बेसिक शिक्षकों की भर्ती में देश भर के युवा कर सकेंगे आवेदन, कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन को दी मंजूरी

February 07, 2018
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यूपी में शिक्षक की नौकरी पाना होगा बेहद मुश्किल, योगी सरकार का फैसला, देश भर के युवा करेंगे आवेदन

लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों की नौकरी केलिए अब तगड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। प्रदेश सरकार ने भर्ती देश भर के युवाओं के लिए खोलने का फैसला किया है। एनसीटीई डिग्री धारक किसी भी राज्य के हों, वे आवेदन कर सकेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी।

सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने एक निर्णय में शिक्षकों की भर्ती में देश भर के पात्र युवाओं को मौका देने का निर्देश दिया था। कैबिनेट ने हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर यूपी बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली-1981 में 21वें संशोधन को मंजूरी दे दी है।

वर्तमान में प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ प्रदेश के डिग्रीधारक युवा ही आवेदन कर सकते हैं। लेकिन अब एनसीटीई की डिग्री मान्य कर दी गई है। इससे अब देश भर के एनसीटीई डिग्री धारक युवा प्रदेश की शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब जीएसटी से एक देश एक कर हो सकता है तो पात्रता रखने पर देश का नागरिक कहीं भी आवेदन कर सकता है। इससे जिले के लोगों को प्राथमिकता की व्यवस्था भी खत्म हो गई है।

ये होगा इस फैसले का असर

वर्तमान में दूसरे राज्यों से बीटीसी, बीएलएड जैसी डिग्री लेने वाले प्रदेश की शिक्षक भर्ती के लिए पात्र नहीं माने जाते हैं, भले ही वे यूपी के ही क्यों न हों। ऐसे अभ्यर्थी एनसीटीई को नियामक संस्था होने का हवाला देते हुए देश में कहीं से भी हासिल की गई डिग्री को प्रदेश की भर्तियों में मान्यता देने की मांग कर रहे थे।

प्रदेश सरकार ने इससे भी आगे जाकर देश भर से एनसीटीई से मान्य डिग्री रखने वालों को यूपी की शिक्षक भर्ती में शामिल होने को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा वर्तमान में जो जिस जिले से बीटीसी करता है, उसे उस जिले में चयन में वरीयता मिलती है। अब यह व्यवस्था भी खत्म हो गई।

इस तरह बदलती रही प्रक्रिया

बेसिक शिक्षा में शिक्षकों का पद जिले का काडर है। पहले बीटीसी डिग्रीधारक जिले के निवासी ही पात्रता रखते थे। बाद में सपा और बसपा शासनकाल में ये काडर होने के बावजूद प्रदेश भर के युवाओं को किसी भी जिले में आवेदन की व्यवस्था कर दी गई। पूर्व सरकारों की इस नीति का असर ये हुआ कि शिक्षक भर्ती के साथ ही अंतर्जनपदीय तबादले की व्यवस्था का दबाव हो गया।

नतीजा ये हुआ कि भर्तियां होती रहती हैं और तय समय बीतते ही मूल जिलों में शिक्षकों की वापसी की वजह से कई जिलों में शिक्षकों की कमी हो जाती है। योगी सरकार ने इससे भी आगे जाकर देश भर के युवाओं को बेसिक शिक्षक भर्ती में शामिल होने का अवसर दे दिया है। इससे स्थानीय युवाओं को तगड़ा झटका लगेगा।

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