अयोग्यों के फेहरिश्त में पूर्व सचिव संजय भीउप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सचिव का मामलाउप्र लोसेआ चयन बोर्ड के अफसर, अध्यक्ष, सदस्य हटाये जा चुके

June 02, 2017
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अयोग्यों के फेहरिश्त में पूर्व सचिव संजय भी

उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सचिव का मामला

उप्र लोसेआ चयन बोर्ड के अफसर, अध्यक्ष, सदस्य हटाये जा चुके

इलाहाबाद : उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सचिव संजय सिंह की नियुक्ति अवैध होने से भर्ती बोर्ड व विभिन्न आयोगों में विशेष हलचल नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट ने पहली बार किसी सक्षम अफसर को अयोग्य नहीं ठहराया है। 2015 से यहां उप्र लोकसेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उच्चतर शिक्षा सेवा 

आयोग के अध्यक्ष सदस्य व अफसर तक अयोग्य होते आ रहे हैं। उसी फेहरिश्त में नया नाम पूर्व सचिव का भी जुड़ गया है। सरकार ने किसी अयोग्य पर कार्रवाई नहीं है, सारे निर्देश हाईकोर्ट के आदेश पर ही हुए हैं। 1उप्र लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव को नवंबर 2015 में पद से हटना पड़ा। हाईकोर्ट ने उन्हें आयोग अध्यक्ष पद के योग्य नहीं माना। इसके एक माह पहले ही रिजवानुर्रहमान आयोग में सचिव का कार्यभार संभाल रहे थे। कोर्ट ने उन्हें भी सचिव पद से हटाने का निर्देश दिया। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष रामवीर यादव व लाल बिहारी पांडेय को हाईकोर्ट के आदेश पर हटना पड़ा। कोर्ट ने आयोग के दो सदस्यों रूदल यादव व अनिल सिंह को भी अयोग्य मानकर बाहर का रास्ता दिखाया। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र के अध्यक्ष सनिल कुमार भी इसी तरह से हटाये गए। चयन बोर्ड के मौजूदा दो सदस्यों ललित कुमार श्रीवास्तव व अनीता यादव की अयोग्यता का मामला कोर्ट में लंबित है। 


 

इन्हें पहले कामकाज करने से रोका जा चुका है। यही नहीं चयन बोर्ड से हटाये गए सनिल के बाद अनीता को कार्यवाहक अध्यक्ष का दायित्व मिला, कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर उन्हें भी पद से हटने का कहा गया।1इन सभी नियुक्तियों के पीछे सपा सरकार के एक चर्चित कार्मिक सचिव का हाथ माना जा रहा है, जिन पर नोएडा भूमि आवंटन घोटाले का आरोप लगा। उन्होंने मनमाने तरीके से आयोग, चयन बोर्ड और अन्य भर्ती बोर्डो में नियम-कानूनों को दरकिनार करके नियुक्तियां दी। उनके विरुद्ध पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलियो एफ रिबोरो तथा सात अन्य सहयोगियों ने कार्मिक सचिव के विरुद्ध याचिका दाखिल की, इसी वजह से उन्हें भी हटना पड़ा। मौजूदा दो सदस्यों की नियुक्ति का प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है। उन पर आरोप है कि सभी नियमों को दरकिनार करके उन्हें यहां नियुक्ति दी गई है, उनका आपराधिक इतिहास तक कोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। इस प्रकरण पर कभी भी निर्णय हो सकता है। आयोग व भर्ती बोर्डो को साफ-सुथरा रखने की मुहिम चलाने वाले अधिवक्ता आलोक मिश्र का कहना है कि प्रदेश सरकार को आम जनता व युवाओं ने चुना है इसके बाद भी शासन अवैध नियुक्तियां करने वालों को पद से नहीं हटा रहा है।’

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