लखनऊ:कोर्ट के रुख से आई स्कूलों में सुविधाओं की याद 🎯हर जिले के एक ब्लॉक के स्कूलों में फर्नीचर को 125 करोड़ का प्रस्ताव। 🎯विद्यालयों में बिजली और हैंडपंप के लिए भी मांगी रकम 🎯लिहाजा स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। 🎯वहीं पानी की सुविधा से वंचित 1974 स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।

August 17, 2017

कोर्ट के रुख से आई स्कूलों में सुविधाओं की याद
🎯हर जिले के एक ब्लॉक के स्कूलों में फर्नीचर को 125 करोड़ का प्रस्ताव।
🎯विद्यालयों में बिजली और हैंडपंप के लिए भी मांगी रकम
🎯लिहाजा स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
🎯वहीं पानी की सुविधा से वंचित 1974 स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।

राजीव दीक्षित’ लखनऊ।सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सख्त रवैये के बाद बेसिक शिक्षा विभाग को परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की याद आयी है। इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर अदालत की ओर से जवाब तलब किये जाने के बाद बेसिक शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में फर्नीचर, बिजली और पानी उपलब्ध कराने के लिए शासन को 148 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में फर्नीचर नहीं हैं। इन स्कूलों में बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत टीचिंग लर्निग मैटीरियल के तहत कुर्सी-मेज उपलब्ध कराये जाने के बाद भी बड़ी संख्या में उच्च प्राथमिक स्कूल फर्नीचर की सुविधा से महरूम हैं। अखिलेश सरकार में तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने सभी परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर (बेंच-डेस्क) उपलब्ध कराने का एलान किया था। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए शासन को 1700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2008-09 से पहले परिषदीय सकूल बिजली की सुविधा से वंचित हुआ करते थे। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इन स्कूलों को रोशन करने की पहल की थी। बावजूद इसके अब भी तकरीबन 40 हजार स्कूल बिजली की सुविधा से अछूते हैं। वहीं 1974 परिषदीय स्कूलों में पानी मुहैया कराने का कोई साधन नहीं है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने जहां सरकार को स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, वहीं हाई कोर्ट ने भी फर्नीचर की अनुपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किये हैं। परिषदीय स्कूलों में एक साथ फर्नीचर उपलब्ध कराने का खर्च लगभग 1700 करोड़ रुपये है।1किसानों की कर्जमाफी और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अमली जामा पहनाने के कारण सरकार संसाधनों की किल्लत से जूझ रही है। लिहाजा बेसिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के एक-एक ब्लॉक के सभी परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर मुहैया कराने के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं पानी की सुविधा से वंचित 1974 स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।


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