इलाहाबाद: अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालन में अफसर बाधा, शिक्षकों के बिना कई स्कूलों में होगी पढ़ाई 🎯उन्नाव, रायबरेली, जौनपुर, बलिया सहित तमाम जिलों में शिक्षकों ने नए स्कूल व शिक्षक चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 🎯पहले स्कूलों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, जिन स्कूलों को चिन्हित किया गया, शिक्षकों के दबाव में रातोंरात उन्हें बदल दिया गया। 🎯कई जिलों में पहले चयनित स्कूलों को रातोंरात बदल दिया गया, शिक्षक नए विद्यालयों में जाने को तैयार नहीं।

April 10, 2018
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इलाहाबाद: अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालन में अफसर बाधा, शिक्षकों के बिना कई स्कूलों में होगी पढ़ाई
🎯उन्नाव, रायबरेली, जौनपुर, बलिया सहित तमाम जिलों में शिक्षकों ने नए स्कूल व शिक्षक चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
🎯पहले स्कूलों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, जिन स्कूलों को चिन्हित किया गया, शिक्षकों के दबाव में रातोंरात उन्हें बदल दिया गया।
🎯कई जिलों में पहले चयनित स्कूलों को रातोंरात बदल दिया गया, शिक्षक नए विद्यालयों में जाने को तैयार नहीं।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : योगी सरकार की अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना को विभागीय अफसर व शिक्षक ही फेल करने पर आमादा हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन, अब तक सभी जिलों में इन विद्यालयों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह यह है कि लगातार चयनित स्कूल बदले जा रहे हैं और जिन शिक्षकों को वहां तैनाती मिलनी थी वह भी अफसरों की कार्यशैली देखकर पीछे हट रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों को कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर संचालित करने के लिए प्रदेश भर में करीब 5000 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम से संचालित करने का निर्णय हुआ। इसमें शहरी व ग्रामीण हर विकासखंड में पांच-पांच विद्यालयों का चयन हुआ। निर्देश था कि उन्हीं स्कूलों का चयन किया जाए, जो बेहतर तरीके से संचालित हो रहे हों, साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए। इन स्कूलों में कांवेंट कालेजों में पढ़े शिक्षकों को नियुक्त किया जाना है। परिषद ने इसकी समय सारिणी भी घोषित की। पहले स्कूलों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, जिन स्कूलों को चिन्हित किया गया, शिक्षकों के दबाव में रातोंरात उन्हें बदल दिया गया। वहीं, कई विकासखंडों में शिक्षकों ने इन स्कूलों में जाने के प्रति रुचि ही नहीं दिखाई। तमाम जिलों में विद्यालयों की संख्या के सापेक्ष शिक्षकों के बहुत कम आवेदन हुए। जिन शिक्षकों ने अफसरों के दबाव में किसी तरह आवेदन कर दिया वह काउंसिलिंग में नहीं पहुंचे। इसका कारण उनका विद्यालय प्रेम रहा है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए चयनित होने पर उन्हें दूसरे विद्यालयों में जाना पड़ता। उन्नाव, रायबरेली, जौनपुर, बलिया सहित तमाम जिलों में शिक्षकों ने नए स्कूल व शिक्षक चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिषद सचिव ने निर्देश दिया था कि चयनित स्कूलों में पहले से तैनात शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर उसी विकासखंड में तैनाती दी जाए लेकिन, अफसरों ने निर्देशों की अवहेलना करके शिक्षकों को दूसरे ब्लाकों में जबरन भेजा है और अपने ब्लाक में आने के लिए सुविधा शुल्क की डिमांड की जा रही है। ऐसे में तमाम शिक्षक अब इस योजना के खिलाफ भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि नए स्कूलों में अभी नामांकन चल रहा है जल्द ही शिक्षकों की तैनाती करके पढ़ाई शुरू कराई जाएगी।

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