चार वर्ष के लिए जारी हुई नई तबादला नीति, देखें मुख्य नियम

March 30, 2018
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चार वर्ष के लिए जारी हुई नई तबादला नीति, देखें मुख्य नियम

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के लिए बनाई गई नई नीति का गुरुवार को शासनादेश जारी हो गया। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने 2018-19 से 2021-22 तक के लिए इसकी गाइड लाइन जारी की है। पिछले मंगलवार को ही कैबिनेट ने नई तबादला नीति को मंजूरी दी थी। अभी तक एक-एक वर्ष के लिए तबादला नीति जारी होती थी लेकिन, इस सरकार ने चार वर्ष के लिए नीति बनाई है। संदिग्ध सत्य निष्ठा वाले अधिकारी और कर्मचारी संवेदनशील पदों पर तैनाती नहीं पा सकेंगे।

नई तबादला नीति में एक जिले में तीन वर्ष व एक मंडल में सात साल पूरे करने वाले समूह ‘क’ एवं ‘ख’ के स्थानांतरण का प्रावधान किया गया है। मंडलीय कार्यालयों व विभागाध्यक्ष कार्यालयों में की गई तैनाती की अवधि को मंडल में निर्धारित सात वर्ष की अवधि में शामिल नहीं माना जाएगा। पिछली सरकार में जहां तबादलों की सीमा अधिकतम दस प्रतिशत थी, वहीं भाजपा सरकार ने इसे बीस प्रतिशत कर दिया है।

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि हर विभाग में स्थानांतरित अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या विभाग की सभी संख्या के 20 फीसद तक ही सीमित रखी जाएगी। यदि इससे अधिक तबादले की जरूरत पड़ी तो समूह क और ख के लिए मुख्यमंत्री तथा समूह ग और घ के लिए विभागीय मंत्री से अनुमोदन लेना होगा। समूह ग के कार्मिकों का हर तीसरे वर्ष पटल परिवर्तन होगा। जनहित में मुख्यमंत्री कभी भी किसी के तबादले का आदेश दे सकते हैं। इस नीति में कोई बदलाव मुख्यमंत्री के आदेश के बाद ही हो सकेगा।

31 मई तक पूरे करने होंगे तबादले: सरकार ने अपने पहली तबादला नीति में आंशिक संशोधन करते हुए तबादले हर हाल में 31 मई तक पूरा करना प्रस्तावित किया है। पहले यह 30 जून थी।

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