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Thursday, 13 July 2017

बेसिक शिक्षकों के समायोजन, स्थानांतरण व अंतर जिला तबादलों के पहले ही महकमा बेसिक शिक्षा अधिकारियों से हार गया है। शिक्षकों का सैलरी डाटा फीड करने की प्रक्रिया तीन महीने से चल रही है लेकिन, बीएसए के रुचि न लेने के कारण वह अंजाम तक नहीं पहुंच सकी

बेसिक शिक्षकों के समायोजन, स्थानांतरण व अंतर जिला तबादलों के पहले ही महकमा बेसिक शिक्षा अधिकारियों से हार गया है। शिक्षकों का सैलरी डाटा फीड करने की प्रक्रिया तीन महीने से चल रही है लेकिन, बीएसए के रुचि न लेने के कारण वह अंजाम तक नहीं पहुंच सकी, इसीलिए अब अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन ऑफलाइन कराने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सूबे के कई बीएसए की कार्यशैली के खिलाफ जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारियों ने शासन को लिखा है लेकिन, वह अब भी पद पर जमे हैं। 1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों का समायोजन व तबादला हमेशा से विवादों में रहा है, चहेतों को मनचाहा स्कूल व अन्य शिक्षकों को दूर के स्कूलों में भेजा जाता रहा है। इस बार शासन ने उसे पारदर्शी तरीके से करने का खाका खींचा। ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया, जिसमें बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अनुमोदन के सिवा कुछ भी हेरफेर करने की गुंजाइश नहीं थी। बीएसए इस प्रक्रिया को भली प्रकार समझ चुके थे, इसीलिए शुरुआती चरण में ही योजना को फ्लॉप करा दिया। शिक्षकों का सैलरी डाटा एनआइसी की वेबसाइट पर हर जिले में अपलोड कराने की प्रक्रिया तीन माह से चल रही है, पर वह अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए परिषद ने मंडलवार बेसिक शिक्षा अधिकारियों को बुलाकर उनके कार्य की प्रगति और परेशानी जानी और उसके बाद कार्य पूरा करने की कटऑफ तारीख तय की लेकिन, तारीख पर तारीख बढ़ती रही उस रफ्तार से कार्य नहीं बढ़ सका। 1बेसिक शिक्षा अधिकारियों को शासन से लेकर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों तक ने कई-कई बार पत्र लिखे, बैठकों में फटकारा गया, लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ, आखिरकार योजना धड़ाम हो गई है और पहला चरण में अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन ऑफलाइन कराना पड़ रहा है। शिक्षक अब फिर जोर-जुगत लगाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। हालत यह है कि अधिकांश जिलों में अतिरिक्त शिक्षकों को सूचीबद्ध तक नहीं किया गया और न ही जोन का चिह्न्ीकरण किया गया। ऐसे में समायोजन में मनमानी होने के पूरे आसार हैं। पिछले दिनों तमाम बीएसए हटाए जा चुके हैं लेकिन, अब तक कई ऐसे बीएसए काबिज हैं, जिन पर प्रशासनिक अफसरों ने शासन को लिखा है लेकिन, प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है

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