रायबरेली: गैर जनपद से आये 281 शिक्षक ताक रहे विद्यालय आवंटन की राह 🎯फाइनल नहीं हो सकी पदस्थापन के लिये स्कूलों की लिस्ट, हाजिरी के लिए शिक्षकों को करनी पड़ रही है मारामारी।

July 11, 2018

गैर जनपद से आये 281 शिक्षक ताक रहे विद्यालय आवंटन की राह
🎯फाइनल नहीं हो सकी पदस्थापन के लिये स्कूलों की लिस्ट, हाजिरी के लिए शिक्षकों को करनी पड़ रही है मारामारी।

युवा गौरव । संवाददाता
रायबरेली। अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बाद गैर जनपदों से आए 281 शिक्षक-शिक्षिकाएं पदस्थापन के तहत विद्यालय आवंटन की राह देख रहे हैं। इन्हें हर दिन उम्मीद रहती है कि आजकल में काउंसिलिंग हो जाएगी। लेकिन, विभाग में अभी तक एकल व बंद स्कूलों की लिस्ट तक फाइनल नहीं हो सकी है। वहीं 2 जुलाई को जब स्कूल खुले तो रिलीव होकर गैर जनपदों से आए गुरुजनों को आस थी कि जल्द ही उन्हें स्कूल मिल जाएगा। इस पर हर दिन शिक्षकों की भीड़ लिपिक कार्यालय में पूछताछ भी करती रहती है। लेकिन, कोई सही जवाब नहीं दे रहा है। ऐसे में शिक्षक शिक्षिकाओं को हस्ताक्षर कर वापस लौटना पड़ रहा है। यह सिलसिला लगातार चलता चला रहा है। जिससे शिक्षकों में दिनों दिन आक्रोश पनपता जा रहा है। वहीं कोई प्रतापगढ़ से तो कोई सीतापुर से रोजाना अप-डाउन कर रहा है। वहीं, लालगंज, सलोन और ऊंचाहार से भी शिक्षिकाएं बीएसए कार्यालय की रोजाना दौड़ लगाती देखी जा सकती हैं। जो शिक्षिकाएं लंबी दूरी तय करके आई हैं, वे होटल या फिर अपने रिश्तेदारों के घर पर टिकी हैं। जिले में गैर जिलों से 281 शिक्षक-शिक्षिकाएं स्थानांतरित होकर आई हैं। इसमें प्रतापगढ़, सीतापुर, गोंडा, लखीमपुर और सीतापुर के अधिक शिक्षक शिक्षिकाएँ हैं। पदस्थापन न होने से शिक्षिकाओं में खासी बेचैनी है। सूत्र बताते हैं कि यदि काउंसिलिंग समय पर करानी होती तो एकल व बंद स्कूलों की सूची पहले ही फाइनल कर दी जाती है, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। ऐसे में सेटिंग के चलते जिसकी जितनी पहुंच होगी उसी हिसाब से लिस्ट में स्कूलों के नाम रखे जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि विभाग के अंदर विद्यालय आवंटन को लेकर खासी चकचक है। साथ ही बछरावां, हरचंदपुर व लालगंज के स्कूल हिट लिस्ट में हैं और इन्हीं ब्लॉक के स्कूलों के लिए मारामारी भी होती है। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोशिएसन जनपद इकाई रायबरेली के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि जनपद में सभी रिक्त पदों को  खोलते हुए एनआईसी पर सूची प्रकाशित करते हुए काउंसलिंग कराई जाये। जिससे विद्यालय आवंटन में पारदर्शिता बनी रहे।


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