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Thursday, 22 June 2017

ALLAHABAD:सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंदराम किए गए निलंबित 🎯गोविंद राम को निलंबन अवधि में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से संबंद्ध किया गया है।

सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंदराम किए गए निलंबित
🎯गोविंद राम को निलंबन अवधि में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से संबंद्ध किया गया है।
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : इलाहाबाद के सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि इलाहाबाद के प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) रहने के दौरान उन्होंने एक संस्कृत विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को साढ़े चार लाख रुपये से अधिक का भुगतान करा दिया। गोविंद राम को निलंबन अवधि में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से संबंद्ध किया गया है। श्रीनाथ संस्कृत पाठशाला सिरसा इलाहाबाद के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य उमाशंकर त्रिपाठी के देयक भुगतान मामले में इलाहाबाद के सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। 1 उन पर आरोप है कि इलाहाबाद का डीआइओएस रहने के दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को चार लाख 51 हजार 621 रुपये का अनुचित लाभ दिया है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के वेतन अवशेष के देयक में 18 वर्ष नौ माह की अनुपस्थिति की अवधि को भी शामिल किया गया। वेतन का अवशेष देयक तैयार करने में शासकीय प्रावधानों की अनदेखी हुई है साथ ही उत्तर प्रदेश राजकीय कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का उल्लंघन किया गया है।राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : इलाहाबाद के सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि इलाहाबाद के प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) रहने के दौरान उन्होंने एक संस्कृत विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को साढ़े चार लाख रुपये से अधिक का भुगतान करा दिया। गोविंद राम को निलंबन अवधि में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से संबंद्ध किया गया है। श्रीनाथ संस्कृत पाठशाला सिरसा इलाहाबाद के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य उमाशंकर त्रिपाठी के देयक भुगतान मामले में इलाहाबाद के सह जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। उन पर आरोप है कि इलाहाबाद का डीआइओएस रहने के दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को चार लाख 51 हजार 621 रुपये का अनुचित लाभ दिया है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के वेतन अवशेष के देयक में 18 वर्ष नौ माह की अनुपस्थिति की अवधि को भी शामिल किया गया। वेतन का अवशेष देयक तैयार करने में शासकीय प्रावधानों की अनदेखी हुई है साथ ही उत्तर प्रदेश राजकीय कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का उल्लंघन किया गया है।


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