इलाहाबाद:यूपी बोर्ड में प्रायोगिक परीक्षा की ऑनलाइन निगरानी 🎯सीसीटीवी कैमरों के सामने इस बार प्रैक्टिकल कराने का होगा निर्देश 🎯बिना परीक्षा के अंक बांटने व दूसरे के नाम पर परीक्षक बनने का खेल रुकेगा। 🎯यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरीमीडिएट परीक्षा की तैयारियों में आई तेजी

October 18, 2017
Advertisements

यूपी बोर्ड में प्रायोगिक परीक्षा की ऑनलाइन निगरानी
🎯सीसीटीवी कैमरों के सामने इस बार प्रैक्टिकल कराने का होगा निर्देश
🎯बिना परीक्षा के अंक बांटने व दूसरे के नाम पर परीक्षक बनने का खेल रुकेगा।
🎯यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरीमीडिएट परीक्षा की तैयारियों में आई तेजी

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद। यूपी बोर्ड की लिखित परीक्षा का रिहर्सल प्रायोगिक परीक्षा में होने जा रहा है। बोर्ड प्रशासन ने पहली बार ऐसी बनाई है कि एक निर्देश से दो परिणाम उसके हाथ आएंगे। प्रायोगिक परीक्षा इस बार सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराने की तैयारी है। इससे परीक्षा की शुचिता जांची जाएगी और यह पता चल सकेगा कि स्कूलों के सीसीटीवी कैमरे कैसे हैं? लगे भी हैं या नहीं? साथ ही इसके जरिये परीक्षकों पर नकेल कसना भी तय है। माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2018 की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। शासन ने परीक्षा नकल विहीन कराने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। बोर्ड प्रशासन उस पर तेजी से अमल कराने में जुटा है। पहली बार ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जा रहा है, जहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हों, शासन की ओर से जारी परीक्षा नीति में भी इसका स्पष्ट प्रावधान है। बोर्ड प्रशासन ने इस पर अमल कराने की नई पहल की है। अब तक बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं पर तमाम तरह के विवाद रहे हैं। मसलन, बिना परीक्षा कराए ही अंकों की रेवड़ियां बांट दी जाती हैं, जिन परीक्षकों की ड्यूटी लगती है उनकी जगह पर दूसरे शिक्षक परीक्षा लेने पहुंच जाते हैं। परीक्षक व विद्यालय प्रधानाचार्य मिलकर परीक्षा के नाम पर खानापूरी कर देते हैं। इन सारी शिकायतों को एक झटके में खत्म करने व निर्देशों का अनुपालन करने को प्रायोगिक परीक्षा सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराने की तैयारी है। दीपावली बाद बोर्ड प्रशासन प्रायोगिक परीक्षा का कार्यक्रम जारी करेगा उसमें निर्देश होगा कि परीक्षा कैमरे के सामने हो और इम्तिहान के बाद उसकी सीडी भी बोर्ड मुख्यालय को भेजी जाए। इससे यह परीक्षा नियमानुसार होने की उम्मीद जगी है, संभव है कि परीक्षक परीक्षार्थियों के अंक भी ऑनलाइन भेज दें, लेकिन इस पर अभी सहमति नहीं बन सकी है। असल में इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा के लिए दूसरे मंडलों के परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है, जबकि हाईस्कूल स्तर की परीक्षा आंतरिक मूल्यांकन यानी प्रधानाचार्य की निगरानी में होती रही है। परीक्षकों पर आरोप है कि वह विद्यालय प्रधानाचार्यो से अच्छे अंक देने के नाम पर सुविधाएं मांगते हैं। इस प्रक्रिया पर सख्ती से लगाम की बोर्ड ने बना ली है। यही नहीं सभी परीक्षकों की विस्तृत जांच भी इस बार कराई जा रही है। जिन शिक्षकों ने परीक्षक बनने के लिए ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन आवेदन किया है, उनके नाम संबंधित जिलों में भेजे जाएंगे और जिला विद्यालय निरीक्षकों से उनकी रिपोर्ट ली जाएगी। इससे अच्छी साख वाले शिक्षक ही परीक्षक बन सकेंगे।

Advertisements

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »

Related Ads