इलाहाबाद:चयन बोर्ड अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता ने दिया इस्तीफा 🎯गुप्ता ने कहा है कि बीते 19 जुलाई को शासन ने विलय की बैठक की। इसके बाद पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं था। जो कार्य लंबित हैं, उन्हें नया आयोग पूरा करेगा।

August 11, 2017
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चयन बोर्ड अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता ने दिया इस्तीफा
🎯गुप्ता ने कहा है कि बीते 19 जुलाई को शासन ने विलय की बैठक की। इसके बाद पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं था। जो कार्य लंबित हैं, उन्हें नया आयोग पूरा करेगा।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने लखनऊ में अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल के कार्यालय में त्यागपत्र सौंपा। अध्यक्ष ने यह कदम चयन बोर्ड का विलय करने पर सरकार के अड़ जाने के बाद उठाया है। इस्तीफे में गुप्ता ने इसका जिक्र किया, साथ ही चयन बोर्ड में पिछले डेढ़ वर्षो में हुए कार्यो का भी विस्तार से ब्योरा दिया है। 1रिटायर्ड आइएएस अधिकारी हीरालाल गुप्ता बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उनका चयन पिछले साल माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र इलाहाबाद अध्यक्ष के रूप में हुआ। उन्होंने 27 फरवरी, 2016 को कार्यभार ग्रहण किया। उनके कार्यकाल में चयन बोर्ड में ऑनलाइन आवेदन, ओएमआर शीट का मिलान कराकर रिजल्ट देना और कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे के साथ ही जैमर आदि का प्रयोग हुआ। यही नहीं, साक्षात्कार बोर्ड में कंप्यूटर के जरिये आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई। निरंतर तेजी से काम करने की वजह से ही पिछले एक साल में अशासकीय माध्यमिक कॉलेजों के लिए करीब सात हजार से अधिक प्रवक्ता व स्नातक शिक्षकों का चयन किया।1सूबे में सरकार बदलने के बाद तमाम प्रतियोगियों ने चयन में धांधली की शिकायतें की। लिहाजा बड़े अफसर उनसे पद छोड़ने को कह रहे थे। 23 मार्च को तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर यहां भी चयन प्रक्रिया रोकी गई थी। यह प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा, वहां प्रमुख सचिव ने हलफनामा दिया कि उन्होंने कोई कार्य नहीं रोका है। इसके बाद 2013 के छह विषयों के लंबित परिणाम ताबड़तोड़ जारी कर दिए गए। यहीं से चयन बोर्ड और शासन का टकराव शुरू हुआ। इसके बाद चयन बोर्ड व उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के विलय की दिशा में सरकार बढ़ चली। चयन बोर्ड अध्यक्ष ने विलय से पहले ही पद छोड़ दिया है। इस्तीफे में उन्होंने चयन बोर्ड के विलय और अपने कार्यो को विस्तार से गिनाया है। साथ ही जो कार्य प्रस्तावित हैं उनका भी उल्लेख किया है। गुप्ता ने कहा है कि बीते 19 जुलाई को शासन ने विलय की बैठक की। इसके बाद पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं था। जो कार्य लंबित हैं, उन्हें नया आयोग पूरा करेगा, इसलिए प्रस्तावित कार्यो का ब्योरा दिया है।


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