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Friday, 23 June 2017

ALLAHABAD:किताबों के मूल्य व कागज पर यूपी बोर्ड का अंकुश, बदली प्रकाशन नीति 🎯कक्षा 9 से 12 तक की किताबों का प्रकाशन खुले बाजार को सौंपा गया। 🎯यूपी बोर्ड के कक्षा 9 व 10 में हंिदूी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, प्रारंभिक गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा इंटर स्तर में हंिदूी, अंग्रेजी, गणित व अर्थशास्त्र विषय की किताबों को परिषद के नियंत्रण से मुक्त किया गया है। 🎯पिछले साल सात प्रकाशकों को इन्हीं किताबों के प्रकाशन का निर्देश दिया गया था।

किताबों के मूल्य व कागज पर यूपी बोर्ड का अंकुश,
बदली प्रकाशन नीति
🎯कक्षा 9 से 12 तक की किताबों का प्रकाशन खुले बाजार को सौंपा गया।
🎯यूपी बोर्ड के कक्षा 9 व 10 में हंिदूी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, प्रारंभिक गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा इंटर स्तर में हंिदूी, अंग्रेजी, गणित व अर्थशास्त्र विषय की किताबों को परिषद के नियंत्रण से मुक्त किया गया है।
🎯पिछले साल सात प्रकाशकों को इन्हीं किताबों के प्रकाशन का निर्देश दिया गया था।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : यूपी बोर्ड की किताबों के प्रकाशक मनमाना मूल्य तय नहीं कर सकेंगे। साथ ही किताबों में प्रयोग होने वाले कागज की गुणवत्ता से छेड़छाड़ पर कार्रवाई भी होगी। प्रकाशकों पर मूल्य व कागज की गुणवत्ता का अंकुश लगाने के लिए यूपी बोर्ड की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, मंजूरी मिलते ही इस दिशा में कड़े निर्देश जारी किये जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है, क्योंकि इस बार माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की किताबें मुहैया कराने का जिम्मा खुले बाजार को सौंपा गया है।यूपी बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक विद्यालयों के लिए किताबों का प्रबंध माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से होता रहा है। हर साल बोर्ड के अफसर कुछ विषयों की किताबें प्रकाशित करने के लिए प्रकाशकों का चयन करते रहे हैं। इस बार अन्य वर्षो की अपेक्षा अलग रुख अपनाते हुए बोर्ड ने किताबें मुहैया कराने का जिम्मा खुले बाजार को सौंपने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन कुछ दिन पहले ही बोर्ड के प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका है। पहली जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र 2017-18 में कक्षा 9 से लेकर 12 तक की किताबों को परिषद के नियंत्रण से मुक्त करने का आदेश जारी किया गया है। अब निजी प्रकाशक पाठ्यक्रम के अनुसार स्वतंत्र रूप से पुस्तकें प्रकाशित कर सकेंगे। किताबों के प्रकाशन की नीति बदलने के बाद बोर्ड अफसरों को यह चिंता सता रही थी कि प्रकाशक किताबों का मूल्य मनमाने तरीके से तय कर सकते हैं साथ ही उसमें प्रयोग होने वाले कागज की गुणवत्ता से भी समझौता संभव है। ऐसे में बोर्ड सचिव ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि पिछले वर्षो की तरह किताबों का मूल्य बेसिक शिक्षा परिषद से कोटेशन लेकर तय कर दिया जाए और प्रकाशकों को यह निर्देश दिया जाए कि वह कागज भी तय मानक का ही लगाएंगे। ऐसा न होने पर प्रकाशक पर कार्रवाई हो। माना जा रहा है कि जल्द ही शासन इस संबंध में बोर्ड को निर्देश जारी करेगा, जिसमें प्रकाशन पर अंकुश रखने की जिम्मेदारी यूपी बोर्ड की ही होगी।


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