इलाहाबाद:मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने के इन्तजार में कुंद हो रही आस 🎯पुलिस महकमे में दो साल से लंबित हैं एक हजार से अधिक आवेदन

August 26, 2017
Advertisements

मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने के इन्तजार में कुंद हो रही आस
🎯पुलिस महकमे में दो साल से लंबित हैं एक हजार से अधिक आवेदन

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : चित्रकूट में डकैतों से मुठभेड़ के दौरान शहीद दारोगा जय प्रकाश सिंह के आश्रित को पुलिस महकमे में नौकरी दी जाएगी या नहीं, इस पर उन एक हजार से अधिक युवाओं की निगाह लगी है जो मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने की बाट जोह रहे हैं। मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति के लिए नई और पुरानी नियमावली का पेंच फंसा है। प्रदेश भर के एक हजार से अधिक आवेदकों के मामले पुलिस भर्ती बोर्ड और मुख्यालय में लंबित हैं। 1यह मामला हाईकोर्ट में भी गया था, जिसमें पुरानी नियमावली के तहत तीन माह में नियुक्ति दिए जाने का आदेश 10 मार्च 2016 को एकल पीठ से पारित हुआ था। इसके खिलाफ सरकार ने दूसरी बेंच में अपील की लेकिन, इस बेंच ने भी पहली एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए तीन माह में मृतक आश्रितों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश पारित किया था। आवेदकों का कहना है कि इसके बाद से वे लगातार पुलिस मुख्यालय और भर्ती बोर्ड में चक्कर लगा रहे हैं लेकिन, कहीं से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। इलाहाबाद, गाजीपुर, मेरठ, जौनपुर, देवरिया सहित अन्य जिलों के भी मृतक आश्रितों के आवेदन दो साल से लंबित हैं। गाजीपुर निवासी एक आवेदक का कहना है कि मृतक आश्रित कोटे से दारोगा भर्ती 19 अगस्त 2015 को अंतिम बार हुई थी जिसमें 388 लोग नियुक्त कर प्रशिक्षण पर भेजे गए थे। उसके बाद से सभी आवेदक नियुक्ति पाने की आस में हैं। इलाहाबाद निवासी एक युवक के पिता मिर्जापुर के एक थाने में उप निरीक्षक थे, 2011 में ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था। स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के बाद बेटे ने 2015 में पिता के स्थान पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। एक अन्य युवक के पिता इलाहाबाद पुलिस लाइन में हेड कांस्टेबिल थे, 2012 में उनका उप निरीक्षक के लिए प्रमोशन होने ही वाला था कि बीमारी से मौत हो गई। बेटे ने 2015 में पिता की जगह मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक नौकरी नहीं मिल सकी है। मिर्जापुर, देवरिया और फैजाबाद के भी आवेदकों ने अपनी समस्या बताई। कहा कि पिता तो नहीं रहे, अब उनकी उम्मीदें भी मर रही हैं। आवेदकों का कहना है कि चित्रकूट में दारोगा जयप्रकाश सिंह की शहादत के बाद मुख्यमंत्री ने उनके आश्रित परिवार को आर्थिक मदद की घोषणा तो कर दी लेकिन, मृतक आश्रित कोटे से उनके आश्रित को नौकरी देने पर कोई निर्णय न लेना इस बात का संकेत है कि कोर्ट के आदेश का पालन करने में सरकार को अब भी हिचक है।


Advertisements

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »

Related Ads