एलटी ग्रेड शिक्षकों की भी पूरी होगी मुराद

August 05, 2017

एलटी ग्रेड शिक्षकों की भी पूरी होगी मुराद

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश भर के राजकीय स्नातक शिक्षकों (एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग) की पदोन्नतियां तीन साल से नहीं हुई है। वजह यह है कि विभाग के अफसर शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार नहीं कर सके हैं। सभी मंडल मुख्यालयों से सूची देने के लिए तमाम बार निर्देश हुए, फिर भी अनसुनी जारी रही। इसी संवर्ग की महिला शिक्षकों व प्रवक्ताओं के नियमित प्रमोशन हो रहे हैं। अफसरों की कार्यशैली से पदोन्नतियां एकांगी हो गई हैं, जो आगे चलकर प्रधानाचार्यो को प्रमोशन देने में विवाद का कारण बन सकती हैं। मुख्य सचिव के आदेश से इस पुरुष संवर्ग में उम्मीद जरूर जगी है।

माध्यमिक शिक्षा के राजकीय इंटर व हाईस्कूल कालेजों में 2014 से एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग की पदोन्नतियां नहीं हो रही हैं। शिक्षकों की वरिष्ठता का विवाद गहराने पर प्रकरण हाईकोर्ट तक पहुंचा, तत्कालीन शिक्षा निदेशक माध्यमिक अवध नरेश शर्मा ने कोर्ट में हलफनामा दिया कि वरिष्ठता सूची दुरुस्त होने तक वह इस संवर्ग की कोई पदोन्नति नहीं करेंगे। उसके बाद से कोर्ट का हवाला देकर पदोन्नतियां रोकी गईं। बीते पांच दिसंबर 2016 को शिक्षा निदेशक के हलफनामे का प्रकरण कोर्ट ने बंद कर दिया और राजकीय शिक्षक संघ ने भी शासन को अफसरों की मनमानी से अवगत कराया। शासन ने भी एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग को प्रमोशन देने का निर्देश दिया। इसके लिए मंडल मुख्यालयों से वरिष्ठता सूची मांगी गई, शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद ने कई बार पत्र जारी किया, पर सभी मंडलों से सूची उपलब्ध नहीं हो सकी। विभागीय अफसरों ने एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग को छोड़कर महिला व अन्य की पदोन्नतियां कर डाली हैं। तमाम शिक्षकों को प्रधानाचार्य पद पर प्रमोट भी किया गया है।

राजकीय कालेजों की पदोन्नतियों में शिक्षकों का कोटा तय है, लेकिन पुरुष संवर्ग को हाशिए पर रखने के कारण एकांगी प्रमोशन हुए हैं, आगे प्रधानाचार्य बने शिक्षक जब प्रमोट होंगे तो फिर यह विवाद गहराएगा कि प्रमोशन में तय नियमों का उल्लंघन हुआ है। यही नहीं पिछले दिनों राजकीय कालेजों में समायोजन को इसी आधार पर कोर्ट ने रोक दिया कि वहां पदोन्नतियां नहीं हुई है।

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