेश पाठक आदि लोगो ने प्रतिभाग करते हुए शिक्षकों के सामने आने वाली सभी समस्याओं पर विस्तृत रूप से परिचर्चा किया।

आज दिनांक 18-04-2017 को बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान में केंद्रीय विद्यालय गिलौला- श्रावस्ती के प्रांगण में जिला अध्यक्ष अजीत शुक्ल  की अध्यक्षता में  महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई।
🎯बैठक में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद मौर्य, जिला संरक्षक राकेश तिवारी, जिला उपाध्यक्ष बृज किशोर सिंह, मंडल सोशल मीडिया प्रभारी अमिलेन्दु श्रीवास्तव, हरीश कुमार, रणविजय मिश्र, विशाल टंडन, राजेश पाठक आदि लोगो ने प्रतिभाग करते हुए शिक्षकों के सामने आने वाली सभी समस्याओं पर विस्तृत रूप से परिचर्चा किया।

श्रावस्ती।समय से वेतन न देना, जनप्रतिनिधियो द्वारा शिक्षकों से अभद्रता से पेश आना, पुरानी पेंशन बहाली, बच्चो का गेहूँ मड़ाई अन्य कृषि कार्यो में व्यस्त होने के कारण गिरती हुई बच्चो की उपस्थिती, आदि समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गयी। श्री विनोद मौर्य द्वारा कहा गया कि माध्यमिक शिक्षकों की तरह प्राथमिक शिक्षकों को विधान परिषद में सीटें निर्धारित होनी चाहिए जिससे प्राथमिक शिक्षको के न्याय की लड़ाई लड़ी जा सके। अजीत शुक्ल जी ने कहा कभी जमाना था, जब आज के वरिष्ठ आईएएस सरकारी स्कूलों में ही पढ़कर ही अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर पाए। आज समय ही नहीं, सरकार की नीतियां भी बदल गई हैं। हर किमी पर खरपतवार की तरह स्कूल की नर्सरी उग आई है। सारे प्राईवेट स्कूलों ने परिषदीय विद्यालयों को ठेंगा दिखा दिया है। अयोग्य टीचर होकर भी नर्सरी को चमचमाए हुए हैं। सरकारी स्कूलों में योग्य टीचर होने के बावजूद परिणाम बहुत सकारात्मक नहीं दिख रहे। इसका प्रमुख कारण शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो में लगाना और शिक्षक छात्रों का अनुपात मेंटेन न होना है। वही कई बार गृह संपर्क करने के बाद जब बच्चा स्कूल आता है  बच्चों से प्यार से ही शिक्षक देर से आने की वजह पूछता है तो पता चलता है बच्चा सुबह चार बजे से ही गेहू काट रहा था वही बच्ची बर्तन मांजने के बाद आ रही है, मां के नवजात बच्चे की देखभाल करने की वजह से देर हो गई या किसी के घर में घरेलू सहायिका है। कहीं अगर टीचर ने तेज से डांट लगा दी तो अभिभावक टीचर को बच्चे के ही सामने डांटने चले आते हैं। कहते हैं कि क्या करें दिक्कत है। पहनने के लिए ओढ़ना नहीं है, मजूरी करती है तो महीना दुई सौ पा जाती है, उसी से उसके लिए फिराक खरीद लेते हैं। हम तो खाना व दूध के चक्कर में कभी-कभार भेज देते हैं। इनके पढ़े या न पढ़ेे से हमें का लाभ? खाना खाए के बाद आप छुट्टी दे दिया करें नहीं तो कल से स्कूल नहीं भेजेंगे।


Adbox