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Tuesday, 11 April 2017

UGC : विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में न हों मनमाने नियम: यूजीसी

विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में न हों मनमाने नियम: यूजीसी

नई दिल्ली, प्रेट्र : छात्र जीवन में एक वर्ष बेकार जाने का उसके पेशेवर संभावनाओं पर असर पड़ता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने राजस्थान के एक शिक्षण संस्थान को 50,000 रुपये मुआवजा भरने का आदेश देते हुए यह कहा। शिक्षण संस्थान ने एक छात्र को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से मना कर दिया था। इस कारण छात्र कॉलेज में नामांकन नहीं करा सकी और पढ़ाई में एक वर्ष पिछड़ गई। 1 आयोग ने राजस्थान के झुनझुनू में स्थित झुनझुनू अकादमी को बन्ने सिंह शेखावत को मुआवजे की राशि सौंपने का आदेश दिया है। शेखावत की बेटी को स्कूल ने 2013 में स्थानांतरण प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था। इससे उनकी बेटी को कॉलेज में 2013-14 सत्र के दौरान एक वर्ष का नुकसान हुआ था।1एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य अजित भरिहोक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हर शिक्षण संस्थान नामांकन से पहले चरित्र प्रमाण पत्र/टीसी लेते हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि अकादमी के गलत काम से याची की बेटी 2013-14 में नामांकन नहीं करा सकी। इसका असर छात्र के रोजगार और प्रोन्नति पर पड़ेगा।’1शेखावत के मुताबिक, उनकी बेटी 2013 में 12वीं की परीक्षा पास कर गई थी। स्कूल ने प्रमाण पत्र जारी करने से पहले 10,000 रुपये की मांग की। जबकि कोई शुल्क बकाया नहीं था। प्रमाण पत्र जारी नहीं करने से उनकी बेटी का कॉलेज में नामांकन नहीं हो पाया।नई दिल्ली, प्रेट्र : छात्र जीवन में एक वर्ष बेकार जाने का उसके पेशेवर संभावनाओं पर असर पड़ता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने राजस्थान के एक शिक्षण संस्थान को 50,000 रुपये मुआवजा भरने का आदेश देते हुए यह कहा। शिक्षण संस्थान ने एक छात्र को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से मना कर दिया था। इस कारण छात्र कॉलेज में नामांकन नहीं करा सकी और पढ़ाई में एक वर्ष पिछड़ गई। 1 आयोग ने राजस्थान के झुनझुनू में स्थित झुनझुनू अकादमी को बन्ने सिंह शेखावत को मुआवजे की राशि सौंपने का आदेश दिया है। शेखावत की बेटी को स्कूल ने 2013 में स्थानांतरण प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था। इससे उनकी बेटी को कॉलेज में 2013-14 सत्र के दौरान एक वर्ष का नुकसान हुआ था।1एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य अजित भरिहोक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हर शिक्षण संस्थान नामांकन से पहले चरित्र प्रमाण पत्र/टीसी लेते हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि अकादमी के गलत काम से याची की बेटी 2013-14 में नामांकन नहीं करा सकी। इसका असर छात्र के रोजगार और प्रोन्नति पर पड़ेगा।’1शेखावत के मुताबिक, उनकी बेटी 2013 में 12वीं की परीक्षा पास कर गई थी। स्कूल ने प्रमाण पत्र जारी करने से पहले 10,000 रुपये की मांग की। जबकि कोई शुल्क बकाया नहीं था। प्रमाण पत्र जारी नहीं करने से उनकी बेटी का कॉलेज में नामांकन नहीं हो पाया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कहा है कि सहायक प्रोफेसर पद पर सीधी नियुक्ति के लिए कोई भी विश्वविद्यालय अपने अलग नियम लागू नहीं करे। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने इस नियुक्ति के लिए कई विशेष योग्यताएं तय कर दी हैं। इसके खिलाफ यूजीसी को कई शिकायतें मिली थीं। 1यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय या कॉलेज सहायक प्रोफेसर पद पर सीधी नियुक्ति के लिए अपने अलग नियम नहीं बनाएं। सभी यूजीसी की ओर से बनाए गए नियमों की पालना करने के लिए बाध्य होंगे। यूजीसी के नियमों के मुताबिक इस पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम 55 फीसदी अंकों के साथ मास्टर्स की डिग्री और नेट या समकक्ष परीक्षा में पास होना जरूरी है। जिन मामलों में पीएचडी को पर्याप्त माना गया है, उनमें यह नेट की जगह ले सकता है। 1पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय ने सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मंगवाए थे। विवि ने यूजीसी की ओर से तय नियमों के अतिरिक्त अपनी तरफ से भी कई शर्ते जोड़ दी हैं। विवि ने सौ अंकों का पैमाना तय किया है, जिसमें न्यूनतम 75 फीसदी अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसमें शैक्षणिक योग्यता को 47 अंक, प्रकाशित शोध पत्रों के लिए 33 अंक और शिक्षण के अनुभव के लिए 20 अंक रखे गए हैं।’>>विवि अनुदान आयोग के बनाए नियमों की पालना करें सभी1’>>दिल्ली विवि ने अपनी तरफ से तय की हैं कुछ विशेष योग्यताएंशिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के लिए बिल पेश1नई दिल्ली, प्रेट्र : सरकार ने लोकसभा में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक पेश कर दिया। यह विधेयक प्राथमिक शिक्षकों को अनिवार्य न्यूनतम योग्यता हासिल करने के लिए 2019 तक का समय देने के लिए पेश किया गया है। एक अप्रैल 2010 से लागू मौजूदा कानून के तहत इन शि

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