शिक्षकों के दो-दो बैंक खाते दर्ज करने में घिरे अफसर बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया से विभागीय अफसरों की कार्यशैली उजागर बेसिक शिक्षा अधिकारियों और वित्त व लेखाधिकारियों ने शिक्षकों के दो-दो बैंक खाते सैलरी डाटा में फीड कर दिया

September 08, 2017
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शिक्षकों के दो-दो बैंक खाते दर्ज करने में घिरे अफसर

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया से विभागीय अफसरों की कार्यशैली उजागर

बेसिक शिक्षा अधिकारियों और वित्त व लेखाधिकारियों ने शिक्षकों के दो-दो बैंक खाते सैलरी डाटा में फीड कर दिया

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया से विभागीय अफसरों की कार्यशैली उजागर हो गई है। तमाम जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों और वित्त व लेखाधिकारियों ने शिक्षकों के दो-दो बैंक खाते सैलरी डाटा में फीड कर दिया है। इससे वित्तीय अनियमितता होने की आशंका है कि कहीं शिक्षकों का वेतन दो-दो जगह से तो नहीं निकल रहा है। परिषद सचिव ने प्रदेश के दो दर्जन से अधिक बीएसए व वित्त अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।

परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया बीते अगस्त माह में शुरू हुई। करीब 78 हजार शिक्षकों ने एनआइसी की ओर से बनी वेबसाइट पर 19 से 28 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन किया है। इसमें हर शिक्षक को अपना सैलरी डाटा समेत अन्य सूचनाएं दर्ज करने का निर्देश दिया गया। आवेदन पूरा होने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारियों को उसका सत्यापन करके चार सितंबर तक परिषद मुख्यालय पूरा ब्योरा भेजना था। तय समय पर यह रिकॉर्ड आ गया, लेकिन उसकी जांच में तमाम खामियां सामने आई हैं। दो दर्जन से अधिक जिलों में कई शिक्षकों के सैलरी डाटा में दो-दो बैंक खाते दर्ज कर दिए गए। इस पर परिषद सचिव संजय सिन्हा ने संबंधित बीएसए और वित्त व लेखाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सबसे पहले यह जांच कर ली जाए कि किसी अध्यापक को दो बार वेतन आहरित तो नहीं हो रहा है। यह सवाल भी किया है कि एक ही अध्यापक का नाम व बैंक खाता संख्या दो जिलों से सम्मिलित करना कतई ठीक नहीं है। यदि ऐसी स्थिति थी तो सैलरी डाटा अपडेट क्यों नहीं किया गया? इसका कारण बताया जाए।

सचिव ने यह पूछा है कि यदि किसी अध्यापक का स्थानांतरण दूसरे जिले में हुआ है तो सैलरी डाटा में उक्त अध्यापकों के विवरण को हटा दिया जाना चाहिए था, ऐसा क्यों नहीं किया गया, जबकि परिषद ने सैलरी डाटा अपडेट करने के लिए एक नहीं कई बार निर्देशित किया गया। यह भी पूछा है कि अपने जिले के सैलरी डाटा में एक ही अध्यापक के नाम व बैंक खाता विवरण को दो बार क्यों भरा गया है? परिषद मुख्यालय से ऐसे शिक्षकों की पूरी सूची संबंधित जिलों को भेजकर जांच करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही परिषद को नौ सितंबर की शाम पांच बजे तक अनिवार्य रूप से अवगत कराने को कहा गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि शासन ने इस खामी पर गंभीर नाराजगी जताई है।

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