इलाहाबाद: अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण: आपत्तियां तक नहीं कर पा रहे प्राथमिक शिक्षक। 🎯 अंतर जिला तबादले के ऑनलाइन आवेदन व आपत्तियां देने में खामियां, अधिकांश आपत्तियां आवेदन खारिज होने की कगार पर , मुख्यालय ने जिलों को भेजा।

April 12, 2018

अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण: आपत्तियां तक नहीं कर पा रहे प्राथमिक शिक्षक।
🎯 अंतर जिला तबादले के ऑनलाइन आवेदन व आपत्तियां देने में खामियां, अधिकांश आपत्तियां आवेदन खारिज होने की कगार पर , मुख्यालय ने जिलों को भेजा।

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक अंतर जिला तबादला के लिए अपनी आपत्तियां तक सही से दर्ज नहीं करा पाए हैं। तबादला के दावेदारों में से करीब छह हजार से अधिक ने आपत्ति तो की है लेकिन, उसमें न तो अपना पक्ष सही से दिया गया है और न ही संबंधित अभिलेख ही भेजे गए हैं। कई शिक्षकों ने तो महज अपनी फोटो चस्पा करके ही आपत्ति भेजी है तो कुछ ने इस पर नाराजगी जताई है कि उनका आवेदन क्यों निरस्त कर दिया गया है।
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं से अंतर जिला तबादले के लिए दो चरणों में ऑनलाइन आवेदन लिए थे। उस समय भी शिक्षकों ने गड़बड़ी की इसीलिए तमाम के आवेदन निरस्त हो गए थे। इसके बाद विभाग ने शिक्षकों ने आपत्तियां मांगी। आठ अप्रैल तक करीब छह हजार से अधिक आपत्तियां मिली हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने इन आपत्तियों को मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों को भेजा है। 16 अप्रैल तक मंडल स्तर पर आपत्तियों का निस्तारण होना है। एडी बेसिक, डायट प्राचार्य और संबंधित जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ जिलेवार बैठक करेंगे। आपत्ति करने वाले शिक्षकों को नोटिस बोर्ड और खंड शिक्षाधिकारी के माध्यम से सूचित किया जाएगा, ताकि वे कमेटी के सामने अपनी बात रख सकें। आपत्तियों के निस्तारण के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारियों के लिए 18 से 20 अप्रैल तक दोबारा वेबसाइट खोली जाएगी।
जिस पर बीएसए आवश्यक संशोधन या सत्यापन करेंगे। इसके बाद ही तबादले की कार्रवाई होगी। गंभीर या असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षकों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना था। कई शिक्षकों ने पीजीआई, एम्स, अपोलो जैसे अस्पतालों का प्रमाणपत्र लगाया तो कुछ बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने उसे मानने से इन्कार कर दिया। सचिव ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आपत्तियां निपटाने के निर्देश दिए हैं। बड़ी संख्या में आपत्तियों पर कमेटी चर्चा ही नहीं कर सकेगी, क्योंकि उनके साथ किसी तरह का प्रमाणपत्र या फिर अन्य अभिलेख नहीं लगे हैं।

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