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Monday, 12 June 2017

ALLAHABAD:यूपीपीएससी को लेकर पीएमओ के पत्र पर शासन सख्ती के साथ गंभीर 🎯पीसीएस परीक्षा में कॉपी बदलने का प्रकरण 🎯आयोग पर जल्दी कस सकता है जांच का शिकंजा

यूपीपीएससी को लेकर पीएमओ के पत्र पर शासन सख्ती के साथ गंभीर
🎯पीसीएस परीक्षा में कॉपी बदलने का प्रकरण
🎯आयोग पर जल्दी कस सकता है जांच का शिकंजा
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद।उप्र लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सीबीआइ जांच कराने की दिशा में प्रदेश सरकार बढ़ रही है। पिछले दिनों शासन ने आयोग के अध्यक्ष से पांच साल की भर्तियों का सारा रिकार्ड लिया है। जांच की ओर बढ़ने में रायबरेली की सुहासिनी बाजपेई की सक्रियता का भी अहम रोल है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सुहासिनी को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने का समय देने के बजाय आयोग के खिलाफ की गई शिकायतों का पुलिंदा मुख्य सचिव को भेजा है। इसके बाद शासन स्तर पर आयोग को लेकर गतिविधि तेज हुई है। 1पीसीएस 2015 की मुख्य परीक्षा में सुहासिनी की उत्तरपुस्तिका बदल गई थी। यह उजागर होने के बाद आयोग ने अलग से सुहासिनी का साक्षात्कार कराया था। हालांकि उसमें सुहासिनी को अनुत्तीर्ण घोषित किया गया। यह प्रकरण ‘दैनिक जागरण’ में प्रमुखता से प्रकाशित होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में वाराणसी की रैली में उठाया था। इससे आयोग की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे। संयोग ही है कि 22 मार्च को सुहासिनी ने पीएम से मिलने का समय मांगा। पीएमओ ने मिलने का कारण व अन्य ब्योरा मांगा। उसी दिन प्रदेश की भाजपा सरकार ने आयोग में साक्षात्कार और परीक्षा परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी, जो अब तक जारी है। 23 मार्च को सुहासिनी ने आयोग के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा पीएमओ को सौंप दिया। पीएमओ ने सुहासिनी की पीएम से मुलाकात कराने के बजाय उसका शिकायती पत्र मुख्य सचिव को भेजकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस पत्र की प्रति सुहासिनी को भी भेजी गई है। इस गतिविधि के बाद ही सरकार ने आयोग से सारा ब्योरा तलब किया है। माना जा रहा है कि जांच के नतीजों का जल्द एलान होगा।
📚आयोग ने आरटीआइ का दिया जवाब→ सुहासिनी ने 24 अप्रैल को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पीसीएस परीक्षा 2015 के संबंध में आयोग से छह सवाल पूछे थे। एक माह बाद भी आयोग ने उसका जवाब नहीं दिया था, जिसे दैनिक जागरण ने प्रकाशित किया था। शासन की सख्ती से आयोग ने बीते पांच जून को सभी बिंदुओं का जवाब सुहासिनी को भेजा है। सुहासिनी का कहना है कि सभी जवाब गोलमोल दिये गए हैं। आयोग सही सूचना भी नहीं दे रहा है। कुछ सवालों के जवाब देने की जिम्मेदारी शासन पर डाल दी गई है।


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